केजीएमसी से सटे 700 साल पुराने दरगाह परिसरों पर कार्रवाई, जमीयत ने जताई गहरी चिंता

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 29-01-2026
Action taken against 700-year-old dargah complexes adjacent to KGMC; Jamiat expresses deep concern.
Action taken against 700-year-old dargah complexes adjacent to KGMC; Jamiat expresses deep concern.

 

नई दिल्ली

जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज (केजीएमसी), लखनऊ प्रशासन द्वारा परिसर से सटे हज़रत हाजी हरमैन शाहؒ के आस्ताने में की गई तोड़फोड़ तथा हज़रत मखदूम शाह मीनाؒ के परिसर में स्थित पाँच सौ वर्ष से अधिक पुराने मज़ारों के विरुद्ध जारी किए गए ध्वस्तीकरण नोटिसों पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कॉलेज प्रशासन को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि वह भ्रामक प्रचार के सहारे वक्फ संपत्तियों से जुड़े देश के कानूनों का उल्लंघन करने से बाज़ आए और तत्काल सभी नोटिस वापस ले।

मौलाना मदनी ने ऐतिहासिक तथ्यों को स्पष्ट करते हुए कहा कि केजीएमसी से सटे ये मज़ार और दरगाहें सात सौ वर्ष से भी अधिक प्राचीन हैं, जबकि किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज की स्थापना वर्ष 1912 में हुई थी। ऐसे में यह कहना कि कॉलेज परिसर में दरगाहों का कोई औचित्य नहीं है, न केवल तथ्यहीन बल्कि जानबूझकर भ्रम फैलाने का प्रयास है। उन्होंने बताया कि कॉलेज की स्थापना के समय ही, वर्ष 1912 में, राजस्व विभाग द्वारा सीमांकन कर दरगाह की भूमि को कॉलेज परिसर से स्पष्ट रूप से अलग दर्शाया गया था, जो उसकी स्वतंत्र और स्थायी कानूनी हैसियत का प्रमाण है।

उन्होंने कहा कि 26 अप्रैल 2025 को लगभग सात सौ वर्ष पुराने आस्ताना-ए-हज़रत हाजी हरमैन शाहؒ की निर्धारित सीमा के भीतर स्थित वुज़ूख़ाना, इबादतगाह तथा ज़ायरीनों की आवाजाही से जुड़ी सुविधाओं को प्रोफेसर डॉ. के. के. सिंह की निगरानी में ध्वस्त किया जाना पूरी तरह एकतरफ़ा और गैर-कानूनी कार्रवाई थी। इस कार्रवाई के लिए न तो किसी न्यायालय का आदेश मौजूद था और न ही किसी वैधानिक अनुमति का पालन किया गया। यह सब मीडिया में फैलाए गए ग़लत और भ्रामक नैरेटिव की आड़ में किया गया।

मौलाना मदनी ने स्पष्ट किया कि संबंधित भूमि वक्फ अधिनियम, 1995 के अंतर्गत विधिवत वक्फ संपत्ति है और सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड में पंजीकृत है। वक्फ कानून के अनुसार वक्फ संपत्तियों से जुड़े किसी भी विवाद या कार्रवाई का अधिकार केवल सक्षम न्यायालय को प्राप्त है, न कि किसी शैक्षणिक संस्था या उसके अधिकारियों को। ऐसे में ध्वस्तीकरण नोटिस जारी करना और धमकीपूर्ण रवैया अपनाना कानून का खुला उल्लंघन है।

अंत में मौलाना मदनी ने कहा कि ऐसे मामलों में वक्फ बोर्ड की यह ज़िम्मेदारी बनती है कि वह सक्रिय और प्रभावी भूमिका निभाए। उन्होंने मांग की कि प्राचीन मज़ारों, धार्मिक स्थलों और धरोहरों की संगठित पहचान के लिए एक विशेष अभियान चलाया जाए, जिन हिस्सों को ध्वस्त किया गया है उनकी पुनर्बहाली सुनिश्चित की जाए और मुतवल्लियों को सभी संबंधित कानूनी दस्तावेज़ों की प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध कराई जाएँ, ताकि भविष्य में इस प्रकार की अवैधानिक कार्रवाइयों और विवादों को रोका जा सके।