काठमांडू कलिंग साहित्य महोत्सव में साहित्य, संगीत और संस्कृति का संगम

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 08-06-2026
A confluence of literature, music and culture at the Kathmandu Kalinga Literature Festival
A confluence of literature, music and culture at the Kathmandu Kalinga Literature Festival

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली 

 
भारतीय अभिनेता-गायक पीयूष मिश्रा, प्रसिद्ध गायिका इला अरुण और पूर्व राजनयिक विकास स्वरूप वार्षिक काठमांडू कलिंग साहित्य महोत्सव (केएलएफ) के चौथे संस्करण में प्रमुख वक्ताओं के तौर पर शामिल रहे।
 
दो दिवसीय महोत्सव का समापन रविवार को ललितपुर के होटल हिमालय में हुआ।
 
कार्यक्रम का उद्घाटन पूर्व प्रधानमंत्री सुशीला कार्की ने किया।
 
उद्घाटन दिवस के प्रमुख आकर्षणों में मिश्रा का सत्र शामिल रहा, जो उनकी आत्मकथा “तुम्हारी औकात क्या है, पीयूष मिश्रा” पर आधारित था।
 
बहुआयामी कलाकार मिश्रा “गुलाल” के “आरंभ” और “दुनिया”, “गैंग्स ऑफ वासेपुर” के “इक बगल” तथा कोक स्टूडियो के “घर” और “हुस्ना” जैसे सामाजिक सरोकारों से जुड़े गीतों के लिए जाने जाते हैं।
 
चर्चा के दौरान उन्होंने अपने बचपन, रंगमंच के प्रति अपने जुनून और परिवार की अपेक्षाओं के बावजूद कलात्मक करियर अपनाने के लिए जरूरी दृढ़ संकल्प पर विचार साझा किए।
 
“मोरनी बागा मा बोले” और “बिछुड़ा” तथा “निगोड़ी कैसी जवानी है” जैसे लोकप्रिय गीतों के लिए पहचानी जाने वाली प्रसिद्ध गायिका इला अरुण ने भी महोत्सव में ध्यान आकर्षित किया।
 
“परदे के पीछे” शीर्षक वाले एक सत्र में उन्होंने अपनी आत्मकथा “चोली के पीछे” के बारे में बात की और अपने जीवन के सफर से जुड़ी निजी कहानियां तथा अनुभव साझा किए।
 
महोत्सव में नेपाली साहित्य और संस्कृति पर केंद्रित कई सत्र भी आयोजित किए गए, जिनमें “नेपाली कविता की वैश्विक आवाज” और “साहित्य महोत्सवों की चुनौतियां” शामिल थे।