आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
वैज्ञानिकों ने एक महत्वपूर्ण अध्ययन में दावा किया है कि मस्तिष्क की कोशिकाओं में ऊर्जा उत्पादन बढ़ाकर याददाश्त में होने वाली गिरावट को सुधारा जा सकता है। शोधकर्ताओं ने पहली बार यह दिखाया है कि कोशिकाओं के ऊर्जा केंद्र कहे जाने वाले माइटोकॉन्ड्रिया की खराब कार्यप्रणाली सीधे तौर पर डिमेंशिया और अन्य न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों से जुड़ी स्मृति हानि का कारण बन सकती है।
यह अध्ययन Inserm, University of Bordeaux और कनाडा की Universite de Moncton के वैज्ञानिकों ने मिलकर किया। शोध के निष्कर्ष प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका Nature Neuroscience में प्रकाशित हुए हैं।
शोधकर्ताओं ने एक विशेष तकनीक विकसित की, जिसकी मदद से पशु मॉडल में माइटोकॉन्ड्रिया की गतिविधि को अस्थायी रूप से बढ़ाया गया। जब मस्तिष्क की कोशिकाओं को अधिक ऊर्जा मिलने लगी, तो स्मृति से जुड़ी समस्याओं में उल्लेखनीय सुधार देखा गया।
माइटोकॉन्ड्रिया कोशिकाओं के भीतर मौजूद छोटे संरचनात्मक भाग होते हैं, जो ऊर्जा उत्पादन का काम करते हैं। मस्तिष्क शरीर के सबसे अधिक ऊर्जा खपत करने वाले अंगों में से एक है। न्यूरॉन्स को एक-दूसरे तक संदेश पहुंचाने के लिए लगातार ऊर्जा की आवश्यकता होती है। जब माइटोकॉन्ड्रिया पर्याप्त ऊर्जा नहीं बना पाते, तो न्यूरॉन्स की कार्यक्षमता प्रभावित होने लगती है और समय के साथ याददाश्त तथा सोचने-समझने की क्षमता कमजोर हो सकती है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि अल्जाइमर जैसी बीमारियों में माइटोकॉन्ड्रिया की खराबी लंबे समय से देखी जाती रही है। हालांकि अब तक यह स्पष्ट नहीं था कि यह समस्या बीमारी का कारण है या उसका परिणाम। नए अध्ययन से संकेत मिलता है कि माइटोकॉन्ड्रिया की विफलता मस्तिष्क कोशिकाओं के नष्ट होने से पहले ही संज्ञानात्मक गिरावट की शुरुआत कर सकती है।