आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
वैज्ञानिकों ने मानव कोशिकाओं की सतह पर मौजूद एक छिपे हुए "शुगर कोड" की पहचान की है, जो भविष्य में कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का शुरुआती चरण में पता लगाने में मदद कर सकता है। शोधकर्ताओं ने पाया कि कोशिकाओं की सतह पर मौजूद सूक्ष्म शर्करा संरचनाओं (ग्लाइकन) के पैटर्न कोशिका की स्थिति के अनुसार बदलते रहते हैं और इन्हीं बदलावों से बीमारी के संकेत मिल सकते हैं।
यह शोध जर्मनी के Max Planck Institute for the Science of Light के वैज्ञानिकों ने किया है। अध्ययन के नतीजे प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिका Nature Nanotechnology में प्रकाशित हुए हैं।
वैज्ञानिकों के अनुसार, मानव शरीर की प्रत्येक कोशिका एक पतली शर्करा परत से ढकी होती है, जिसे ग्लाइकोकैलिक्स कहा जाता है। यह परत कोशिकाओं को बाहरी वातावरण से संवाद करने में मदद करती है और उनके अंदर होने वाली जैविक गतिविधियों की जानकारी भी अपने भीतर छिपाए रखती है।
शोधकर्ताओं ने "ग्लाइकन एटलासिंग" नामक एक नई तकनीक विकसित की, जिसकी मदद से अत्याधुनिक सुपर-रिजॉल्यूशन माइक्रोस्कोपी का उपयोग कर कोशिकाओं की सतह पर मौजूद शर्करा अणुओं का विस्तृत मानचित्र तैयार किया गया। इस तकनीक से विभिन्न प्रकार की कोशिकाओं, रक्त कोशिकाओं और ऊतक नमूनों का अध्ययन किया गया।
अध्ययन में पाया गया कि जब प्रतिरक्षा कोशिकाएं सक्रिय होती हैं तो उनकी सतह पर मौजूद शर्करा पैटर्न बदल जाते हैं। इसी तरह कैंसरग्रस्त ऊतकों की कोशिकाओं पर भी स्वस्थ कोशिकाओं की तुलना में अलग प्रकार के शर्करा पैटर्न दिखाई दिए। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह पहली बार है जब सीधे तौर पर यह प्रमाण मिला है कि ग्लाइकोकैलिक्स कोशिका की आंतरिक स्थिति को उसकी बाहरी सतह पर प्रदर्शित करता है।