डॉक्टर ऑन व्हील्स: घर-घर पहुंच रही स्वास्थ्य सेवा

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 27-04-2026
Doctor on Wheels: Healthcare Reaching Every Doorstep
Doctor on Wheels: Healthcare Reaching Every Doorstep

 

मदुरै (तमिलनाडु)
बदलते समय में जब युवा शिक्षा और रोजगार के लिए अपने घरों से दूर जा रहे हैं, तब बुजुर्ग माता-पिता की समय पर स्वास्थ्य देखभाल एक बड़ी चुनौती बन गई है। इसी समस्या के समाधान के लिए तमिलनाडु में एक अनोखी पहल “Doctor on Wheels” शुरू की गई है, जो डॉक्टरों को मरीजों के घर तक पहुंचाकर इलाज उपलब्ध कराती है।
 
यह पहल मदुरै के रहने वाले डॉ. स्वामीनाथन द्वारा शुरू की गई थी। उनका जन्म तिरुचिरापल्ली में हुआ था और वे कनाडा में पले-बढ़े। चिकित्सा शिक्षा पूरी करने के बाद वे भारत लौट आए और एक निजी मेडिकल कॉलेज में काम करने लगे। वहां उन्होंने देखा कि कई बुजुर्ग मरीज अस्पताल तक पहुंचने में असमर्थ हैं, जिससे उन्हें उचित इलाज नहीं मिल पाता। इसी अनुभव ने उन्हें 2019 में “Doctor on Wheels” शुरू करने के लिए प्रेरित किया।
 
डॉ. स्वामीनाथन के अनुसार, उनका उद्देश्य था कि डॉक्टर मरीजों तक पहुंचें, न कि मरीज घंटों अस्पतालों में इंतजार करें। खासकर बुजुर्गों के लिए यह सेवा बेहद जरूरी है, क्योंकि उम्र बढ़ने के साथ यात्रा करना और अस्पताल जाना मुश्किल हो जाता है।
 
इस सेवा के तहत एक विशेष रूप से डिजाइन की गई मिनी एम्बुलेंस का उपयोग किया जाता है, जो एक चलती-फिरती क्लिनिक की तरह काम करती है। इसमें आईसीयू स्तर की सुविधाएं उपलब्ध हैं। इस मोबाइल यूनिट में डॉक्टर घर पर ही परामर्श देते हैं, दवाइयां उपलब्ध कराते हैं, ब्लड टेस्ट करते हैं और जरूरत पड़ने पर पोर्टेबल एक्स-रे, ईसीजी और अल्ट्रासाउंड जैसी जांच भी करते हैं।
 
इस पहल में युवा डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ और नर्सों की एक समर्पित टीम काम करती है। इनमें डॉ. ईश्वर जैसे युवा डॉक्टर भी शामिल हैं, जो एमबीबीएस के बाद उच्च शिक्षा की तैयारी के साथ-साथ मरीजों की सेवा में योगदान दे रहे हैं।
 
डॉ. ईश्वर ने बुजुर्गों की देखभाल को बेहद महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ नागरिकों को अक्सर अस्पतालों में पर्याप्त ध्यान नहीं मिल पाता, इसलिए उनके लिए विशेष स्वास्थ्य सेवाओं की आवश्यकता होती है। इसी कारण उन्होंने जेरियाट्रिक केयर (बुजुर्गों की देखभाल) पर विशेष ध्यान देने का निर्णय लिया।
 
यह टीम प्रतिदिन लगभग 60 किलोमीटर की यात्रा करती है और औसतन 25 से अधिक मरीजों का इलाज करती है। धीरे-धीरे इस पहल का विस्तार भी किया गया है। डॉ. स्वामीनाथन ने “श्यामला अस्पताल” नामक एक वृद्ध देखभाल केंद्र भी स्थापित किया है, जहां बुजुर्गों को रहने की सुविधा, इलाज, नियमित स्वास्थ्य जांच और संपूर्ण देखभाल प्रदान की जाती है।
 
डॉ. स्वामीनाथन का मानना है कि स्वास्थ्य सेवाएं केवल अस्पतालों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उन्हें लोगों के घरों तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने कहा कि कॉरपोरेट अस्पतालों में बुजुर्गों के लिए लंबा इंतजार और कठिन यात्रा एक बड़ी समस्या है। इसलिए यह सेवा उन्हें घर बैठे परामर्श, मुफ्त दवाइयां, लैब टेस्ट और फिजियोथेरेपी जैसी सुविधाएं प्रदान करती है।
 
अब तक “Doctor on Wheels” और इससे जुड़ी सेवाओं का लाभ 25,000 से अधिक मरीज उठा चुके हैं। यह पहल न केवल स्वास्थ्य सेवाओं को आसान बना रही है, बल्कि यह भी साबित कर रही है कि जब चिकित्सा सेवा में करुणा जुड़ती है, तो वह जीवन को बेहतर और अधिक सम्मानजनक बना देती है।