नई दिल्ली
बॉलीवुड अभिनेत्री आलिया भट्ट की कथित रूप से विकृत और एआई-जनित तस्वीरों के इस्तेमाल को लेकर सोशल मीडिया पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। एक पाकिस्तानी कपड़ों की कंपनी पर आरोप है कि उसने बिना अनुमति आलिया की तस्वीरों का इस्तेमाल कर अपने ब्रांड का प्रचार किया, जिससे प्रशंसकों में नाराजगी फैल गई है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस ब्रांड की आधिकारिक वेबसाइट पर आलिया भट्ट की कई तस्वीरें दिखाई गई हैं, जिनमें वह अलग-अलग रंगों और डिजाइन के परिधानों में नजर आ रही हैं। हालांकि, ध्यान से देखने पर स्पष्ट होता है कि ये तस्वीरें असली नहीं बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से बनाई गई हैं। कंपनी ने आलिया के असली फोटोशूट और सार्वजनिक कार्यक्रमों की तस्वीरों को एडिट कर उनमें अपने कपड़े जोड़ दिए हैं।
बताया जा रहा है कि इन तस्वीरों के लिए आलिया के लॉरियल पेरिस रैंप वॉक, मिलान फैशन वीक और मशहूर डिजाइनर सब्यसाची के फोटोशूट की छवियों का इस्तेमाल किया गया है। इन असली तस्वीरों को डिजिटल तरीके से बदलकर ऐसा प्रस्तुत किया गया मानो अभिनेत्री ने खुद उस ब्रांड के कपड़े पहने हों। इतना ही नहीं, विज्ञापन के कैप्शन में यह दावा भी किया गया कि आलिया को ये कपड़े बेहद पसंद आएंगे।
इस घटना के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। आलिया भट्ट के फैंस ने इसे “धोखाधड़ी”, “भ्रामक प्रचार” और “गैर-जिम्मेदार मार्केटिंग” करार दिया है। कई यूजर्स ने इस पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग भी उठाई है और कहा है कि किसी भी कलाकार की छवि का इस तरह दुरुपयोग करना न सिर्फ गलत है, बल्कि यह उनकी निजी पहचान और अधिकारों का उल्लंघन भी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि एआई तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ इस तरह के मामलों में तेजी आई है, जहां बिना अनुमति किसी की छवि या आवाज का उपयोग कर व्यावसायिक लाभ उठाया जाता है। यह न केवल नैतिक बल्कि कानूनी दृष्टि से भी गंभीर मुद्दा बनता जा रहा है।
गौरतलब है कि हाल के समय में कई बॉलीवुड सितारे अपनी छवि और आवाज के दुरुपयोग को लेकर सतर्क हो गए हैं। अभिषेक बच्चन और ऐश्वर्या राय बच्चन जैसे कलाकारों ने भी बिना अनुमति उनकी तस्वीर या आवाज इस्तेमाल किए जाने के खिलाफ कानूनी कदम उठाए हैं।
यह विवाद एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि डिजिटल युग में सेलिब्रिटीज की पहचान और अधिकारों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाए। विशेषज्ञों का कहना है कि इसके लिए सख्त कानून और जागरूकता दोनों जरूरी हैं, ताकि भविष्य में इस तरह के मामलों पर रोक लगाई जा सके।
फिलहाल, इस मामले में संबंधित कंपनी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन बढ़ते दबाव के बीच यह मुद्दा कानूनी मोड़ ले सकता है।