प्रभास की ‘द राजा साब’ रिलीज़: दो साल बाद बड़े पर्दे पर वापसी

Story by  एटीवी | Published by  [email protected] | Date 09-01-2026
Prabhas's 'The Raja Saab' released: Returning to the big screen after two years.
Prabhas's 'The Raja Saab' released: Returning to the big screen after two years.

 

हैदराबाद/मुंबई

साउथ सुपरस्टार प्रभास की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘द राजा साब’ आज दुनिया भर के सिनेमाघरों में रिलीज़ हो गई। यह फिल्म प्रभास की करीब दो साल बाद बड़े पर्दे पर वापसी है और 2026 की पहली बड़ी रिलीज़ मानी जा रही है। निर्देशक मारुति की इस हॉरर-कॉमेडी को लेकर दर्शकों और प्रशंसकों में काफी उत्सुकता देखने को मिली।
 
फिल्म को तेलुगु, हिंदी, तमिल, मलयालम, कन्नड़, बंगाली और अंग्रेज़ी भाषाओं में एक साथ रिलीज़ किया गया है। रिलीज़ के साथ ही सोशल मीडिया और फिल्म समीक्षाओं में इस पर चर्चा शुरू हो गई है। शुरुआती समीक्षाओं के अनुसार, फिल्म को आलोचकों से मिली-जुली प्रतिक्रिया मिली है। जहाँ प्रभास के अभिनय की सराहना हो रही है, वहीं कहानी, निर्देशन और विज़ुअल इफेक्ट्स को लेकर सवाल भी उठाए गए हैं।
 
बॉक्स ऑफिस पर तेज़ शुरुआत

हालाँकि एडवांस बुकिंग की रफ्तार अपेक्षाकृत धीमी रही थी, लेकिन रिलीज़ के दिन फिल्म ने ज़ोर पकड़ लिया। शुक्रवार दोपहर तक बुकमायशो पर प्रति घंटे लगभग 32 हज़ार टिकटों की बिक्री दर्ज की गई, जो एक मजबूत संकेत माना जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर पहले दिन ही अच्छा कारोबार किया और पिछली हिट फिल्म ‘धुरंधर’ के 35 दिनों से चले आ रहे नंबर-1 रन को भी पीछे छोड़ दिया।
 
टिकट कीमतों को लेकर नाराज़गी

वहीं दूसरी ओर, तेलंगाना में टिकटों की बढ़ी हुई कीमतों को लेकर कुछ दर्शकों ने नाराज़गी जताई है। कई शहरों में औसत टिकट कीमत 300 रुपये से अधिक होने पर सोशल मीडिया पर शिकायतें सामने आईं। एक दर्शक ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा कि उसने ‘द राजा साब’ के सामान्य स्क्रीन टिकट पर उतना खर्च किया, जितना ‘अवतार’ को आईमैक्स और डॉल्बी सिनेमा में देखने पर भी नहीं हुआ था।
 
फिल्म की कहानी

फिल्म की कहानी गंगम्मा (ज़रीना वहाब) और उनके पोते राजू (प्रभास) के इर्द-गिर्द घूमती है। गंगम्मा अल्ज़ाइमर से पीड़ित हैं और अपने पति पेकामेडला कनकराजू (संजय दत्त) की यादों में जीती हैं, जिन्हें एक समय का तांत्रिक बताया जाता है। जब राजू अपने दादा की तलाश में हैदराबाद पहुँचता है, तो उसे एक चौंकाने वाला सच पता चलता है—कनकराजू की मौत हो चुकी है और वह अब एक खतरनाक आत्मा के रूप में लौट चुका है। कहानी लालच, अतीत के पाप और पोते-दादा के टकराव के इर्द-गिर्द आगे बढ़ती है।
 
अभिनय और फिल्म के मजबूत पक्ष

लंबे समय बाद प्रभास को पूरी तरह कॉमिक भूमिका में देखना फिल्म की खास बात मानी जा रही है। उन्होंने अपने कम्फर्ट ज़ोन से बाहर निकलने की कोशिश की है और कुछ दृश्य दर्शकों को हँसाने में सफल भी रहते हैं। हास्य कलाकार सत्य उनके साथ अच्छा तालमेल बनाते हैं।
ज़रीना वहाब का अभिनय भावनात्मक गहराई लिए हुए है और संजय दत्त अपने किरदार में प्रभावशाली नज़र आते हैं। दूसरे हाफ में कुछ दृश्य—जैसे छायाओं से सामना, अस्पताल का भावुक दृश्य और मनोवैज्ञानिक खेल—फिल्म को थोड़ी मजबूती देते हैं।
 
कमजोरियाँ भी आईं सामने

हालाँकि निर्देशक मारुति की भव्य प्रस्तुति की कोशिश स्क्रीन पर पूरी तरह सफल नहीं हो पाई। कमजोर पटकथा, धीमी गति और टोनल असंतुलन फिल्म की बड़ी कमियाँ बताई जा रही हैं। करीब तीन घंटे की लंबाई के कारण फिल्म कई जगह खिंची हुई महसूस होती है।
मलविका मोहनन, निधि अग्रवाल और रिद्धि कुमार के किरदार सीमित दायरे में ही सिमट कर रह जाते हैं। गाने भी कहानी की गति को बाधित करते हैं। बैकग्राउंड म्यूज़िक को ज़रूरत से ज़्यादा तेज़ बताया जा रहा है, जिससे कई दृश्य अपना असर खो देते हैं।
 
तकनीकी पक्ष और रेटिंग

फिल्म का संगीत थमन एस ने दिया है, सिनेमैटोग्राफी कार्तिक पलानी की है और संपादन कोटागिरी वेंकटेश्वर राव ने किया है। तकनीकी रूप से फिल्म औसत मानी जा रही है।
फिल्म को 123telugu.com ने 2.75/5 की रेटिंग दी है।
 
कुल मिलाकर, ‘द राजा साब’ एक ऐसी हॉरर फैंटेसी है जो कुछ दृश्यों में प्रभाव छोड़ती है, लेकिन एक मजबूत और सुसंगत फिल्म बनने से चूक जाती है। प्रभास की वापसी और उनका नया अंदाज़ उनके प्रशंसकों के लिए खास है। यह फिल्म खासतौर पर प्रभास के कट्टर फैंस और हॉरर-कॉमेडी पसंद करने वाले दर्शकों को ध्यान में रखकर देखी जा सकती है—बस उम्मीदें थोड़ी सीमित रखनी होंगी।