तमिल सिनेमा के सुपरस्टार और वर्तमान में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय (थलापति विजय) की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'जन नायकन' गुरुवार को सिनेमाघरों में रिलीज होते ही पूरे दक्षिण भारत में उत्सव का माहौल बन गया। विजय की इस फिल्म को उनके अभिनय करियर की अंतिम फिल्म माना जा रहा है, इसलिए प्रशंसकों में इसे लेकर खासा उत्साह और भावनात्मक जुड़ाव देखने को मिला। तमिलनाडु के साथ-साथ केरल, कर्नाटक और तेलंगाना के कई शहरों में सिनेमाघरों के बाहर सुबह से ही हजारों प्रशंसक जुटे और ढोल-नगाड़ों, नृत्य, आतिशबाजी तथा मिठाइयां बांटकर खुशी का इजहार किया।
निर्देशक एच. विनोथ के निर्देशन में बनी इस फिल्म में विजय के साथ बॉबी देओल, पूजा हेगड़े और ममिता बैजू प्रमुख भूमिकाओं में नजर आए हैं। कई महीनों की देरी के बाद फिल्म को तमिलनाडु के एक हजार से अधिक सिनेमाघरों में रिलीज किया गया। रिलीज के साथ ही विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कषगम (TVK) के पदाधिकारियों और समर्थकों ने इसे ऐतिहासिक अवसर बताते हुए राज्यभर में समारोह आयोजित किए।
सिनेमाघरों के बाहर दिखा उत्सव जैसा माहौल
विल्लुपुरम जिले के विक्रवंडी स्थित काशी अम्मन थिएटर के बाहर टीवीके कार्यकर्ताओं ने पारंपरिक पोंगल समारोह आयोजित किया। जिला सचिव वडिवेल के नेतृत्व में थिएटर के प्रवेश द्वार पर पूजा-अर्चना की गई। प्रशंसकों ने विजय के विशाल कटआउट पर दूध से अभिषेक किया, फिल्म के गीतों पर जमकर नृत्य किया और ढोल-नगाड़ों के साथ जश्न मनाया।
रिलीज के अवसर पर आयोजकों ने नरिकुरवर समुदाय के लोगों और आम दर्शकों को मुफ्त फिल्म टिकट भी वितरित किए, ताकि अधिक से अधिक लोग फिल्म का आनंद ले सकें।
पूरे तमिलनाडु में दिखा विजय का क्रेज
रामनाथपुरम, नीलगिरि, रानीपेट और अन्य जिलों में सुबह से ही सिनेमाघरों के बाहर भारी भीड़ उमड़ी। जगह-जगह विशाल कटआउट लगाए गए, रंग-बिरंगे कंफेटी उड़ाए गए और प्रशंसकों ने विजय के समर्थन में जोरदार नारे लगाए।
रानीपेट में प्रशंसकों ने विजय की लोकप्रिय फिल्मों के गीतों पर विशेष नृत्य प्रस्तुतियां दीं। उनका कहना था कि यह कार्यक्रम अभिनेता के तीन दशक लंबे शानदार फिल्मी सफर को सम्मान देने के लिए आयोजित किया गया है।
नीलगिरि में भी फिल्म की रिलीज किसी त्योहार से कम नहीं रही। यहां संगीत, ढोल और पारंपरिक वाद्ययंत्रों के साथ विजय का स्वागत किया गया।
दक्षिण भारत के अन्य राज्यों में भी उत्साह
तमिलनाडु के अलावा तिरुवनंतपुरम, हैदराबाद और बेंगलुरु में भी विजय के प्रशंसकों ने बड़े-बड़े कटआउट लगाए और सिनेमाघरों के बाहर केक काटकर फिल्म की रिलीज का जश्न मनाया। सोशल मीडिया पर भी फिल्म से जुड़े वीडियो और तस्वीरें तेजी से वायरल होती रहीं।
मंत्रियों ने भी मनाया जश्न
फिल्म की रिलीज पर तमिलनाडु सरकार के कई मंत्री भी उत्सव में शामिल हुए। एसपीके थेन्नारासु और आरवी रंजीत कुमार कांचीपुरम के बाबू सिनेमाज पहुंचे और पार्टी कार्यकर्ताओं तथा प्रशंसकों के साथ फिल्म देखी।
इस अवसर पर मंत्री थेन्नारासु ने दर्शकों के लिए चिकन बिरयानी, लड्डू, रायता और बैंगन की सब्जी की व्यवस्था कर स्वयं लोगों को भोजन परोसा। साथ ही पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने के लिए तमिलनाडु वन विभाग की ओर से फिल्म देखने आए लोगों को पौधे भी वितरित किए गए और प्रत्येक परिवार से कम से कम एक पौधा लगाने की अपील की गई।
तमिलनाडु विधानसभा के अध्यक्ष जेसीडी प्रभाकर ने भी चेन्नई के सत्याम थिएटर में फिल्म देखी, जबकि सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री मदन राजा ने महात्मा गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण करने और मंदिरों में पूजा-अर्चना के बाद फिल्म की सफलता की कामना की।
भावुक हुए प्रशंसक
कई प्रशंसकों ने 'जन नायकन' की रिलीज को तमिल सिनेमा और तमिलनाडु की राजनीति का ऐतिहासिक दिन बताया। एक प्रशंसक ने कहा, "चुनाव से पहले वे हमारे थलापति विजय थे और अब मुख्यमंत्री विजय हैं। यह फिल्म उनके अभिनय करियर की अंतिम फिल्म मानी जा रही है, इसलिए हम बेहद उत्साहित और भावुक हैं।"
एक महिला प्रशंसक ऐश्वर्या ने कहा कि वह पिछले दो घंटे से थिएटर खुलने का इंतजार कर रही थीं। उनके अनुसार, विजय की आखिरी फिल्म होने के कारण यह पल बेहद भावुक कर देने वाला है।
30 वर्षों के शानदार फिल्मी सफर का पड़ाव
'जन नायकन' में संगीत अनिरुद्ध रविचंदर, सिनेमैटोग्राफी सत्यन सूर्यन, संपादन प्रदीप ई. राघव और प्रोडक्शन डिजाइन वी. सेल्वकुमार ने संभाला है। यह फिल्म पहले 9 जनवरी को पोंगल के अवसर पर रिलीज होने वाली थी, लेकिन कुछ दृश्यों को लेकर केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) की आपत्तियों के कारण इसकी रिलीज टल गई थी।
पिछले तीन दशकों में विजय ने 'घिल्ली', 'पोक्किरी', 'बिगिल' और 'लियो' जैसी कई सुपरहिट फिल्मों से भारतीय सिनेमा में अपनी अलग पहचान बनाई है। यदि 'जन नायकन' वास्तव में उनके अभिनय करियर की अंतिम फिल्म साबित होती है, तो यह उनके प्रशंसकों के लिए एक यादगार और भावनात्मक विदाई के रूप में हमेशा याद रखी जाएगी।