नई दिल्ली।
भारतीय सिनेमा के लिए एक और गर्व का क्षण सामने आया है। प्रतिष्ठित वेनिस अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव 2026 में भारतीय फिल्मकार अनुपर्णा रॉय एक बार फिर अपनी नई फिल्म ‘लवर्स इन द ब्लू नाइट’ (Lovers In The Blue Night) के साथ वापसी कर रही हैं। उनकी इस फिल्म का चयन महोत्सव के प्रतिष्ठित ‘ओरिज़ोन्टी (Orizzonti) प्रतियोगिता’ खंड में किया गया है, जिसे मुख्य प्रतियोगिता के बाद दूसरा सबसे महत्वपूर्ण सेक्शन माना जाता है।
अनुपर्णा रॉय की यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि पिछले वर्ष उन्होंने वेनिस फिल्म फेस्टिवल में इतिहास रचते हुए सर्वश्रेष्ठ निर्देशक (Best Director) का पुरस्कार जीतने वाली पहली भारतीय फिल्मकार बनने का गौरव हासिल किया था। अब लगातार दूसरे वर्ष उनकी फिल्म का चयन इस प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय मंच पर होना भारतीय सिनेमा की बढ़ती वैश्विक पहचान का प्रमाण माना जा रहा है।
‘लवर्स इन द ब्लू नाइट’ अनुपर्णा रॉय की दूसरी फीचर फिल्म है। उनकी पहली फिल्म ‘सॉन्ग्स ऑफ फॉरगॉटन ट्रीज़’ को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी सराहना मिली थी। दिलचस्प बात यह है कि उनकी पहली फिल्म की तरह यह नई फिल्म भी मुंबई की पृष्ठभूमि पर आधारित है। माना जा रहा है कि फिल्म महानगर के बदलते सामाजिक, भावनात्मक और मानवीय संबंधों को संवेदनशील तरीके से प्रस्तुत करती है।
फिल्म का निर्माण विकास कुमार, शारिब खान, बिभांशु राय और रोमिल मोदी ने मिलकर किया है। निर्माता टीम का कहना है कि यह फिल्म मानवीय रिश्तों, अकेलेपन, उम्मीद और प्रेम जैसे विषयों को एक अलग सिनेमाई भाषा में प्रस्तुत करती है। फिल्म के चयन से पूरी टीम बेहद उत्साहित है और इसे भारतीय स्वतंत्र सिनेमा के लिए बड़ी उपलब्धि मान रही है।
ओरिज़ोन्टी प्रतियोगिता वेनिस फिल्म महोत्सव का वह मंच है, जहां दुनिया भर के उभरते और प्रयोगधर्मी फिल्मकारों की बेहतरीन फिल्मों को जगह दी जाती है। यह सेक्शन नई कहानियों, अलग दृष्टिकोण और आधुनिक सिनेमाई शैली को प्रोत्साहित करने के लिए जाना जाता है। यहां चयनित होना ही किसी फिल्म और उसके निर्देशक के लिए बड़ी उपलब्धि माना जाता है।
इस वर्ष ‘लवर्स इन द ब्लू नाइट’ का मुकाबला दुनिया भर से चुनी गई 14 अन्य फिल्मों से होगा। प्रतियोगिता में ‘ला रगाज़ा कॉन ला लाइका’ (La Ragazza con la Leica) और ‘द बर्निंग’ (The Burning) जैसी चर्चित अंतरराष्ट्रीय फिल्में भी शामिल हैं। ऐसे में अनुपर्णा रॉय की फिल्म को कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा, लेकिन पिछले वर्ष की उनकी सफलता को देखते हुए भारतीय दर्शकों और फिल्म जगत को उनसे एक बार फिर बड़ी उम्मीदें हैं।
फिल्म समीक्षकों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में भारतीय स्वतंत्र सिनेमा ने अंतरराष्ट्रीय फिल्म समारोहों में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। अनुपर्णा रॉय जैसी युवा निर्देशकों की सफलता यह संकेत देती है कि भारतीय कहानियां अब वैश्विक दर्शकों को भी आकर्षित कर रही हैं।
वेनिस अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव दुनिया के सबसे पुराने और प्रतिष्ठित फिल्म समारोहों में से एक है। यहां किसी भारतीय फिल्म का चयन होना न केवल संबंधित फिल्मकार के लिए सम्मान की बात है, बल्कि यह भारतीय सिनेमा की रचनात्मक क्षमता और वैश्विक स्वीकार्यता को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने वाला कदम माना जाता है। अब सभी की नजरें इस बात पर हैं कि ‘लवर्स इन द ब्लू नाइट’ ओरिज़ोन्टी प्रतियोगिता में कैसा प्रदर्शन करती है और क्या अनुपर्णा रॉय एक बार फिर भारत के लिए नया इतिहास रच पाती हैं।