मैं दिवास्वप्न देखने वाला व्यक्ति हूं, वहीं से आती हैं मेरी कहानियां: इम्तियाज अली

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 12-06-2026
I'm a daydreamer, that's where my stories come from: Imtiaz Ali
I'm a daydreamer, that's where my stories come from: Imtiaz Ali

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली 

 
फिल्मकार इम्तियाज अली का कहना है कि उनकी लगभग सभी कहानियों की शुरुआत दिवास्वप्नों और कल्पनाओं से होती है।
 
‘‘जब वी मेट’’ जैसी चर्चित फिल्मों के निर्देशक का कहना है कि वह रोजमर्रा की जिंदगी में लोगों, स्थानों और घटनाओं को देखकर उनके इर्द-गिर्द संभावित कहानियां बुनने लगते हैं।
 
अली ने ‘‘पीटीआई-भाषा’’ से बातचीत में अपनी रचनात्मक प्रक्रिया के बारे में कहा कि किसी विचार के मन में आने के बाद वह लगातार विकसित होता रहता है और वह उसे अपने आसपास के लोगों को सुनाते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘फिर एक समय ऐसा आता है जब मैं बैठकर उसे लिखता हूं।’’
 
‘‘हाईवे’’, ‘‘रॉकस्टार’’ और ‘‘अमर सिंह चमकीला’’ जैसी फिल्मों का निर्देशन करने वाले, 54 वर्षीय अली की विशेषता यह भी है कि उन्होंने अपनी लगभग सभी फिल्मों की पटकथा स्वयं लिखी है।
 
अली ने कहा, ‘‘गालिब ने कहा है, ‘आते हैं ग़ायब से ये मज़ामीन ख़याल में’। हमें नहीं पता कि कहानियां कहां से आती हैं। अधिकतर वे अवचेतन मन से आती हैं, लेकिन मुझे लगता है कि मैं अपने आसपास दिखने वाली चीजों से प्रेरणा लेता हूं और फिर उन पर अपनी कल्पना का निर्माण करता हूं।’’
 
उन्होंने कहा कि उनका स्वभाव ही दिवास्वप्न देखने वाला है।
 
अली ने कहा, ‘‘मैं मूल रूप से दिवास्वप्न देखने वाला व्यक्ति हूं। मैं कमरे में बैठकर खुद का मनोरंजन करने के लिए चीजों की कल्पना करता हूं। मैं बचपन से ऐसा करता आया हूं। कक्षाओं में, यात्राओं के दौरान, ट्रेनों में और हर जगह।’’
 
निर्देशक ने कहा कि किसी व्यक्ति से मुलाकात या किसी दृश्य को देखने के बाद वह उसके बारे में कल्पना करना शुरू कर देते हैं और यह सिलसिला लंबे समय तक चलता रहता है। उन्होंने कहा, ‘‘मैं सोचता हूं कि आगे क्या हुआ होगा, वे लोग कहां गए होंगे या ट्रेन से दिखने वाले उस घर में कौन रहता होगा। इस तरह कहानियां बनती चली जाती हैं।’’
 
अली की नई फिल्म ‘‘मैं वापस आऊंगा’’ की पृष्ठभूमि भारत का विभाजन है। उन्होंने बताया कि दिल्ली और पंजाब में फिल्मों की शूटिंग के दौरान उनकी मुलाकात अनेक ऐसे लोगों से हुई, जिन्होंने विभाजन की त्रासदी झेली थी। उनकी यादों और अनुभवों ने इस कहानी को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।