Bharti Singh has endured the pain of body-shaming since childhood.
नई दिल्ली
भारत की मशहूर कॉमेडियन और टीवी होस्ट Bharti Singh अपनी बेहतरीन कॉमिक टाइमिंग और चुलबुले अंदाज के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने अपने हास्य और मेहनत के दम पर लाखों दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई है। लेकिन लोगों को हंसाने वाली भारती की जिंदगी का एक पहलू ऐसा भी है, जो काफी दर्द और संघर्ष से भरा रहा है। हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने अपने बचपन से जुड़े कई भावुक अनुभव साझा किए, जिनमें बॉडी शेमिंग का दर्द साफ झलकता है।
भारती ने बताया कि बचपन में उन्हें अक्सर उनके वजन को लेकर ताने सुनने पड़ते थे। उस दौर में किसी के शरीर, रंग या कद-काठी पर टिप्पणी करना आम बात मानी जाती थी। लोग बिना सोचे-समझे किसी को “मोटा”, “पतला” या “काला” कह देते थे और यह नहीं समझते थे कि ऐसे शब्द किसी इंसान के आत्मसम्मान को कितनी गहरी चोट पहुंचा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि उन्हें सिर्फ बाहरी लोगों से ही नहीं, बल्कि अपने परिवार से भी ऐसी बातें सुनने को मिलती थीं। भारती ने याद करते हुए बताया, “मेरी मां भी अक्सर कहती थीं कि अब खाना बंद कर दो, नहीं तो और मोटी हो जाओगी।” बचपन में ये बातें उन्हें सामान्य लगती थीं, क्योंकि उस समय समाज में इसे गलत नहीं माना जाता था। लेकिन जैसे-जैसे वह बड़ी हुईं, उन्हें एहसास हुआ कि लगातार इस तरह की टिप्पणियां किसी व्यक्ति के आत्मविश्वास को अंदर तक कमजोर कर सकती हैं।
भारती सिंह ने यह भी कहा कि मनोरंजन जगत में आने के बाद उन्होंने महसूस किया कि लोगों के मोटापे या शारीरिक बनावट का मजाक उड़ाकर हंसी पैदा करना लंबे समय से कॉमेडी का हिस्सा रहा है। कई बार कलाकारों को भी उनके वजन या लुक्स के आधार पर जज किया जाता है। हालांकि, भारती ने अपने अनुभवों से सीख लेते हुए एक अलग रास्ता चुना।
उन्होंने तय किया कि वह कभी भी किसी दूसरे इंसान का मजाक उड़ाकर लोगों को हंसाने की कोशिश नहीं करेंगी। उनका मानना है कि कॉमेडी का उद्देश्य किसी को नीचा दिखाना नहीं, बल्कि लोगों के चेहरे पर मुस्कान लाना होना चाहिए। भारती की यह सोच आज उन्हें बाकी कलाकारों से अलग बनाती है।
आज भारती सिंह न केवल एक सफल कलाकार हैं, बल्कि उन लोगों के लिए प्रेरणा भी हैं जो बॉडी शेमिंग या आत्मविश्वास की कमी जैसी समस्याओं से जूझते हैं। उन्होंने यह साबित किया है कि किसी व्यक्ति की पहचान उसके शरीर से नहीं, बल्कि उसकी प्रतिभा, मेहनत और आत्मविश्वास से होती है।
भारती की यह कहानी समाज को भी एक बड़ा संदेश देती है कि शब्दों का असर बहुत गहरा होता है। मजाक में कही गई बातें भी किसी के मन पर स्थायी घाव छोड़ सकती हैं। इसलिए जरूरी है कि हम दूसरों की भावनाओं का सम्मान करें और किसी की शारीरिक बनावट को लेकर टिप्पणी करने से बचें।