काम न मिलने के बयान पर घिरे एआर रहमान, कहा- बयान को गलत समझा गया

Story by  मलिक असगर हाशमी | Published by  [email protected] | Date 18-01-2026
A.R. Rahman faced criticism for his statement about not getting work, and said his intentions were misunderstood.
A.R. Rahman faced criticism for his statement about not getting work, and said his intentions were misunderstood.

 

मलिक असगर हाशमी/ नई दिल्ली

ऑस्कर विजेता और ‘जय हो’ जैसे कालजयी गीतों के रचयिता ए.आर. रहमान एक बार फिर सार्वजनिक विमर्श के केंद्र में हैं। हाल ही में दिए गए एक बयान के बाद उठे विवाद पर उन्होंने स्पष्ट और संवेदनशील शब्दों में अपनी बात रखी, ताकि उनके आशय को सही संदर्भ में समझा जा सके। रहमान ने कहा कि संगीत हमेशा से उनके लिए संस्कृति से जुड़ने, उसे उत्सव की तरह मनाने और उसका सम्मान करने का माध्यम रहा है। भारत उनकी प्रेरणा है, उनका गुरु है और उनका घर है।

उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि कभी-कभी बातों के अर्थ को गलत समझ लिया जाता है, लेकिन उनका उद्देश्य हमेशा संगीत के ज़रिए लोगों को सशक्त बनाना, उन्हें सम्मान देना और उनकी सेवा करना रहा है। किसी को दुख पहुँचाने का उनका कभी इरादा नहीं रहा और उन्हें उम्मीद है कि उनकी ईमानदारी को महसूस किया जाएगा।

दरअसल, यह विवाद उस वक्त शुरू हुआ जब रहमान ने बीबीसी को दिए एक इंटरव्यू में हिंदी सिनेमा में काम न मिलने के अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि बीते आठ वर्षों में उनके करियर में एक तरह का सूखा रहा है और इस दौरान उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि क्या इंडस्ट्री में बदलते दौर के साथ कुछ गैर-कलात्मक फैसले हावी हो रहे हैं।

रहमान का मानना था कि ऐसे फैसलों से प्रोजेक्ट्स बिखर रहे हैं और रचनात्मक निरंतरता प्रभावित हो रही है। उन्होंने इसे अपने परिवार के साथ अधिक समय बिताने और सार्थक अवसरों की प्रतीक्षा करने का समय बताया। हालांकि, उनके बयान में ‘संभावित सांस्कृतिक भेदभाव’ की बात आते ही यह मुद्दा गरमा गया और इसे अलग-अलग तरह से व्याख्यायित किया जाने लगा।

इस बयान के सामने आते ही रहमान की कड़ी आलोचना भी हुई। मशहूर लेखक-गीतकार जावेद अख्तर, गायक शान, अभिनेत्री और सांसद कंगना रनौत, तथा लेखिका-स्तंभकार शोभा डे सहित कई जानी-मानी हस्तियों ने उनके कथन पर सवाल उठाए। एक रिपोर्ट के अनुसार, शोभा डे ने इस टिप्पणी को “खतरनाक” करार देते हुए कहा कि उन्होंने पिछले पचास वर्षों से हिंदी फिल्म इंडस्ट्री को करीब से देखा है और यह उद्योग काफी हद तक सांप्रदायिक भेदभाव से मुक्त रहा है। उनके नुसार, बॉलीवुड में हमेशा प्रतिभा को स्थान मिला है और धर्म या समुदाय के आधार पर भेदभाव की कोई ठोस परंपरा नहीं रही। गायक शान ने भी किसी तरह के सांप्रदायिक या अल्पसंख्यक एंगल को नकारते हुए कहा कि किसी कलाकार के करियर में उतार-चढ़ाव स्वाभाविक होते हैं और ये पूरी तरह व्यक्तिगत व विषयपरक कारणों से जुड़े होते हैं। उनके अनुसार, रहमान का कद और उनका प्रशंसक वर्ग लगातार बढ़ता रहा है, इसलिए काम में कमी को किसी खास पूर्वाग्रह से जोड़ना उचित नहीं है।

जावेद अख्तर ने भी इसी तरह की राय व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने अपने लंबे करियर में कभी इंडस्ट्री में सांप्रदायिकता का अनुभव नहीं किया। उन्होंने यह भी जोड़ा कि रहमान का सम्मान इतना ऊँचा है कि कई छोटे निर्माता उनसे संपर्क करने से पहले भी हिचकिचाते हैं, जो भारतीय संगीत में उनकी विशिष्ट स्थिति को दर्शाता है।

इस विवाद में सबसे तीखा बयान अभिनेत्री और सांसद कंगना रनौत की ओर से आया। उन्होंने कहा कि उन्हें फिल्म इंडस्ट्री में अपने राजनीतिक विचारों के कारण भेदभाव और पक्षपात का सामना करना पड़ा है, फिर भी उनके अनुसार उन्होंने रहमान से अधिक पूर्वाग्रही व्यक्ति नहीं देखा। कंगना ने यह भी दावा किया कि वह अपनी निर्देशित फिल्म ‘इमरजेंसी’ की कहानी उन्हें सुनाना चाहती थीं, लेकिन रहमान ने उनसे मिलने से भी इनकार कर दिया।

उन्हें यह बताया गया कि रहमान किसी “प्रोपेगेंडा फिल्म” का हिस्सा नहीं बनना चाहते। कंगना ने यह भी कहा कि ‘इमरजेंसी’ को कई लोगों ने मास्टरपीस बताया और विपक्षी दलों के नेताओं ने भी इसकी संतुलित और मानवीय दृष्टि की सराहना की, लेकिन रहमान उनके प्रति नकारात्मक सोच के कारण फिल्म से दूर रहे।

हालांकि, इस पूरे प्रकरण में रहमान के समर्थन में भी कई आवाज़ें उठीं। सोशल मीडिया पर उनके समर्थकों ने अभिनेता जॉन अब्राहम का एक पुराना इंटरव्यू साझा किया, जिसमें उन्होंने ‘कश्मीर फाइल्स’ जैसी फिल्मों से दूरी बनाए रखने की बात कही थी। उल्लेखनीय है कि ‘कश्मीर फाइल्स’ को एक वर्ग द्वारा “प्रोपेगेंडा फिल्म” कहा जाता रहा है। रहमान ने भी अपने बयान में इसी तरह की फिल्मों की ओर इशारा किया था, जिसे उनके समर्थकों ने रचनात्मक स्वतंत्रता के संदर्भ में सही ठहराया।

राजनीतिक स्तर पर भी इस बयान को समर्थन मिला। एआईएमआईएम के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा कि ए.आर. रहमान आज जिस मुकाम पर हैं, वह उनकी कड़ी मेहनत, संघर्ष और प्रतिभा का परिणाम है। उन्होंने हाल के वर्षों में देश में घटी कुछ घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि कलाकारों की चिंताओं को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। इसी तरह, एक अन्य चैनल पर इस्लामिक स्कॉलर मोहम्मद उस्मान ने कहा कि रहमान की बातों को नज़रअंदाज़ नहीं किया जाना चाहिए और उनके द्वारा बताए गए कारणों पर गंभीरता से विचार होना चाहिए।

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एक नजर में रहमान की उपलब्धि

विवाद पर सफाई दिए जाने के बाद रहमान को बॉलीवुड से भी समर्थन मिला। वरिष्ठ अभिनेता और पूर्व भाजपा सांसद परेश रावल ने उनके पक्ष में बयान देते हुए कहा कि ए.आर. रहमान देश का गौरव हैं और उनकी कला ने भारत को वैश्विक मंच पर सम्मान दिलाया है। रावल के अनुसार, रहमान जैसे कलाकार किसी भी संकीर्ण दायरे से ऊपर हैं और उनके योगदान को राजनीति या विवादों में नहीं बांधा जाना चाहिए।

कुल मिलाकर, ए.आर. रहमान का यह प्रकरण केवल एक बयान या प्रतिक्रिया तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारतीय सिनेमा, कला और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े व्यापक सवालों को भी सामने लाता है। रहमान की सफाई ने यह स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी समुदाय, संस्था या व्यक्ति पर आरोप लगाना नहीं था, बल्कि अपने अनुभवों को ईमानदारी से साझा करना था। संगीत के माध्यम से संस्कृति को जोड़ने वाले इस महान कलाकार की यात्रा और उनकी सोच, आज भी बहस के बीच एक सेतु की तरह खड़ी दिखाई देती है जहां संवाद, संवेदना और समझ की सबसे अधिक आवश्यकता है।