आवाज द वाॅयस/नई दिल्ली
ज़ायेद गर्ल्स कॉलेज, शाहीन बाग, नई दिल्ली में 77वें गणतंत्र दिवस पर महिला सशक्तिकरण और संवैधानिक मूल्यों को मजबूत करने का एक यादगार कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस आयोजन का संचालन जमीनी स्तर पर मुस्लिम महिलाओं के लिए जागरूकता, शिक्षा, कानूनी साक्षरता और नेतृत्व विकास के क्षेत्र में कार्यरत महिला-नेतृत्व वाली संस्था आवाज़-ए-ख़्वातीन ने किया। कार्यक्रम में आक़िल नफ़ीस (संयुक्त निदेशक, संसद) और डॉ. परवीन (संस्थापक और संयोजिका, आवाज़-ए-ख़्वातीन) मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद थे। समारोह की शुरुआत ध्वजारोहण से हुई।
इस कार्यक्रम में लगभग 1000 छात्राएँ, 30 शिक्षक-शिक्षिकाएँ, कॉलेज की प्राचार्य और आवाज़-ए-ख़्वातीन की टीम शामिल थीं। यह आयोजन न केवल गणतंत्र दिवस के अवसर पर देशभक्ति का संदेश देने वाला मंच बना, बल्कि महिलाओं की लोकतांत्रिक अधिकारों, समानता और राष्ट्र निर्माण में भूमिका पर संवाद का अवसर भी प्रदान करता रहा।
आवाज़-ए-ख़्वातीन ने अपनी महिला सशक्तिकरण की दृष्टि के अनुरूप गणतंत्र दिवस भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया, जिसमें छात्राओं ने संवैधानिक अधिकार, सामाजिक न्याय और समावेशी विकास पर अपने विचार प्रस्तुत किए।
यह प्रतियोगिता न केवल सार्वजनिक भाषण कौशल और आलोचनात्मक चिंतन को बढ़ावा देती है, बल्कि युवाओं में नागरिक जागरूकता और नेतृत्व विकास की भावना को भी मजबूत करती है। उत्कृष्ट प्रतिभा को सम्मानित करने के लिए पुरस्कारों की घोषणा की गई-प्रथम पुरस्कार ₹5,000, द्वितीय ₹3,000 और तृतीय ₹2,000—जो युवा महिलाओं में प्रतिभा और नेतृत्व क्षमता को प्रोत्साहित करने का प्रतीक है। इसके साथ ही कॉलेज की प्राचार्य और कार्यक्रम समन्वयकों को भी आवाज़-ए-ख़्वातीन द्वारा सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के दौरान डॉ. परवीन ने कहा कि शिक्षित और जागरूक बेटियाँ सशक्त लोकतंत्र की रीढ़ होती हैं और महिलाओं को उनके अधिकारों की जानकारी देकर उन्हें सशक्त बनाना परिवार और समाज दोनों को मजबूत करता है। कॉलेज की प्राचार्य ने भी एनजीओ के निरंतर प्रयासों की सराहना की और छात्राओं को आत्मविश्वास, नेतृत्व और राष्ट्रीय दायित्व की भावना से जोड़ने के लिए मंच उपलब्ध कराने पर संतोष व्यक्त किया।
मिस युसरा और मिस तूबा ने इस कार्यक्रम को संयोजित और सह-समन्वयित किया। कार्यक्रम का समापन प्रेरणादायक माहौल में हुआ, जहाँ छात्राएँ सक्रिय, जिम्मेदार नागरिक और भावी नेतृत्वकर्ता बनने के लिए उत्साहित दिखाई दीं। यह आयोजन आवाज़-ए-ख़्वातीन की उस दृष्टि का जीवंत उदाहरण रहा कि जागरूक, शिक्षित और सशक्त महिलाएँ ही प्रगतिशील भारत की असली शिल्पकार हैं।