नई दिल्ली
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) की कुलपति संतिश्री ढुलीपूड़ी पंडित ने सोमवार को कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने शैक्षणिक उत्कृष्टता बहाल की है, ऐतिहासिक फैकल्टी भर्ती पूरी की है और समावेशी एवं पारदर्शी पदोन्नतियाँ की हैं। उन्होंने यह भी बताया कि विश्वविद्यालय ने 70 करोड़ रुपये का कोष फंड तैयार किया है।
9वें दीक्षांत समारोह के अवसर पर बोलते हुए कुलपति ने कहा कि 1969 में स्थापना के बाद से जेएनयू ने 14 स्कूल, 9 विशेष केंद्र और विभिन्न कार्यक्रम विकसित किए हैं। वर्तमान में विश्वविद्यालय 80 पीएचडी कार्यक्रम, 49 मास्टर्स, 13 बैचलर, 7 सर्टिफिकेट, 3 डिप्लोमा और 1 पीजी डिप्लोमा संचालित कर रहा है। कुल छात्र संख्या लगभग 9,100 है और इस वर्ष प्रवेश के लिए आवेदन संख्या 3,000 से अधिक रही।
कुलपति ने केंद्र सरकार की विभिन्न नीतियों जैसे CUET, NEP और JRF का धन्यवाद करते हुए कहा कि इसके कारण विश्वविद्यालय में 15 राज्यों के छात्र अध्ययनरत हैं। आरक्षित श्रेणी की सभी सीटें भरी गई हैं और कट-ऑफ सामान्य श्रेणी के बराबर है।
उन्होंने बताया कि जेएनयू देश के शीर्ष विश्वविद्यालयों में से एक है और NAAC के तीसरे चक्र का मूल्यांकन "A++" ग्रेड के साथ पूरा किया। NIRF रैंकिंग में भी सुधार हुआ और यह 10 से बढ़कर 9 हो गया।
कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय केंद्र से पूरी तरह वित्त पोषित है और फीस के लिहाज से सबसे किफायती है। विश्वविद्यालय ने भारतीय ज्ञान प्रणाली (IKS) पर विशेष ध्यान दिया है और इसी विषय पर एक बड़ी सम्मेलन भी आयोजित की गई। इसके अलावा भारतीय भाषाओं पर भी विशेष जोर है।
उन्होंने घोषणा की कि जैन व्यापारियों ने जैन चेयर के लिए 10 करोड़ रुपये दान किए। इतिहास विभाग में ओरल हिस्ट्री सेक्शन की स्थापना भी की गई है।
कुलपति ने बताया कि Indic Knowledge System को पाठ्यक्रमों में शामिल करने से जेएनयू समुद्री और सुरक्षा अध्ययन का केंद्र बन गया है। इसे प्रोजेक्ट त्रिशूल कहा जा रहा है, जिसमें Chatrapati Shivaji Maharaj Centre for Security, Lachit Borphukan Special Centre और Raja Rajendra Chola Centre शामिल हैं।
इसके अलावा, BioNest बायोटेक इनक्यूबेटर भी स्थापित किया गया है, जो जीवन विज्ञान में नवाचार और स्टार्टअप्स को बढ़ावा देगा।
कुलपति ने कहा कि जेएनयू में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है। जब उन्होंने पद संभाला था, तो शीर्ष पदों पर केवल 19% महिलाएँ थीं, जो अब बढ़कर 27% हो गई हैं। उन्होंने जेएनयू के 10 मूल तत्व बताए – लोकतंत्र, विकास, विचार-विमर्श, चर्चा, बहस, विविधता, भिन्नता, असहमति, विकेंद्रीकरण और धर्म।