मौलाना आजाद की पत्रकारिता की विरासत को आगे बढ़ाएं विद्यार्थी: प्रो. सैयद ऐनुल हसन

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 10-10-2026
Students should carry forward Maulana Azad's journalistic legacy: Prof. Syed Ainul Hasan
Students should carry forward Maulana Azad's journalistic legacy: Prof. Syed Ainul Hasan

 

हैदराबाद,

मौलाना आजाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी (मणू) के जनसंचार एवं पत्रकारिता विभाग में रेडियो पॉडकास्ट स्टूडियो और प्रो. सैयद ऐनुल हसन मीडिया आर्काइवल डिस्प्ले यूनिट का उद्घाटन किया गया। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सैयद ऐनुल हसन ने रेडियो पॉडकास्ट स्टूडियो का उद्घाटन किया, जबकि उनके नाम पर स्थापित मीडिया आर्काइवल डिस्प्ले यूनिट का उद्घाटन कुलसचिव प्रो. एसके इश्तियाक अहमद ने किया।

इस अवसर पर कुलपति प्रो. सैयद ऐनुल हसन ने विद्यार्थियों से समाज की जरूरतों को समझने और मीडिया के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मीडिया में काम करने वालों के लिए यह समझना जरूरी है कि वे किससे संवाद कर रहे हैं और उनके दर्शकों, श्रोताओं तथा पाठकों की अपेक्षाएं क्या हैं। लोगों की जरूरतों को समझे बिना अपनी बात प्रभावी ढंग से पहुंचाना मुश्किल है।

मौलाना आजाद की पत्रकारिता से सीख लें विद्यार्थी

कुलपति ने कहा कि मौलाना अबुल कलाम आजाद ने अपने समय में समाज की जरूरतों को समझते हुए अल-हिलाल और अल-बलाग जैसे समाचार पत्रों के माध्यम से लोगों तक अपनी बात पहुंचाई और उनमें जागरूकता पैदा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

उन्होंने कहा कि पत्रकारिता के विद्यार्थियों को मौलाना आजाद की विरासत से प्रेरणा लेते हुए समाज से जुड़े मुद्दों को समझना चाहिए और आम लोगों तक उनकी बात पहुंचाने का प्रयास करना चाहिए।

प्रो. सैयद ऐनुल हसन ने कहा कि पत्रकारिता और जनसंचार में भाषा, लहजे, आवाज और स्क्रीन की गुणवत्ता का विशेष महत्व है। विद्यार्थियों को ऐसी सरल भाषा का इस्तेमाल करना चाहिए, जिसे आम लोग आसानी से समझ सकें। अपनी क्षमताओं का सही उपयोग करके वे मीडिया के क्षेत्र में विशिष्ट पहचान बना सकते हैं।

मीडिया के इतिहास को सुरक्षित रखना जरूरी: कुलसचिव

विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. एसके इश्तियाक अहमद ने मीडिया आर्काइवल डिस्प्ले यूनिट के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जनसंचार माध्यमों के इतिहास और उनमें समय के साथ आए बदलावों को सुरक्षित रखना आज की महत्वपूर्ण जरूरत है।

उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक सामग्री को संरक्षित करने से आने वाली पीढ़ियों को यह समझने में मदद मिलेगी कि विभिन्न दौर में मीडिया ने किस तरह के बदलावों और चुनौतियों का सामना किया।

कुलसचिव ने पत्रकारिता विभाग में नए पाठ्यक्रम शुरू करने और बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिए किए गए प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि फिल्म निर्माण जैसे व्यावहारिक पाठ्यक्रमों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना जरूरी है और इस दिशा में विभाग ने सराहनीय काम किया है।

उन्होंने विभाग को दूसरे प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों के साथ सहयोग बढ़ाने की सलाह भी दी, ताकि विद्यार्थियों को सीखने, प्रशिक्षण प्राप्त करने और आगे बढ़ने के अधिक अवसर मिल सकें।

मणू में शुरू हुआ एमए फिल्म मेकिंग पाठ्यक्रम

जनसंचार एवं पत्रकारिता विभाग के डीन प्रो. एहतिशाम अहमद खान ने बताया कि विभाग में चालू शैक्षणिक सत्र से एमए फिल्म मेकिंग पाठ्यक्रम शुरू किया गया है।

उन्होंने कहा कि इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को फिल्म निर्माण के क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और व्यावहारिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराना है। इसके माध्यम से विद्यार्थी फिल्म निर्माण की तकनीकों को समझ सकेंगे, अपनी रचनात्मक क्षमताओं को निखार सकेंगे और इस क्षेत्र में पेशेवर करियर के लिए खुद को तैयार कर सकेंगे।

उन्होंने उम्मीद जताई कि यह पाठ्यक्रम विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने और फिल्म निर्माण के क्षेत्र में आगे बढ़ने के नए अवसर प्रदान करेगा।

शिक्षक, शोधार्थी और विद्यार्थी रहे मौजूद

कार्यक्रम में एमएमटीटीसी की निदेशक प्रो. सनीम फातिमा, इंस्ट्रक्शनल मीडिया सेंटर (आईएमसी) के निदेशक रिजवान अहमद खान, सामाजिक कार्य विभाग के अध्यक्ष प्रो. एमडी शाहिद रजा सहित पत्रकारिता विभाग के अन्य शिक्षक, शोधार्थी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

रेडियो पॉडकास्ट स्टूडियो और मीडिया आर्काइवल डिस्प्ले यूनिट की शुरुआत को पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए व्यावहारिक प्रशिक्षण तथा मीडिया के इतिहास को संरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।