दिल्ली
जामिया मिल्लिया इस्लामिया (जेएमआई) के अरबी विभाग की विषय समिति ने फैकल्टी ऑफ इंजीनियरिंग के ऑडिटोरियम में साहित्यिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया। इसमें विद्यार्थियों ने विभिन्न साहित्यिक और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। इस अवसर पर विद्यार्थियों की त्रैमासिक दीवार पत्रिका का भी विमोचन किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता अरबी विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर फौजान अहमद ने की, जबकि सीरिया में भारत के पूर्व राजदूत और इंडियन काउंसिल ऑफ वर्ल्ड अफेयर्स के निदेशक डॉ. इरशाद अहमद मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
कार्यक्रम की शुरुआत पवित्र कुरान की तिलावत से हुई। इसके बाद नात और जामिया तराना प्रस्तुत किया गया। स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में हाल ही में दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों ने अपना परिचय दिया। कुछ विद्यार्थियों ने गजलें भी सुनाईं।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण अरबी नाटक ‘महजला अल-शरफ’ (सम्मान का प्रहसन) रहा। नाटक की कहानी एक ऐसे न्यायाधीश के इर्द-गिर्द घूमती है, जो मामलों पर गंभीरता से विचार किए बिना जल्दबाजी में फैसले सुना देता है। उसके इस रवैये के कारण कई लोगों को नुकसान उठाना पड़ता है।
नाटक में परलोक की पृष्ठभूमि में प्रस्तुत दृश्य के माध्यम से न्याय, जवाबदेही और मानवाधिकारों के महत्व को प्रभावशाली ढंग से उजागर किया गया। विद्यार्थियों की इस प्रस्तुति ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. इरशाद अहमद ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया में बिताए अपने दिनों की यादें साझा कीं। उन्होंने बताया कि जामिया अल-फलाह से आलिमियत का पाठ्यक्रम पूरा करने के बाद उन्होंने जामिया में दाखिला लिया था। यहां उन्होंने प्रोफेसर जियाउल हसन नदवी के मार्गदर्शन में अपना शोध प्रबंध पूरा किया।
उन्होंने कहा कि उनके समय में परिसर में आज की तुलना में न तो इतनी इमारतें थीं और न ही इतनी हरियाली, लेकिन उस दौर में भी शैक्षणिक गतिविधियों और शोध का माहौल काफी सक्रिय था। उन्होंने कहा कि आज जामिया न केवल जीवंत शैक्षणिक परिसर है, बल्कि शिक्षा और शोध के क्षेत्र में भी समृद्ध है।
डॉ. इरशाद अहमद ने विश्वविद्यालय से जुड़ी अपनी यादें और अनुभव साझा करते हुए बताया कि इन अनुभवों ने जीवन के विभिन्न पड़ावों पर उनकी सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
अरबी विभाग के अध्यक्ष प्रोफेसर फौजान अहमद ने डॉ. इरशाद अहमद का निमंत्रण स्वीकार करने के लिए आभार व्यक्त किया। नए विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए उन्होंने अरबी विभाग में उनके दाखिले को महत्वपूर्ण बताया।
उन्होंने विद्यार्थियों को समय का महत्व समझने और उसका सदुपयोग करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि जामिया केवल शिक्षा हासिल करने का संस्थान नहीं है, बल्कि यहां समृद्ध शैक्षणिक और सांस्कृतिक वातावरण भी उपलब्ध है।
प्रोफेसर अहमद ने विद्यार्थियों से इस माहौल का भरपूर लाभ उठाने, अपनी प्रतिभा निखारने के लिए सांस्कृतिक गतिविधियों में भाग लेने और दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम का आयोजन अरबी विभागाध्यक्ष प्रोफेसर फौजान अहमद और विषय समिति के सलाहकार डॉ. महफूजुर रहमान के मार्गदर्शन में किया गया।आयोजन को सफल बनाने में समिति के उपाध्यक्ष इश्तियाक अहमद, महासचिव मोहम्मद आरिज, संयुक्त सचिव शम्सुल कमर और उनकी टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कार्यक्रम में अरबी विभाग के शिक्षक और विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। उन्होंने विद्यार्थियों की शैक्षणिक, साहित्यिक और रचनात्मक प्रतिभा की सराहना की।