जामिया में हाफ़िज़ शिराज़ी की याद में स्मृति समारोह

Story by  एटीवी | Published by  [email protected] | Date 13-10-2026
Commemorative event in memory of Hafiz Shirazi at Jamia
Commemorative event in memory of Hafiz Shirazi at Jamia

 

नई दिल्ली

जामिया मिल्लिया इस्लामिया के फ़ारसी विभाग ने सोमवार को विश्वविद्यालय के ईरानोलॉजी हॉल में मशहूर फ़ारसी कवि हाफ़िज़ शिराज़ी की याद में स्मृति समारोह आयोजित किया। नई दिल्ली स्थित इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान के कल्चर हाउस के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में शिक्षाविदों, विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों, शोधार्थियों, शिक्षकों और छात्रों ने हिस्सा लिया।

समारोह में हाफ़िज़ शिराज़ी की कालजयी शायरी, फ़ारसी साहित्य में उनके योगदान और फ़ारसी भाषी दुनिया की समृद्ध साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं बौद्धिक परंपराओं में उनके स्थान पर चर्चा की गई। वक्ताओं ने उनकी रचनाओं की आज के दौर में भी प्रासंगिकता को रेखांकित किया।

कुरान पाठ से हुई कार्यक्रम की शुरुआत

कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. यासिर अब्बास द्वारा पवित्र कुरान के पाठ से हुई। इसके बाद फ़ारसी विभाग के एमए तृतीय सेमेस्टर के छात्र शम्स ताबिश ने नात शरीफ़ प्रस्तुत की। इन प्रस्तुतियों ने समारोह के लिए गरिमापूर्ण वातावरण तैयार किया।

फ़ारसी विभाग के अध्यक्ष प्रो. मोहसिन अली ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने अतिथियों, शिक्षकों, विद्वानों और छात्रों का स्वागत करते हुए हाफ़िज़ शिराज़ी की साहित्यिक विरासत की निरंतर प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि फ़ारसी साहित्य सांस्कृतिक समझ, बौद्धिक जिज्ञासा और मानवीय मूल्यों को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

हाफ़िज़ की शायरी में प्रेम और मानवता के प्रतीक

जामिया के फ़ारसी विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. अब्दुल हलीम ने हाफ़िज़ की ग़ज़लों के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने उनकी शायरी में साकी और शराब जैसे प्रतीकों के माध्यम से प्रेम, नशे और मानवता की अभिव्यक्ति को समझाया।

जामिया के मानविकी एवं भाषा संकाय के डीन प्रो. इक़्तिदार मोहम्मद ख़ान ने विशिष्ट अतिथि के रूप में अपने विचार रखे। उन्होंने इस्लामी अध्ययन के क्षेत्र में फ़ारसी विद्वानों के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि ईरान के विद्वानों ने धर्म और साहित्य के विकास में महत्वपूर्ण सेवाएं दी हैं।

हाफ़िज़ के अध्ययन से हासिल की जा सकती हैं बड़ी उपलब्धियां: डॉ. फ़रीदुद्दीन फ़रीद अस्र

समारोह के मुख्य अतिथि और नई दिल्ली स्थित ईरान के कल्चर हाउस के सांस्कृतिक सलाहकार डॉ. फ़रीदुद्दीन फ़रीद अस्र ने भारत और ईरान के ऐतिहासिक साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संबंधों पर प्रकाश डाला।

उन्होंने भारतीय उपमहाद्वीप में फ़ारसी भाषा की ऐतिहासिक भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि इस भाषा ने साहित्य, विद्वता और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को समृद्ध किया है।

डॉ. फ़रीदुद्दीन फ़रीद अस्र ने फ़ारसी भाषा के विद्वानों और छात्रों को हाफ़िज़ शिराज़ी की रचनाओं का गंभीरता से अध्ययन करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि जीवन में बड़ी उपलब्धियां हासिल करने की आकांक्षा रखने वालों के लिए हाफ़िज़ का अध्ययन उपयोगी साबित हो सकता है।

कुलपति ने समझाया फ़ारसी ग़ज़लों का विकासक्रम

जामिया मिल्लिया इस्लामिया के कुलपति प्रो. मज़हर आसिफ़ ने समारोह की अध्यक्षता की। अपने अध्यक्षीय संबोधन में उन्होंने साहित्यिक विरासत के संरक्षण, अकादमिक संवाद और फ़ारसी साहित्य में निहित मानवीय मूल्यों के महत्व पर जोर दिया।

उन्होंने फ़ारसी ग़ज़लों के विकासक्रम को सरल और सहज तरीके से समझाया। उनके विद्वतापूर्ण संबोधन ने उपस्थित लोगों को प्रभावित किया। कुलपति की भागीदारी ने समारोह की गरिमा को और बढ़ाया।

छात्रों ने ग़ज़ल गायन से बांधा समां

समारोह के समापन सत्र में फ़ारसी विभाग के छात्रों ने हाफ़िज़ शिराज़ी की रचनाओं पर आधारित ग़ज़ल गायन और भाषण प्रस्तुत किए।छात्राओं नरगिस ज़ेहरा और हीरा ज़ेबा तथा छात्र फ़ैज़ान अशरफ़ ने हाफ़िज़ की ग़ज़लों की भावपूर्ण प्रस्तुतियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इन प्रस्तुतियों के जरिए कवि की साहित्यिक संवेदना और काव्यात्मक सौंदर्य को सामने रखा गया।

कार्यक्रम का संचालन फ़ारसी विभाग के शिक्षक और विषय संघ के सलाहकार डॉ. मोहम्मद अरशदुल क़ादरी ने किया। अंत में विभाग के शिक्षक प्रो. सैयद कलीम असग़र ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।

समारोह ने हाफ़िज़ शिराज़ी की साहित्यिक विरासत को याद करने के साथ-साथ भारत और ईरान के बीच सदियों पुराने भाषाई, साहित्यिक और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने में फ़ारसी साहित्य की भूमिका को भी रेखांकित किया।