शहजादा इदरीस बदरुद्दीन के निधन पर एएमयू की कुलपति ने जताया शोक

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 22-10-2026
AMU Vice-Chancellor expresses grief over the passing of Shahzada Idris Badruddin
AMU Vice-Chancellor expresses grief over the passing of Shahzada Idris Badruddin

 

अलीगढ़।

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) ने दाऊदी बोहरा समुदाय के वरिष्ठ सदस्य शहजादा इदरीस बदरुद्दीन के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उनका निधन 20 अक्टूबर को मुंबई में 73 वर्ष की आयु में हुआ। वह दाऊदी बोहरा समुदाय के 53वें अल-दाई अल-मुतलक और एएमयू के पूर्व कुलाधिपति हिज होलीनेस सैयदना मुफद्दल सैफुद्दीन के छोटे भाई थे।

एएमयू की कुलपति प्रोफेसर नईमा खातून ने शहजादा इदरीस बदरुद्दीन के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि उनके जाने से शिक्षा जगत ने एक ऐसे समर्पित व्यक्तित्व को खो दिया है, जिन्होंने खामोशी और निरंतरता के साथ शिक्षा के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

उन्होंने कहा, “शहजादा इदरीस बदरुद्दीन के निधन से शिक्षा जगत ने एक ऐसे कर्मठ निर्माता को खो दिया है, जिन्होंने करीब पांच दशकों तक शिक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित किया। उन्होंने विभिन्न देशों में स्कूलों के विकास, पाठ्यक्रमों को मजबूत करने और शिक्षकों को सशक्त बनाने में अहम भूमिका निभाई। उनकी विरासत उन अनगिनत युवाओं के जीवन में जीवित रहेगी, जिन्हें उन्होंने बेहतर भविष्य की दिशा दिखाई।”

शिक्षा के विकास में पांच दशक का योगदान

वर्ष 1952 में जन्मे शहजादा इदरीस बदरुद्दीन दिवंगत हिज होलीनेस सैयदना मोहम्मद बुरहानुद्दीन के पांचवें पुत्र थे। सैयदना मोहम्मद बुरहानुद्दीन दाऊदी बोहरा समुदाय के 52वें धर्मगुरु थे।

शहजादा इदरीस ने करीब पांच दशकों तक सामुदायिक सेवा के क्षेत्र में योगदान दिया। उनकी प्राथमिकताओं में शिक्षा का विकास प्रमुख रहा। उनके मार्गदर्शन में समुदाय के वैश्विक स्कूल नेटवर्क का विस्तार हुआ और विभिन्न देशों में हजारों विद्यार्थियों तक शिक्षा की पहुंच बनी।

उन्होंने शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर बनाने, आधुनिक शिक्षण पद्धतियों को बढ़ावा देने, पाठ्यक्रमों को मजबूत करने और शिक्षकों के पेशेवर विकास पर विशेष ध्यान दिया। शिक्षा को समाज की प्रगति का महत्वपूर्ण माध्यम मानते हुए उन्होंने संस्थागत स्तर पर शैक्षणिक सुधारों को प्रोत्साहित किया।

शहजादा इदरीस ने ब्रिटेन, आयरलैंड, स्वीडन और नॉर्वे में हिज होलीनेस के विशेष प्रतिनिधि के रूप में भी सेवाएं दीं। इसके अलावा, वह दुबई स्थित सुल्तान अल-बोहरा फाउंडेशन की परिषद के सदस्य भी रहे। इन जिम्मेदारियों के माध्यम से उन्होंने भारत से बाहर भी शांति, सद्भावना और समाजसेवा का संदेश पहुंचाया।

एएमयू परिवार ने जताई संवेदना

कुलपति प्रो. नईमा खातून ने कहा कि एएमयू का हिज होलीनेस सैयदना मुफद्दल सैफुद्दीन के साथ गहरा और पुराना संबंध रहा है। विश्वविद्यालय ने उनके दो कार्यकालों के दौरान कुलाधिपति के रूप में उनके स्नेह, सहयोग और उदारता को हमेशा सराहा है।

उन्होंने कहा, “इस दुख की घड़ी में एएमयू का पूरा परिवार हिज होलीनेस के साथ खड़ा है, जिन्होंने अपने प्रिय छोटे भाई को खोया है। हम शोकसंतप्त परिवार के प्रति भी अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं। हमारी प्रार्थना है कि परमात्मा उन्हें इस अपूरणीय क्षति को सहन करने की शक्ति और धैर्य प्रदान करे तथा दिवंगत आत्मा को अपनी असीम कृपा से नवाजे।”

विश्वविद्यालय के प्रो-वाइस चांसलर प्रोफेसर मोहम्मद मोहसिन खान ने कहा कि शिक्षा के प्रति शहजादा इदरीस का आजीवन समर्पण अनगिनत युवाओं को आगे भी प्रेरित करता रहेगा।

वहीं, रजिस्ट्रार प्रोफेसर आसिम जफर ने उनके निधन को दाऊदी बोहरा समुदाय के साथ-साथ शिक्षा और सेवा को महत्व देने वाले सभी लोगों के लिए बड़ी क्षति बताया।

प्रो-वाइस चांसलर और रजिस्ट्रार दोनों ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।