श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, चंद्रयान-3 और जी20 का तिगुना उमंगोल्लास

Story by  राकेश चौरासिया | Published by  [email protected] | Date 06-09-2023
ट्रिपल धमाकाः श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, चंद्रयान-3 और जी20 का तिगुना उमंगोल्लास
ट्रिपल धमाकाः श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, चंद्रयान-3 और जी20 का तिगुना उमंगोल्लास

 

राकेश चौरासिया / नई दिल्ली

इस बार की श्रीकृष्ण जन्माष्टी पर नक्षत्र संयोग और प्रत्यक्ष संयोग देवयोगवश इतने प्रत्यक्षित हो रहे हैं कि यह पर्व इस बार अविष्मरणीय बनेगा. पूरे भारत में जन्माष्टमी पर्व 6 सितंबर से शुरू होकर सात सितंबर तक मनाया जा रहा है. लोगों का उल्लास जन्माष्टमी के लिए सातवें आसमान पर है, क्योंकि चंद्रयान-3 और जी-20 की सफलता ने इस त्योहार के हर्ष, उमंग और उल्लास को कई गुना बढ़ा दिया है.

प्रभु श्रीकृष्ण, श्री हरि विष्णु के अष्टम अवतारी हैं. नंदलाल कहाने वाले श्रीकृष्ण चंद्रवशी हैं. जन्माष्टमी पर देश के कई देवालयों में यह चर्चा आम है कि चंद्रवशी श्रीकृष्ण की कृपा से चंद्रयान-3 अभियान पूर्ण सफल रहा. इसलिए कई मंदिरों में जन्माष्टमी की थीम चंद्रयान-3 के हस्ताक्षर विक्रम लैंडर और विक्रम रोवर की प्रतिकृतियां निर्मित की हैं, जो श्रीकृष्ण की लीला झांकियों के मध्य विशेष आकर्षण हैं.

दिल्ली के मंदिर मार्ग स्थित श्री बिड़ला मंदिर में जन्माष्टमी पर चंद्रयान-3 से लेकर जी20 पर आधारित झांकियां भी दिख रही हैं. मंगला आरती के बाद गीता भवन में भरतनाट्यम, रास लीला, ओडिसी नृत्य आदि के कार्यक्रम होंगे. मथुरा और वृंदावन के मंदिरों में इसरो को बधाई देते हुए चंद्रयान-3 से संबंधित झांकिया बनाई गई हैं.

भाद्रपद कृष्ण पक्ष अष्टमी और रोहिणी नक्षत्र का संगम भी हो रहा है, जो दुर्लम होता है और इस ग्रहदश में श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था. भाद्रपद कृष्ण पक्ष अष्टमी तद्नुसार बुधवार को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाएगी. वैष्णव संप्रदाय के उदय व्यापिनी रोहिणी मतावलंबी वैष्णवजन सात सितंबर को व्रत-पर्व मनाएंगे. श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर जयंती योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है.

बीएचयू ज्योतिष विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. विनय पांडेय के अनुसार भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी बुधवार शाम 7.58 बजे लग रही, जो गुरुवार शाम 7.52 बजे तक रहेगी. रोहिणी नक्षत्र का आरंभ बुधवार दोपहर 2.39 बजे हो रहा, जो गुरुवार दोपहर 3.07 बजे तक रहेगी.


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उत्तर प्रदेश के वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर और मथुरा की श्री कृष्ण जन्मभूमि और श्री रंगनाथ जी मंदिर, मप्र के मंदसौर के सांवलिया सेठ, गुजरात में द्वारिका पुरी और राजस्थान में नाथद्वारा मंदिर को आकर्षक ढंग से सजाया गया है. 

तमिलनाडु और केरल में इसे ‘गोकुलाष्टमी’ के रूप में मनाया जा रहा है. श्रद्धालु ‘सीदाई’ और ‘मुरुक्कू’ मिष्ठानों से बाल गोपाल का भोग लगा रहे हैं. यहां खास प्रकार का नमकीन भी मेहमानों के लिए तैयार किया जाता है. महिलाएं अपने पूजा कक्ष की विशेष रूप से सज्जा करती हैं और चावल के आटे से बाल गोपाल के छोटे-छोटे पैरों के निशान भी बनाती हैं, जो भगवान के घर में आने का प्रतीक माने जाते हैं.

गुजरात में जन्माष्टमी पर मंदिरों में जन्मोत्सव के साथ ‘रास लीला’ आयोजन की परंपरा है. जिसमें भगवान कृष्ण और गोपियों का संवाद और नृत्य होता है. गृहणियों ने घरों को रंगोलियों से सजाया है.


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महाराष्ट्र में जन्माष्टमी धूमधाम से मनाई जा रही है. यहां की गोबिंदा और गोपालों की ‘दही हांडी’ परंपरा अब विश्व भर में ख्याति अर्जित कर चुकी है, जिसे लोग दुनिया भर से देखने जमा होते हैं. गोविंदा बने युवकों के समूह बहुत ऊंचाई पर लटकी हांडी को तोड़ने और उसका दही-मक्खन लूटने के लिए मानव पिरामिड बनाते हैं. 

पश्चिम बंगाल में जन्माष्टमी ‘नंदा उत्सव’ के स्वरूप में मनाई जा रही है. यहां देश के अन्य भागों की भांति दिन भर उपवास रखने और श्री कृष्ण जन्मोत्सव होने पर उपवास की पारणा करने की परंपरा है. यहां भी श्रीकृष्ण बाल रूप को झूला झुलाने के लिए लंबी लाइने लगती हैं.


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