राकेश चौरासिया / नई दिल्ली
आसुरी शक्तियों के प्रतीक दशानन का वध करने के बाद जब राजा राम सरकार अयोध्या वापस लौटे, तो अयोध्यावासियों ने इस हर्ष में रात को अपने घरों, प्रतिष्ठानों, गलियों-चौराहों और सार्वजनिक स्थलों पर दीपमालिकाएं सजाकर पूरे नगर को रौशन कर दिया. इस पौराणिकता के आधार पर ही दिवाली का त्योहार शुरू हुआ माना जाता है.
चार नवंबर, 2021, गुरुवार दिवस को शुभ दीपावली का त्योहार भारत के अतिरिक्त पाकिस्तान, अफगानिस्तान, नेपाल, भूटान, तिब्बत, जापान, बांग्लादेश, म्यांमार, थाईलैंड, मलेशिया, इंडानेशिया, फिलीपींस, श्रीलंका, मारीशस और वियतनाम में पारंपरिक रूप से मनाई जाती है. इसके अलावा भारतीय प्रवासियों का पश्चिमी देशों में सम्मान बढ़ा है, तो यूरोप में भी कई स्थानों पर दीवाली उत्सव आयोजित होने लगे हैं. अमेरिका में दिवाली पर सार्वजनिक अवकाश घोषित किए जाने के लिए एक बिल भी पेश होने वाला है.
नेपाल में गाय की पूजा के साथ दीवाली उत्सव शुरू होता है. देवी-देवताओं के अतिरिक्त कुत्तों की भी पूजा की जाती है.
जापान में बगीचों में लालटेन और कंदीलें लटकाकर दिवाली मनाते हैं.
इंडोनेशिया में दिवाली पर देवताओं की आराधना के साथ रामलीला का भी आयोजन किया जाता है.
मारीशस में 80प्रतिशत हिंदू हैं. इसी दिन प्रभ श्रीकृष्ण ने नरकासुर का वध किया था. इस हेतु मारीशसवासी दिवाली मनाते हैं.
मलेशिया में इस त्योहार को ‘हरि दिवाली’ कहा जाता है. यहां लोग दक्षिण भारतीय शैली में जल और तेल से स्नान करके देवताओं की वंदना करते हैं.
श्रीलंका में चीनी मिट्टी के दिए जलाए जाते हैं.
भारत में दिवाली की वृहद व समृद्ध परंपरा है. यहां कई दिनों पहले से लोग घर और प्रतिष्ठानों की साफ-सफाई और रंग-रोगन शुरू कर देते हैं. दिवाली पर गौरी पुत्र गणेश और श्री लक्ष्मी जी के पूजन का विधान है और लक्ष्मी जी स्वच्छता में ही वास करती हैं. इसलिए घरों की साफ-सफाई होती है. घरों में मिष्ठान और अन्यान्य पकवान बनाए जाते हैं.
शाम को गृहस्थजन श्री गणेश और श्री लक्ष्मी जी का पूजन करते हैं. वेदी सजा कर श्री गणेश और श्री लक्ष्मी जी नई मूर्तियों की स्थापना की जाती है. श्री राम दरबार सजाया जाता है. फिर उन्हें दूर्वा, चंदन, हल्दी, रोली का तिलक किया जाता है. होम-हवन से माता का आह्वान होता है. फिर उन्हें मिष्ठानों और पकवानों का भोग लगाया जाता है. इसके बाद श्रीगणेश जी, श्री लक्ष्मी जी और श्री विष्णु या उनके अवतारों की आरती की जाती है.
दिवाली पर विशेष रूप से सूरन यानि जिमीकंद की सब्जी खाने का विधान है. समझा जाता है कि श्री राम, श्री लक्ष्मण और श्री सीता जिमीकंद खाकर उदरपूर्ति किया करते थे. उन्हीं स्मृतियों के कारण जिमीकंद की सब्जी बनती है.
इसके बाद मंदिरों, पूजास्थलों, चौराहों, कचराघर, में दीप प्रज्ज्वलित किए जाते हैं. घरों और प्रतिष्ठानों को दियों से आलोकित किया जाता है. मान्यता है कि अमावस की काली रात में आपके आस-पास कोई भी ऐसा स्थान न रहे, जिसे दिए से रोशन न किया जाए.
इसके बाद मोहल्ले और व्यवहारियों के यहां प्रसाद और उपहार दिए जाने की परंपरा है.
दीवाली, 2021 पूजन का मुहूर्त:
दिल्ली के समयानुसार इस बार दिवाली पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 06बजकर 10मिनट से लेकर 08 बजकर 06 मिनट तक रहेगा. यह स्थिर लग्न वृषभ काल होगा.
अन्य शहरों में पूजन मुहूर्तः
दिल्ली 06.10पीएम से 08.04पीएम
नोएडा 06.08पीएम से 08.04पीएम
पुणे 06.39पीएम से 08.32पीएम
जयपुर 06.17पीएम से 08.14पीएम
चेन्नई 06.21पीएम से 08.10पीएम
गुरुग्राम 06.10पीएम से 08.05पीएम
हैदराबाद 06.22पीएम से 08.14पीएम
चण्डीगढ़ 06. 07पीएम से 08.01पीएम
मुम्बई 06.42पीएम से 08.35पीएम
कोलकाता 05.34पीएम से 07.31पीएम
बेंगलूरु 06.32पीएम से 08.21पीएम
अहमदाबाद 06.37पीएमसे 08.33पीएम