शेयर बाजार में दो दिनों से जारी तेजी पर लगा विराम, सेंसेक्स 480 अंक टूटा

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 26-05-2026
The two-day rally in the stock market came to a halt, with the Sensex falling 480 points.
The two-day rally in the stock market came to a halt, with the Sensex falling 480 points.

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली 

 
उतार-चढ़ाव भरे कारोबार में स्थानीय शेयर बाजारों में मंगलवार को गिरावट रही और बीएसई सेंसेक्स 479 अंक टूट गया जबकि एनएसई निफ्टी में 118 अंक की गिरावट आई। ईरान के दक्षिणी भाग में अमेरिकी हमले की रिपोर्ट के बाद कच्चे तेल के दाम में आई तेजी के बीच बाजार में गिरावट आई।

बीएसई का 30 शेयरों पर आधारित मानक सूचकांक सेंसेक्स 479.26 अंक यानी 0.63 प्रतिशत टूटकर 76,009.70 पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान एक समय इसमें 579.28 अंक यानी 0.75 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 75,909.68 पर पहुंच गया था।
 
इसी तरह, एनएसई का 50 शेयरों वाला मानक सूचकांक निफ्टी 118 अंक यानी 0.49 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,913.70 पर बंद हुआ।
 
सेंसेक्स में शामिल शेयरों में भारती एयरटेल, ट्रेंट, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, बजाज फाइनेंस, टाइटन और एचडीएफसी बैंक में प्रमुख रूप से गिरावट रही।
 
दूसरी तरफ, लाभ में रहने वाले शेयरों में टेक महिंद्रा, इटर्नल, मारुति और अदाणी पोर्ट्स शामिल हैं।
 
वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 2.93 प्रतिशत चढ़कर 98.96 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
 
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को कहा कि ईरान के साथ युद्ध समाप्त करने के लिए बातचीत ‘अच्छी तरह’ आगे बढ़ रही है, लेकिन अधिकारियों ने बताया कि तेहरान द्वारा अपने सर्वोच्च नेता से परामर्श करने के लिए उपयोग किए जाने वाले जटिल संचार नेटवर्क के कारण अंतिम निर्णय में कुछ समय लग सकता है।
 
लाइवलॉन्ग वेल्थ के शोध विश्लेषक और संस्थापक हरिप्रसाद के. ने कहा, ‘‘कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और अनुकूल वैश्विक संकेतों के बीच बाजार में शुरू में स्थिरता देखी गई। हालांकि, ईरान पर अमेरिकी हमलों की खबरों के बाद बाजार का माहौल तेजी से बिगड़ गया। इससे पश्चिम एशिया में निकट भविष्य में तनाव कम होने की उम्मीदें कम हुई हैं। पश्चिम एशिया में माहौल अचानक बदलने से वैश्विक बाजारों में जोखिम से बचने की आक्रामक रणनीति को बढ़ावा मिला और ऊर्जा आपूर्ति फिर से बाधित होने की आशंका बढ़ गई।’’
 
उन्होंने कहा कि ब्रेंट क्रूड की कीमतों में तेज उछाल एक बार फिर भारतीय शेयर बाजारों के लिए एक प्रमुख दबाव बिंदु बन गया है।
 
हरिप्रसाद ने कहा, ‘‘भारत जैसी तेल आयात पर निर्भर अर्थव्यवस्था के लिए, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें आयातित मुद्रास्फीति, मुद्रा दबाव और बढ़ते राजकोषीय तनाव को लेकर चिंताओं को तुरंत बढ़ा देती हैं।’’