तेल की तेजी के बीच सेंसेक्स-निफ्टी की मजबूत शुरुआत

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  onikamaheshwari | Date 30-10-2026
Sensex, Nifty open marginally higher amid rising crude prices, weak global cues
Sensex, Nifty open marginally higher amid rising crude prices, weak global cues

 

मुंबई (महाराष्ट्र)
 
ब्रेंट क्रूड ऑयल की ऊंची कीमतों, नए सिरे से भू-राजनीतिक तनाव और कमजोर वैश्विक संकेतों के बीच, शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार लगभग सपाट स्तर पर खुले। दोनों सूचकांक गैप-अप के साथ खुले। सेंसेक्स 74,199.69 पर खुला और पिछले बंद स्तर 74,151.04 के मुकाबले 85.26 अंक या 0.11 प्रतिशत की बढ़त के साथ लगभग 74,236.30 पर कारोबार कर रहा था। इसी तरह, निफ्टी 22,964.50 पर खुला और पिछले बंद स्तर 22,936.75 के मुकाबले 19.25 अंक या 0.08 प्रतिशत की बढ़त के साथ लगभग 22,956.00 पर कारोबार कर रहा था।
 
बाजार के सभी प्रमुख सूचकांक लाल निशान में रहे; अधिकांश सेक्टोरल सूचकांकों में भी गिरावट देखी गई। हालांकि, IT और मिड-स्मॉल IT तथा टेलीकॉम सेक्टर हरे निशान में रहे और शुरुआती कारोबार में सबसे ज्यादा बढ़त दर्ज करने वाले सेक्टर बने। दूसरी ओर, निफ्टी सीमेंट सबसे ज्यादा गिरावट वाला सेक्टर रहा, जिसमें एक प्रतिशत से अधिक की कमी आई। BSE पर, ट्रेंट, सन फार्मा, इंफोसिस, इंडिगो, TCS, टेक महिंद्रा, NTPC, पावर ग्रिड, एटरनल, HCL टेक, कोटक बैंक, ITC और अडानी पोर्ट्स जैसे शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी रही। वहीं, BEL, टाटा स्टील, बजाज फाइनेंस, टाइटन, रिलायंस, हिंदुस्तान यूनिलीवर, L&T, एक्सिस बैंक, HDFC बैंक और M&M जैसे शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट देखी गई।
 
इसी तरह, NSE पर ट्रेंट, सन फार्मा, इंफोसिस, TCS, टेक महिंद्रा, इंडिगो, एटरनल, पावर ग्रिड, सिप्ला, मैक्स हेल्थ, मारुति, ICICI बैंक, भारती एयरटेल और ONGC जैसे शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी रही। दूसरी ओर, कोल इंडिया, नेस्ले, BEL, एशियन पेंट्स, टाइटन, अडानी पोर्ट्स, SBI, BSE, बजाज फिनसर्व, JSW स्टील, रिलायंस, TMPV और ITC जैसे शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई। कमोडिटी मार्केट में, इस रिपोर्ट के समय ब्रेंट क्रूड लगभग 112.13 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा था, जबकि क्रूड ऑयल लगभग 103.15 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था।
 
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट, वी.के. विजयकुमार ने कहा, "ब्रेंट क्रूड के 117 डॉलर के पार जाने से क्रूड ऑयल से जुड़ी चुनौतियां और बढ़ रही हैं। ऐसी खबरें हैं कि 3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनावों (मिड-टर्म इलेक्शन) के बाद अमेरिका, ईरान के खिलाफ फिर से हमले शुरू कर सकता है। हालांकि हाल के दिनों में FII की बिकवाली कम हुई है और कभी-कभी खरीदारी भी देखने को मिली है, लेकिन बाजार की मौजूदा स्थिति किसी बड़ी तेजी (रैली) के लिए अनुकूल नहीं लग रही है।"
 
उन्होंने कहा, "एक दिलचस्प ट्रेंड यह है कि पिछले हफ्ते की भारी बिकवाली के बाद स्मॉल-कैप सेगमेंट में तेजी देखने को मिल रही है। चूंकि यह बिकवाली मार्जिन-फंडेड लॉन्ग पोजीशन की जबरन लिक्विडेशन (forced liquidation) के कारण हुई थी, इसलिए DII और निवेशक इस मौके का फायदा उठाकर इस सेगमेंट में 'ग्रोथ स्टॉक्स' खरीद रहे हैं, भले ही उनका वैल्यूएशन काफी ऊंचा क्यों न हो। मिड-कैप और स्मॉल-कैप फंडों में लगातार आ रहे निवेश (कैपिटल फ्लो) से इन शेयरों को खरीदने में मदद मिल रही है। हालांकि, निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि 'वैल्यू बाइंग' (सस्ते और अच्छे शेयर खरीदने) के मौके लार्ज-कैप शेयरों में हैं, जो FII की बिकवाली के कारण फिलहाल निवेशकों की पसंद से दूर हैं।"
 
मार्केट एनालिस्ट विपिन डिक्सना ने कहा, "गुरुवार को आई जोरदार रिकवरी के बाद, भारतीय बाजार अब एक अहम दौर में प्रवेश कर रहा है, जहां इन बढ़त को बनाए रखना बहुत जरूरी होगा।" उन्होंने आगे कहा कि भू-राजनीतिक तनाव (geopolitical tensions) के फिर से बढ़ने और सऊदी अरब के तेल बुनियादी ढांचे में संभावित रुकावटों की चिंताओं के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं। इससे भारत का आयात बिल बढ़ सकता है और महंगाई को बढ़ावा मिल सकता है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि एशियाई इक्विटी बाजारों और वॉल स्ट्रीट के टेक्नोलॉजी शेयरों में कमजोरी, भारतीय शेयर बाजारों की बढ़त को सीमित कर सकती है।
 
उन्होंने कहा, "निफ्टी के लिए तुरंत रेजिस्टेंस (बाधा) का स्तर 23,000–23,100 के आसपास है, जबकि 22,850–22,800 का स्तर एक महत्वपूर्ण सपोर्ट जोन बना हुआ है। अगर निफ्टी 23,000 के ऊपर लगातार बना रहता है, तो रिकवरी और मजबूत हो सकती है; वहीं, अगर यह सपोर्ट स्तर के नीचे जाता है, तो बाजार में फिर से बिकवाली का दबाव आ सकता है।"