महंगे कच्चे तेल और Fed के दरें स्थिर रखने के बीच सेंसेक्स 150 अंक चढ़ा, निफ्टी 22,730 के पार

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  onikamaheshwari | Date 29-10-2026
Sensex gains over 150 points, Nifty above 22,730 amid elevated crude oil prices and Fed keeping rates unchanged
Sensex gains over 150 points, Nifty above 22,730 amid elevated crude oil prices and Fed keeping rates unchanged

 

मुंबई (महाराष्ट्र)
 
कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति को लेकर बनी अनिश्चितताओं के बीच, गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक सपाट स्तर पर खुले। हालांकि, शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही मामूली बढ़त के साथ कारोबार करते दिखे। सेंसेक्स 150 अंकों से ज्यादा ऊपर चढ़ा, जबकि निफ्टी 22,730 के स्तर के ऊपर बना रहा। सेंसेक्स 73,268.47 पर खुला और खबर लिखे जाने के समय 159.21 अंक (0.22%) की बढ़त के साथ 73,405.24 के आसपास कारोबार कर रहा था (पिछली क्लोजिंग 73,246.03 थी)। इसी तरह, निफ्टी 22,690.65 पर खुला और 45.90 अंक (0.20%) की बढ़त के साथ 22,745.05 के आसपास कारोबार कर रहा था (पिछली क्लोजिंग 22,698.85 थी)।
 
सेक्टर के हिसाब से बाजार में मिला-जुला रुझान देखने को मिला। ऑटो, IT, मेटल, फार्मा, हेल्थकेयर और टेलीकॉम सूचकांक हरे निशान में रहे, जबकि FMCG, सीमेंट, ऑयल एंड गैस, रियल्टी, बैंकिंग, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और फाइनेंशियल सर्विसेज सूचकांक दबाव में रहे। NSE पर, अडानी पोर्ट्स, BSE, पावर ग्रिड, TCS, टाइटन, कोल इंडिया, रिलायंस, HCL टेक, मैक्स हेल्थ, इंफोसिस, कोटक बैंक, NTPC, भारती एयरटेल और BEL जैसे शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी रही। वहीं, ट्रेंट, हिंडाल्को, मारुति, नेस्ले, L&T, बजाज फाइनेंस, HDFC बैंक, ICICI बैंक और ONGC जैसे शेयरों में गिरावट देखी गई।
 
BSE पर, अडानी पोर्ट्स, पावर ग्रिड, NTPC, TCS, रिलायंस, टाइटन, कोटक बैंक, HCL टेक और इंफोसिस जैसे शेयरों में सबसे ज्यादा तेजी रही। दूसरी ओर, ट्रेंट, बजाज फिनसर्व, मारुति, L&T, बजाज फाइनेंस, टाटा स्टील और HDFC बैंक जैसे शेयरों में गिरावट रही। रेलिगेयर ब्रोकिंग में रिसर्च के SVP, अजीत मिश्रा के अनुसार, "आज बाजार में सतर्कता बनी रह सकती है, क्योंकि निवेशक कॉर्पोरेट नतीजों, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की पॉलिसी के असर का आकलन कर रहे हैं।"
अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया और महंगाई को काबू में लाने के अपने संकल्प को दोहराया।
 
मिश्रा ने कहा, "हालांकि फेड ने दरों को नहीं बदला है, लेकिन लगातार बनी हुई महंगाई और आगे और सख्ती (tightening) की संभावना वैश्विक वित्तीय स्थितियों और विदेशी निवेश प्रवाह (foreign flows) पर दबाव डाल सकती है।" मिश्रा के मुताबिक, "भारत के लिए ब्रेंट क्रूड का 113–115 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहना एक बड़ी चिंता का विषय है, क्योंकि इसका असर आयात बिल, करेंसी की स्थिरता, महंगाई और कॉर्पोरेट मार्जिन पर पड़ सकता है।" इस रिपोर्ट के समय, ब्रेंट क्रूड लगभग 114.05 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा था, जबकि कच्चा तेल (crude oil) लगभग 101.45 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था।
 
मार्केट एनालिस्ट विपिन डिक्सना ने कहा, "बाजार की निकट भविष्य की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि क्या कंपनियों के मजबूत नतीजे, महंगे कच्चे तेल और अनिश्चित विदेशी निवेश प्रवाह के दबाव को बेअसर कर पाते हैं या नहीं। कुछ मामलों में, निर्यात-केंद्रित कंपनियों को करेंसी में उतार-चढ़ाव से फायदा हो सकता है, लेकिन इसका असर अलग-अलग सेक्टर और इनपुट-कॉस्ट (लागत) के आधार पर अलग-अलग होगा।"
डिक्सना ने आगे कहा, "अगर बाजार 22,750–22,800 के स्तर के ऊपर लगातार बना रहता है, तो इससे निकट भविष्य के सेंटीमेंट में सुधार हो सकता है। 22,600–22,500 का दायरा नजर रखने के लिए महत्वपूर्ण है; अगर बाजार इस स्तर के नीचे मजबूती से टूटता है, तो और बिकवाली देखने को मिल सकती है।"
 
उन्होंने यह भी कहा, "हालिया कमजोरी से संकेत मिलता है कि जब तक इंडेक्स में लगातार मजबूती नहीं दिखती, तब तक तेजी (रैली) के दौरान बिकवाली का दबाव बना रह सकता है। ये केवल संकेत देने वाले दायरे (zones) हैं, न कि इंट्राडे के लिए तय किए गए पक्के स्तर।"