आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बुधवार को उम्मीद के मुताबिक प्रमुख नीतिगत दर रेपो को इस साल लगातार चौथी बार 5.25 प्रतिशत पर कायम रखा।
केंद्रीय बैंक ईरान युद्ध के कारण ऊर्जा की बढ़ी लागत के साथ भविष्य में महंगाई के रुख को लेकर अधिक स्पष्टता का इंतजार कर रहा है।
चुनौतीपूर्ण स्थिति के बावजूद आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) वृद्धि के अनुमान को 6.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.7 प्रतिशत कर दिया है। वहीं मुद्रास्फीति के अनुमान को 5.1 प्रतिशत से घटाकर 5.0 प्रतिशत किया है।
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता वाली छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने आम सहमति से नीतिगत रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर यथावत रखने का फैसला किया।
इसके साथ आरबीआई ने ‘तटस्थ’ रुख को भी बरकरार रखा है। इसका मतलब है कि केंद्रीय बैंक आर्थिक स्थिति के हिसाब से नीतिगत दर में समायोजन को लेकर लचीला बना रहेगा।
इस फैसले के साथ भारत ने इंडोनेशिया और फिलिपीन समेत एशिया के कई अन्य केंद्रीय बैंकों से अलग राह अपनाई है। इन देशों के केंद्रीय बैंकों ने ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी और युद्ध के कारण मुद्रा बाजार में बढ़ी अस्थिरता को देखते हुए मौद्रिक नीति को सख्त किया है। इसके विपरीत, आरबीआई ने रुपये को समर्थन देने और विदेशी पूंजी आकर्षित करने के लिए पिछली मौद्रिक नीति समीक्षा में घोषित उपायों पर ही भरोसा बनाए रखा है।