पीयूष गोयल ने चीन से नए सिरे से संबंधों के दिए संकेत, निष्पक्ष और स्थिर जुड़ाव पर जोर

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  onikamaheshwari | Date 14-10-2026
Piyush Goyal signals scope for renewed China ties, says engagement must be fair and stable
Piyush Goyal signals scope for renewed China ties, says engagement must be fair and stable

 

नई दिल्ली 
 
केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि भारत चीन सहित दुनिया भर के देशों के साथ व्यापारिक संबंध बनाने के लिए तैयार है, बशर्ते शर्तें निष्पक्ष हों और भू-राजनीतिक स्थिति स्थिर रहे। इससे बीजिंग के साथ फिर से आर्थिक संबंध शुरू होने की संभावना का संकेत मिलता है। ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में सप्लाई-चेन की मजबूती और टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप पर एक पैनल चर्चा के दौरान गोयल ने कहा, "हम दुनिया भर के सभी देशों के साथ जुड़ने के लिए तैयार हैं, बशर्ते हमें निष्पक्ष डील मिले, संबंधों में निरंतरता बनी रहे और भू-राजनीतिक स्थिति खराब न हो।" उन्होंने कहा, "हम चीन के साथ फिर से संबंध बेहतर करने की दिशा में काम कर रहे हैं, लेकिन इस सफर का आखिरी अध्याय अभी लिखा जाना बाकी है।"
 
गोयल ने यह भी कहा कि अमेरिका के साथ भारत के संबंध मजबूत बने हुए हैं और इनके और बेहतर होने की उम्मीद है। उन्होंने इसे दोनों देशों और पूरी दुनिया के लिए अहम बताया। उन्होंने कहा कि यह साझेदारी सिर्फ़ व्यापार (जिसमें अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है) तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसमें रक्षा, टेक्नोलॉजी, महत्वपूर्ण खनिज और लोगों के बीच आपसी संबंध भी शामिल हैं। उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि अमेरिका और भारत के बीच बहुत ही अहम संबंध हैं और ये और बेहतर ही होंगे।" उन्होंने कहा कि इन संबंधों को आर्थिक, राजनीतिक और सुरक्षा संबंधी ज़रूरतों का समर्थन हासिल है और दोनों देशों में राजनीतिक सोच में बदलाव के बावजूद ये संबंध मजबूत बने रहेंगे।
 
गोयल ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि देश तेज़ी से अपनी टेक्नोलॉजी और उपकरण सप्लाई-चेन विकसित करने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे भरोसेमंद साझेदारों के बीच सहयोग महत्वपूर्ण हो गया है। उन्होंने कहा कि कुछ ही अर्थव्यवस्थाओं में केंद्रित क्षमताओं को बिना मिलकर काम किए दोहराना अलग-अलग देशों के लिए मुश्किल हो सकता है।
उन्होंने कहा, "जब तक हम हाथ नहीं मिलाते और मिलकर काम नहीं करते, तब तक यह संभव नहीं हो सकता कि हम उस काम को दोहरा सकें जो एक या दो देश बहुत बड़े पैमाने पर करने में सफल रहे हैं।"
 
मंत्री ने कहा कि भारत अलग-थलग रहने की नीति नहीं अपना रहा है, बल्कि महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता और भरोसेमंद अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों के ज़रिए दक्षता के बीच संतुलन बनाना चाहता है। उन्होंने कहा कि देशों को ऐसे क्षेत्रों की पहचान करने की ज़रूरत है जहाँ बाहरी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता उनके उत्पादन को नीतिगत बदलावों या भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के प्रति संवेदनशील बना सकती है। सिंगापुर के डिप्टी प्राइम मिनिस्टर और ट्रेड एंड इंडस्ट्री मिनिस्टर गैन किम योंग ने कहा कि सिंगापुर, भारत के साथ मिलकर सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री को मज़बूत करने और इसकी ग्रोथ के लिए वर्कर्स को ट्रेनिंग देने पर काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि ग्लोबल इकोनॉमिक और टेक्नोलॉजी संबंधों में बिखराव के बावजूद सहयोग बना रहना ज़रूरी है।
 
पैनल डिस्कशन के दौरान, कनाडा के इंटरनेशनल ट्रेड मिनिस्टर मनिंदर सिद्धू ने कहा कि कनाडा अपने ट्रेडिंग पार्टनर्स में विविधता लाने की कोशिशें तेज़ कर रहा है और भारत के साथ ट्रेड एग्रीमेंट के लिए बातचीत कर रहा है। उन्होंने कहा कि कनाडा के एनर्जी रिसोर्स भारत की बढ़ती ज़रूरतों को पूरा करने में मदद कर सकते हैं, क्योंकि 2035 तक भारत को 70 प्रतिशत ज़्यादा एनर्जी की ज़रूरत होगी। इस चर्चा में भरोसेमंद पार्टनरशिप, अलग-अलग तरह की सप्लाई चेन और टेक्नोलॉजी व ज़रूरी रिसोर्स में सहयोग पर बढ़ते ज़ोर को रेखांकित किया गया, क्योंकि देश बदलती जियोपॉलिटिकल और ट्रेड स्थितियों का सामना कर रहे हैं।