Piyush Goyal invited Japanese companies to invest.
नई दिल्ली
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भारत और जापान के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी को रेखांकित करते हुए जापानी कंपनियों से भारत में निवेश और कारोबारी साझेदारी को और मजबूत करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत जापानी तकनीक, विशेषज्ञता और निवेश के लिए लगातार बेहतर अवसर उपलब्ध करा रहा है।
गोयल मंगलवार को नई दिल्ली में उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से जापानी प्रतिनिधिमंडल के सम्मान में आयोजित रात्रिभोज को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद रहे। जापानी प्रतिनिधिमंडल यामानाशी प्रीफेक्चर से आया था।
गोयल ने कहा कि भारत और जापान के संबंध शांति, प्रगति और समृद्धि की साझा आकांक्षाओं पर आधारित हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों की साझेदारी अब केवल आर्थिक संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में वैश्विक प्रगति के लिए भरोसेमंद भागीदार बनने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
इन क्षेत्रों में बढ़ सकता है सहयोग
केंद्रीय मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बताए गए राष्ट्रीय परिवर्तन के सात प्रमुख क्षेत्रों का उल्लेख किया। इनमें विनिर्माण, कृषि, तकनीक, बुनियादी ढांचा, ऊर्जा एवं रक्षा, हरित एवं ब्लू इकोनॉमी तथा भारत की सभ्यतागत सॉफ्ट पावर शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि इन सभी क्षेत्रों में भारत और जापान की क्षमताएं एक-दूसरे की पूरक हैं। विशेष रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर, महत्वपूर्ण खनिज, बैटरी, ऊर्जा और नई पीढ़ी की मोबिलिटी जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग भविष्य की अर्थव्यवस्थाओं को आकार देने में अहम भूमिका निभा सकता है।
गोयल ने जुलाई 2026 में दिल्ली में आयोजित 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि जापान ने अगले दशक में भारत में 10 ट्रिलियन येन निवेश का लक्ष्य रखा है।
यूपी में जापानी निवेश की बड़ी संभावनाएं
गोयल ने उत्तर प्रदेश को जापानी निवेश के लिए महत्वपूर्ण गंतव्य बताया। उन्होंने कहा कि राज्य की बड़ी और महत्वाकांक्षी आबादी, बेहतर होती कनेक्टिविटी, औद्योगिक गतिविधियों और कुशल श्रमबल के कारण यहां जापानी तकनीक और विशेषज्ञता के लिए व्यापक अवसर हैं।
उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य की दिशा में काम कर रहा है। राज्य में 90 लाख से अधिक एमएसएमई हैं और यह देश का पांचवां सबसे बड़ा राज्य निर्यातक है।
जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट, यमुना एक्सप्रेसवे और जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (JICA) के सहयोग से विकसित वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर को उन्होंने राज्य की प्रमुख ताकतों में शामिल किया। इसके अलावा रक्षा, सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स समेत विभिन्न क्षेत्रों में 27 औद्योगिक क्लस्टर और इकोसिस्टम भी विकसित किए जा रहे हैं।
भारत में 1,400 से ज्यादा जापानी कंपनियां
गोयल के मुताबिक, वर्तमान में 1,400 से अधिक जापानी कंपनियां भारत में काम कर रही हैं। मोबिलिटी क्षेत्र में सुजुकी, टोयोटा और होंडा, इलेक्ट्रॉनिक्स में सोनी तथा इंजीनियरिंग क्षेत्र में हिताची और मित्सुबिशी जैसी कंपनियां भारत में मौजूद हैं।
भारत-जापान के बीच द्विपक्षीय व्यापार वित्त वर्ष 2025-26 में करीब 27.5 अरब डॉलर रहा। जापान भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का पांचवां सबसे बड़ा स्रोत भी बन गया है।
गोयल ने जापानी दर्शन ‘काइजन’, यानी लगातार सुधार की भावना, का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत के सुधारों में भी इसी तरह निरंतर प्रगति का दृष्टिकोण दिखाई देता है। उन्होंने कारोबार सुगमता, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स और जापानी भाषा के विस्तार जैसे प्रयासों को निवेश के अनुकूल माहौल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण बताया।
गोयल ने कहा कि वह 24 से 27 अगस्त 2026 तक जापान की यात्रा करेंगे और इस दौरान दोनों देशों के बीच आर्थिक एवं औद्योगिक सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा करेंगे। उन्होंने जापानी उद्योग जगत से भारत, विशेषकर उत्तर प्रदेश, को अपने विकास का केंद्र बनाने का आह्वान किया।