मुंबई (महाराष्ट्र)
कोर्ट के ऑनलाइन रिकॉर्ड के अनुसार, नोएल एन. टाटा ने बॉम्बे हाई कोर्ट में साथी ट्रस्टी वेणु श्रीनिवासन और तीन अन्य लोगों से जुड़े मामले में एक 'केविएट' (caveat) दाखिल किया है। यह केविएट 7 अक्टूबर, 2026 को दाखिल किया गया था। कोर्ट के रिकॉर्ड में नोएल एन. टाटा और एक अन्य व्यक्ति का नाम केविएट दाखिल करने वालों (caveators) के तौर पर है, जबकि वेणु श्रीनिवासन और तीन अन्य लोगों का नाम केविएट का नोटिस पाने वालों (caveatees) के तौर पर है। यह फाइलिंग लॉ फर्म 'सिरिल अमरचंद मंगलदास' के ज़रिए की गई थी।
यह घटनाक्रम सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (SDTT) के अंदर चल रहे गवर्नेंस (प्रशासन और कामकाज के तरीके) से जुड़े विवाद के बीच हुआ है। ट्रस्टी वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह ने ट्रस्ट के प्रशासन और गवर्नेंस की जांच के लिए महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर से संपर्क किया है। अलग-अलग शिकायतों में, श्रीनिवासन और सिंह ने ट्रस्ट के गवर्नेंस, टाटा संस के कमर्शियल और स्ट्रैटेजिक मामलों में इसकी भागीदारी और ट्रस्टी की नियुक्ति से जुड़े मामलों पर चिंता जताई है। श्रीनिवासन ने नोएल टाटा की नियुक्ति और 'परपेचुअल ट्रस्टी' (हमेशा के लिए ट्रस्टी) के तौर पर उनके बने रहने के आधार पर भी सवाल उठाए हैं। साथ ही, उन्होंने नोएल टाटा के बेटे नेविल टाटा को ट्रस्टी बनाने के हालात पर भी सवाल उठाए हैं।
इससे पहले, श्रीनिवासन ने SDTT में गवर्नेंस से जुड़ी कथित कमियों की महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर से तुरंत जांच की मांग की थी। उन्होंने कुछ फैसलों की प्रक्रिया से खुद को कथित तौर पर अलग रखे जाने पर भी चिंता जताई थी और टाटा संस की प्रस्तावित लिस्टिंग से जुड़े फैसलों की जांच की मांग की थी।
विजय सिंह ने भी इसी तरह ट्रस्ट के गवर्नेंस की जांच की मांग की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि टाटा संस के कमर्शियल मामलों में ट्रस्ट की बढ़ती भागीदारी से उसके चैरिटेबल स्टेटस और टैक्स देनदारियों पर असर पड़ सकता है। कोर्ट में यह नई फाइलिंग ऐसे समय में हुई है जब गवर्नेंस से जुड़े मुद्दों पर सक्षम अधिकारी विचार कर रहे हैं। खबरों के अनुसार, महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर ने श्रीनिवासन और सिंह की शिकायतों पर ट्रस्ट से जवाब मांगा है।
'केविएट' एक कानूनी फाइलिंग है जिसके ज़रिए कोई व्यक्ति कोर्ट से यह मौका मांगता है कि उससे जुड़ी किसी अर्ज़ी पर कोई आदेश पारित करने से पहले उसकी बात सुनी जाए। यह फाइलिंग प्रक्रिया से जुड़ी होती है और इससे विवाद की असलियत साबित नहीं होती, और न ही इससे यह पता चलता है कि कोर्ट ने आरोपों पर कोई निष्कर्ष निकाला है। हालांकि, नोएल एन टाटा की कैविएट एंट्री में किसी संभावित कार्यवाही की सटीक प्रकृति या मांगी जा सकने वाली राहत के बारे में विस्तार से नहीं बताया गया है।