Japan's trade deficit in the first half of the current fiscal year stood at 2.81 trillion yen.
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
ईरान में युद्ध के कारण तेल आयात की कीमतें बढ़ने से जापान का चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में व्यापार घाटा 2.81 लाख करोड़ येन (17.8 अरब अमेरिकी डॉलर) पर पहुंच गया। सरकार की ओर से बुधवार को जारी आंकड़ों में यह जानकारी दी गई।
वित्त मंत्रालय के प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष 2026-27 की अप्रैल-सितंबर अवधि में जापान का निर्यात सालाना आधार पर 18.4 प्रतिशत बढ़कर 63.5 लाख करोड़ येन हो गया। वहीं, आयात 20.4 प्रतिशत बढ़कर 66.3 लाख करोड़ येन पर पहुंच गया।
जापान के लिए निर्यात और आयात, दोनों का यह अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। तेल की कीमतों में भारी वृद्धि का असर प्लास्टिक के सामान और माल ढुलाई लागत समेत कई क्षेत्रों पर पड़ रहा है।
प्राकृतिक संसाधनों की कमी वाले जापान को अपने तेल की लगभग पूरी जरूरत आयात से पूरी करनी पड़ती है। तेल की खेप मंगाने के लिए वह पश्चिम एशिया में होर्मुज जलडमरूमध्य से होने वाली आवाजाही पर निर्भर रहा है। अब यह मार्ग लगभग बंद हो गया है और जापान को दूसरे रास्तों से तेल मंगाने के लिए अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है।
अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत फरवरी में 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर हाल में करीब 100 डॉलर प्रति बैरल हो गई है। पिछले कुछ महीनों में इसका भाव 110 डॉलर प्रति बैरल से भी ऊपर चला गया था। विश्लेषकों का कहना है कि कीमतों में जल्द राहत मिलने के आसार नहीं हैं।