लिस्टिंग से पहले ही Jio IPO फुली सब्सक्राइब

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  onikamaheshwari | Date 21-10-2026
Jio platforms IPO fully subscribed in less than two hours on Day 1 of subscription
Jio platforms IPO fully subscribed in less than two hours on Day 1 of subscription

 

मुंबई (महाराष्ट्र) 
 
एक्सचेंज के आंकड़ों के अनुसार, जियो प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड का इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) बुधवार को, यानी इश्यू खुलने के पहले ही दिन, 100 मिनट के भीतर पूरी तरह सब्सक्राइब हो गया। इसे क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIBs) की ओर से मिली जोरदार मांग का समर्थन मिला। इस रिपोर्ट को लिखे जाने के समय तक, IPO 1.27 गुना सब्सक्राइब हो चुका था। इसमें लगभग 19.75 करोड़ शेयरों के ऑफर के मुकाबले करीब 25 करोड़ शेयरों के लिए बोलियां (bids) मिलीं। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के आंकड़ों के मुताबिक, कुल आवेदनों की संख्या 13.56 लाख रही।
 
एंकर इन्वेस्टर्स को छोड़कर, QIB कैटेगरी 3.86 गुना सब्सक्राइब हुई। इस सेगमेंट के लिए आरक्षित 4.90 करोड़ शेयरों के मुकाबले लगभग 18.91 करोड़ शेयरों के लिए बोलियां प्राप्त हुईं। नॉन-इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (NII) कैटेगरी 0.41 गुना सब्सक्राइब हुई। इस सेगमेंट में, 10 लाख रुपये से अधिक के आवेदनों के लिए आरक्षित हिस्सा 0.34 गुना सब्सक्राइब हुआ, जबकि 10 लाख रुपये से कम के आवेदनों वाला हिस्सा 0.54 गुना सब्सक्राइब हुआ।
 
यह IPO 21 अक्टूबर को सब्सक्रिप्शन के लिए खुला और 23 अक्टूबर को बंद होगा। जियो प्लेटफॉर्म्स ने प्रति इक्विटी शेयर के लिए 1,065 रुपये से 1,119 रुपये का प्राइस बैंड तय किया है, जिसमें न्यूनतम बोली लॉट 12 शेयरों का है। पहले ही दिन मिली यह शानदार प्रतिक्रिया, कंपनी की 'एंकर बुक' में संस्थागत निवेशकों की भारी दिलचस्पी के बाद आई है। कंपनी की पिछली घोषणा के अनुसार, जियो प्लेटफॉर्म्स के 8,110 करोड़ रुपये के एंकर एलोकेशन (हिस्सेदारी आवंटन) के लिए कुल 2.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक की संस्थागत मांग आई, जो ऑफर की गई राशि से 30 गुना से भी ज्यादा थी।
 
एंकर एलोकेशन 1,119 रुपये प्रति शेयर के भाव पर किया गया था। इसमें 212 ग्लोबल एसेट मैनेजरों, घरेलू म्यूचुअल फंडों, सॉवरेन वेल्थ फंडों, पेंशन संस्थानों और भारतीय फैमिली ऑफिसों ने हिस्सा लिया। निवेशक 23 अक्टूबर तक इस इश्यू के लिए बोली लगा सकते हैं। अलग-अलग निवेशक श्रेणियों में सब्सक्रिप्शन के आंकड़े इस पेशकश की मांग को समझने के लिए एक अहम संकेत माने जाएंगे।