IndiGo focuses on operational efficiency, international expansion amid industry challenges: Willie Walsh
नई दिल्ली
इंडिगो के CEO विली वॉल्श ने कहा कि एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की बढ़ती कीमतें और परिचालन लागत (ऑपरेटिंग कॉस्ट) पर इनका असर इंडिगो के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। एयरलाइन के कुल खर्च में ईंधन का हिस्सा लगभग 40 प्रतिशत है, जबकि वैश्विक विमानन उद्योग में यह आंकड़ा करीब 32 प्रतिशत है। वॉल्श ने कहा, "जेट ईंधन की कीमतें अभी रिकॉर्ड स्तर पर हैं, जिससे एयरलाइंस के लिए काम करना मुश्किल हो गया है। खासकर भारत में, जहां कुल परिचालन लागत में ईंधन का हिस्सा काफी ज्यादा है।" उन्होंने आगे कहा, "इंडिगो ईंधन की ऊंची कीमतों के असर को जितना संभव हो सके, उतने प्रभावी ढंग से संभाल रही है।"
विमानन उद्योग के सामने मौजूद लागत संबंधी चुनौतियों का जिक्र करते हुए, वॉल्श ने बताया कि कई अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस को 'फ्यूल हेजिंग' (ईंधन की कीमतों को पहले से तय कर लेने) के समझौतों से फायदा मिला है। हालांकि, इनमें से कई समझौते 2027 के करीब आते-आते खत्म हो जाएंगे। इससे वैश्विक स्तर पर एयरलाइंस के बीच लागत को लेकर प्रतिस्पर्धा का माहौल बदल सकता है। वॉल्श ने कहा, "ईंधन की ऊंची कीमतों के दबाव के बावजूद, इंडिगो अपनी लंबी अवधि की विस्तार योजनाओं पर काम कर रही है। इसमें 2028 के उत्तरार्ध में अपने बेड़े में A350 वाइड-बॉडी विमानों को शामिल करना भी शामिल है। इस कदम का मकसद एयरलाइन के लंबी दूरी के अंतरराष्ट्रीय परिचालन का विस्तार करना और अपनी प्रीमियम सेवाओं को मजबूत बनाना है।"
एयरलाइन के परिचालन प्रदर्शन पर बात करते हुए, वॉल्श ने कहा, "इस साल अब तक के नौ महीनों में, समय पर उड़ान भरने (ऑन-टाइम परफॉरमेंस) के मामले में इंडिगो पहले नंबर पर रही है।" उन्होंने बताया कि लगातार समय की पाबंदी ग्राहकों की संतुष्टि का एक मुख्य कारण है, जिससे एयरलाइन को अब तक का सबसे अच्छा 'नेट परफॉरमेंस स्कोर' हासिल करने में मदद मिली है। उन्होंने दोहराया कि सुरक्षा एयरलाइन की सबसे बड़ी प्राथमिकता है और ग्राहकों की सेवा के प्रति कर्मचारियों के समर्पण की तारीफ की।
इंडिगो के बिजनेस मॉडल पर टिप्पणी करते हुए, वॉल्श ने कहा, "एयरलाइन ने एक मजबूत 'लो-कॉस्ट' (कम लागत वाले) आधार तैयार किया है, लेकिन अब यह पारंपरिक 'लो-कॉस्ट कैरियर' मॉडल से आगे बढ़ चुकी है। इसमें अब कार्गो सेवाएं, प्रीमियम पेशकशें और एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क भी शामिल है।"
उन्होंने कहा कि पिछले दो दशकों में भारत के विमानन क्षेत्र के विकास में इंडिगो ने अहम भूमिका निभाई है। अब इसका लक्ष्य घरेलू कनेक्टिविटी को और मजबूत करना, अंतरराष्ट्रीय परिचालन का विस्तार करना और भारत को दुनिया के बाकी हिस्सों से बेहतर ढंग से जोड़ना है। परिचालन संबंधी चुनौतियों पर वॉल्श ने कहा, "पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र का लगातार बंद रहना विमानन उद्योग के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।" उन्होंने यह भी बताया कि पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात को देखते हुए इंडिगो ने सऊदी अरब के लिए अपनी उड़ानों की संख्या कम कर दी है।
मुंबई में हवाई अड्डे के बुनियादी ढांचे पर बात करते हुए, वॉल्श ने नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को एयरलाइन के लिए एक बड़ा अवसर बताया। उन्होंने कहा कि इंडिगो को उम्मीद है कि भविष्य में उसका परिचालन मुंबई और नवी मुंबई, दोनों हवाई अड्डों से होगा।
ईंधन की लागत से जुड़ी चुनौतियों के बावजूद, वॉल्श ने कहा कि एयरलाइन का विकास जारी रहने की उम्मीद है। अंतरराष्ट्रीय विस्तार और विमानों की संख्या बढ़ाना उनकी दीर्घकालिक रणनीति का अहम हिस्सा है।