नई दिल्ली
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में बड़ा उछाल देखा गया है। ब्रेंट क्रूड की कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है, जो वैश्विक बाजार के लिए चिंता का संकेत है। यह तेजी उस समय आई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ किया कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी तब तक जारी रहेगी, जब तक ईरान अमेरिका के साथ समझौते के लिए तैयार नहीं हो जाता।
एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि यह नाकेबंदी ईरान पर दबाव बनाने का सबसे प्रभावी तरीका साबित हो रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका का मुख्य उद्देश्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकना है और वह किसी भी स्थिति में ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा। ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि अगर बातचीत आगे नहीं बढ़ती, तो अमेरिका अन्य विकल्पों पर भी विचार कर सकता है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने पहले प्रस्ताव दिया था कि बातचीत से पहले हॉर्मुज जलडमरूमध्य को खोला जाए और नाकेबंदी हटाई जाए, लेकिन अमेरिका ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि पहले ईरान को उनकी चिंताओं का समाधान करना होगा, उसके बाद ही किसी प्रकार की रियायत दी जाएगी।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का एक अहम मार्ग है, जहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल और गैस की आपूर्ति होती है। ऐसे में यहां किसी भी प्रकार की रुकावट का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर पड़ता है। नाकेबंदी के चलते आपूर्ति में बाधा की आशंका बढ़ गई है, जिससे तेल की कीमतों में तेजी आई है।
इस स्थिति पर प्रसिद्ध अर्थशास्त्री जेफ्री सैक्स ने गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यह संकट लंबा खिंचता है, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लग सकता है। उनके अनुसार, तेल की आपूर्ति में कमी और बढ़ती कीमतें कई देशों की आर्थिक स्थिरता को प्रभावित कर सकती हैं।
सैक्स ने कहा कि फिलहाल उम्मीद की जा रही है कि आपूर्ति में कमी को किसी तरह संतुलित किया जाएगा, लेकिन अगर ऐसा नहीं हुआ तो कीमतें और बढ़ सकती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा संकट का यह संयोजन वैश्विक बाजारों के लिए बेहद संवेदनशील स्थिति पैदा कर रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हॉर्मुज जलडमरूमध्य में नाकेबंदी जारी रहती है, तो आने वाले समय में तेल की कीमतें और ऊपर जा सकती हैं। इसका असर न केवल पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर पड़ेगा, बल्कि वैश्विक महंगाई और आर्थिक गतिविधियों पर भी दिखाई देगा।
फिलहाल, दुनिया भर के बाजार इस घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। आने वाले दिनों में यह तय होगा कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होता है या यह संकट और गहराता है, जिसका सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।