आवाज द वाॅयस/ नई दिल्ली
देश के पांच राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लोकतंत्र का महापर्व अपने अंतिम चरण में पहुंच गया है। बुधवार शाम जैसे ही अंतिम दौर का मतदान समाप्त हुआ देश भर की नजरें टीवी स्क्रीन पर टिक गईं। 2026 के इन विधानसभा चुनावों में पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी की किस्मत अब ईवीएम में कैद है। विभिन्न एजेंसियों के एग्जिट पोल के आंकड़ों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। इन अनुमानों में कहीं सत्ता परिवर्तन की आहट है तो कहीं पुराने चेहरे दोबारा वापसी करते दिख रहे हैं।
बंगाल में कड़ी टक्कर: क्या ढहेगा ममता का किला?
पश्चिम बंगाल की राजनीति हमेशा से ही दिलचस्प रही है। इस बार के एग्जिट पोल ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच एक कांटे की टक्कर दिखा रहे हैं। चाणक्य स्ट्रैटेजीज और मीटराइज जैसी एजेंसियों का मानना है कि इस बार बंगाल में भगवा लहरा सकता है। चाणक्य के अनुसार भाजपा को 150 से 160 सीटें मिल सकती हैं जो बहुमत के आंकड़े से ऊपर है। वहीं तृणमूल कांग्रेस 130 से 140 सीटों पर सिमटती दिख रही है।
पोल डायरी का अनुमान तो भाजपा के लिए और भी ज्यादा उत्साहजनक है। उसने भाजपा को 171 सीटों तक की बढ़त दी है। इसके उलट पीपल्स प्लस का सर्वे ममता बनर्जी के प्रशंसकों को राहत दे सकता है। इस एजेंसी के मुताबिक टीएमसी भारी बहुमत के साथ 187 सीटें जीतकर सत्ता में वापसी कर रही है। बंगाल में इस बार लगभग 90 प्रतिशत मतदान हुआ है जो यह बताता है कि जनता ने किसी बड़े बदलाव या बहुत गहरे भरोसे के साथ वोट दिया है।
असम में फिर खिलेगा कमल?
पूर्वोत्तर के द्वार कहे जाने वाले असम में एग्जिट पोल के नतीजे भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए के पक्ष में एकतरफा नजर आ रहे हैं। एक्सिस माई इंडिया और जेवीसी दोनों ही एजेंसियों ने भाजपा को 88 से 101 सीटों के बीच रखा है। असम में कुल 126 सीटें हैं और बहुमत के लिए 64 का आंकड़ा चाहिए। कांग्रेस ने यहाँ छह दलों का बड़ा गठबंधन बनाया था लेकिन आंकड़ों में वह 30 के आसपास ही सिमटती दिख रही है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा का दावा है कि उनकी पार्टी 100 का आंकड़ा पार कर जाएगी। यहाँ 85 प्रतिशत से ज्यादा मतदान होना यह संकेत है कि विकास या अस्मिता के मुद्दे पर लोगों ने जमकर वोट डाले हैं।

तमिलनाडु में स्टालिन का जलवा कायम
दक्षिण भारत के बड़े राज्य तमिलनाडु की बात करें तो यहाँ मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की पकड़ मजबूत नजर आ रही है। अधिकांश एग्जिट पोल डीएमके गठबंधन की शानदार जीत की भविष्यवाणी कर रहे हैं। पीपुल्स प्लस के मुताबिक डीएमके को 145 सीटें मिल सकती हैं। विपक्षी एआईएडीएमके 80 सीटों के नीचे संघर्ष करती दिख रही है। इस चुनाव में सिनेमाई स्टार विजय की पार्टी 'तमिलनाडु वेट्री कज़गम' ने भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है। कुछ सर्वे उन्हें 6 सीटें दे रहे हैं तो पीपल्स इनसाइट ने उन्हें 40 सीटों तक का बड़ा दावेदार माना है। अगर ऐसा होता है तो विजय राज्य की राजनीति में किंगमेकर की भूमिका में आ सकते हैं।
केरल में बदल सकता है रिवाज
केरल की राजनीति में हर पांच साल में सरकार बदलने की परंपरा रही है। हालांकि 2021 में वामपंथी गठबंधन (एलडीएफ) ने इस परंपरा को तोड़ा था। लेकिन 2026 के एग्जिट पोल इशारा कर रहे हैं कि केरल फिर से अपनी पुरानी रीत पर लौट सकता है। एक्सिस माई इंडिया के अनुसार कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूडीएफ 90 सीटों तक पहुंच सकता है। मुख्यमंत्री पिनारयी विजयन की सरकार को यहाँ बड़ा झटका लगने की उम्मीद जताई जा रही है। भाजपा यहाँ भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की कोशिश में है लेकिन सर्वे उसे शून्य से तीन सीटों के बीच ही दिखा रहे हैं।
VIDEO | Bhabanipur, West Bengal: Chief Minister Mamata Banerjee flashes a victory sign as she arrives to cast her vote at a polling station in Mitra Institution.
— Press Trust of India (@PTI_News) April 29, 2026
Expressing confidence, she says, “TMC will win.”#AssemblyPollsWithPTI#WestBengalPollsWithPTI pic.twitter.com/d7WBrjQGkD
पुडुचेरी और भविष्य की राह
पुडुचेरी की 30 सीटों पर भी मुकाबला कड़ा रहा। यहाँ एनडीए को बढ़त मिलने के आसार हैं। हालांकि यहाँ कई छोटे दल और नए खिलाड़ी भी मैदान में हैं जो किसी का भी खेल बिगाड़ सकते हैं।
एग्जिट पोल के ये आंकड़े भले ही राजनीतिक दलों के दिलों की धड़कन बढ़ा रहे हों लेकिन अंतिम फैसला 4 मई को ही होगा। बंगाल में ममता बनर्जी की चौथी पारी की कोशिश और भाजपा का ऐतिहासिक विजय संकल्प किसके पक्ष में जाता है यह देखना होगा। असम में हिमंता बिस्वा सरमा की रणनीति और केरल में कांग्रेस की वापसी की उम्मीदें क्या हकीकत बनेंगी? तमिलनाडु में क्या स्टालिन अपनी सत्ता बचा पाएंगे? इन सभी सवालों के जवाब 4 मई को मतगणना के बाद मिल जाएंगे। फिलहाल सभी दल अपनी-अपनी जीत के दावे कर रहे हैं और जनता को अंतिम परिणामों का बेसब्री से इंतजार है।