AI से बिजली ग्रिड की विश्वसनीयता और पूर्वानुमान में सुधार संभव: CEA चेयरमैन

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  onikamaheshwari | Date 15-10-2026
AI can improve forecasting, decision-making and grid reliability in power sector: CEA Chairman
AI can improve forecasting, decision-making and grid reliability in power sector: CEA Chairman

 

नई दिल्ली 
 
केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) के अध्यक्ष घनश्याम प्रसाद ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) भारत की बिजली आपूर्ति श्रृंखला (इलेक्ट्रिसिटी वैल्यू चेन) में पूर्वानुमान, निर्णय लेने की प्रक्रिया, संसाधनों के उपयोग और ग्रिड की विश्वसनीयता में सुधार कर सकता है। साथ ही, यह स्टार्टअप्स और युवा इनोवेटर्स के लिए वास्तविक दुनिया की चुनौतियों के समाधान विकसित करने के अवसर भी पैदा कर सकता है। 'मेकिंग द इंडियन पावर सेक्टर AI इनेबल्ड' (भारतीय बिजली क्षेत्र को AI-सक्षम बनाना) कार्यक्रम में बोलते हुए प्रसाद ने कहा, "भारत के बिजली क्षेत्र में अगली बड़ी उपलब्धि जरूरी नहीं कि किसी बड़ी कंपनी या स्थापित रिसर्च लैब से ही आए। यह आज इसी हॉल में बैठे किसी छात्र की ओर से भी आ सकती है।"
 
उन्होंने कहा कि 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनने, विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) का विस्तार करने और आर्थिक विकास को तेज करने के भारत के लक्ष्य को पूरा करने के लिए एक भरोसेमंद, किफायती, मजबूत और अधिक स्वच्छ बिजली प्रणाली की आवश्यकता होगी। प्रसाद ने कहा, "बिजली अब केवल एक बुनियादी ढांचा सेवा (इंफ्रास्ट्रक्चर सर्विस) नहीं रह गई है। यह हमारी डिजिटल अर्थव्यवस्था, उद्योगों, शहरों और आधुनिक जीवन के लगभग हर पहलू की रीढ़ है।"
 
उन्होंने बताया कि बिजली क्षेत्र पारंपरिक, केंद्रीकृत प्रणालियों से एक अधिक जटिल इकोसिस्टम की ओर बढ़ रहा है, जिसमें नवीकरणीय ऊर्जा (रिन्यूएबल एनर्जी), बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम, इलेक्ट्रिक वाहन, डिस्ट्रीब्यूटेड जनरेशन, स्मार्ट ग्रिड और डिजिटल रूप से जुड़े बुनियादी ढांचे शामिल हैं। उन्होंने कहा कि चुनौती केवल अधिक बिजली पैदा करने की नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करने की भी है कि बिजली सही समय पर और सही जगह पर उपलब्ध हो, और वह उपभोक्ताओं तथा उद्योगों की जरूरत के अनुसार विश्वसनीय और उच्च गुणवत्ता वाली हो।
 
प्रसाद ने बताया कि AI-आधारित वाइब्रेशन एनालिसिस (कंपन विश्लेषण) और थर्मल मॉनिटरिंग की मदद से टर्बाइन, जनरेटर और अन्य महत्वपूर्ण उपकरणों में संभावित खराबी का पहले ही पता लगाया जा सकता है। इससे महंगी बिजली कटौती (आउटेज) को रोका जा सकता है। ट्रांसमिशन (बिजली पारेषण) के क्षेत्र में, AI-आधारित मॉनिटरिंग, फॉल्ट डिटेक्शन (खराबी का पता लगाना) और डेटा एनालिसिस से नेटवर्क की विश्वसनीयता और बुनियादी ढांचे के उपयोग में सुधार किया जा सकता है। वितरण (डिस्ट्रीब्यूशन) के क्षेत्र में, स्मार्ट मीटर एनालिटिक्स की मदद से बिजली कंपनियां लोड का बेहतर पूर्वानुमान लगा सकती हैं, असामान्य खपत पैटर्न की पहचान कर सकती हैं और उपभोक्ता सेवाओं को मजबूत कर सकती हैं।
 
AI-आधारित डिसीजन-सपोर्ट सिस्टम ग्रिड ऑपरेटरों को मांग का पूर्वानुमान लगाने, भीड़भाड़ (कंजेशन) को प्रबंधित करने और ग्रिड के सुरक्षित व विश्वसनीय संचालन को बनाए रखने में भी मदद कर सकते हैं। प्रसाद ने कहा, "AI हमें समस्याओं के आने के बाद उन पर प्रतिक्रिया देने के बजाय, उनके आने से पहले ही उनका अनुमान लगाने और उन्हें रोकने में मदद कर सकता है।" उन्होंने बिजली आपूर्ति श्रृंखला में दक्षता सुधारने की इस तकनीक की क्षमता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि AI को अपने आप में एक लक्ष्य मानने के बजाय, व्यावहारिक समस्याओं को सुलझाने के एक साधन के रूप में देखा जाना चाहिए। इसकी अहमियत इस बात पर निर्भर करेगी कि क्या यह बिजली की विश्वसनीयता को बेहतर बनाता है, वितरण के नुकसान (डिस्ट्रीब्यूशन लॉस) को कम करता है, फील्ड इंजीनियरों की सुरक्षा बढ़ाता है, और नवीकरणीय ऊर्जा (रिन्यूएबल एनर्जी) को सिस्टम में शामिल करने में मदद करता है।
 
स्टार्टअप्स की भूमिका पर जोर देते हुए, प्रसाद ने कहा कि उनकी यह खूबी—कि वे स्थापित तौर-तरीकों पर सवाल उठा सकते हैं, तेजी से प्रयोग कर सकते हैं और अलग-अलग क्षेत्रों में एक साथ काम कर सकते हैं—ऐसे समाधान विकसित करने में मदद कर सकती है, जिन्हें पारंपरिक तरीकों से शायद न देखा जा सके। उन्होंने युवा इनोवेटर्स को प्रोत्साहित किया कि वे समस्याओं की पहचान करें, उत्पाद विकसित करें और यह सुनिश्चित करें कि उनके समाधान वास्तविक कामकाजी परिस्थितियों में लगातार, सुरक्षित और किफायती ढंग से काम करें।
 
CEA के चेयरपर्सन ने इस बात पर भी जोर दिया कि इलेक्ट्रिकल इंजीनियरों के साथ-साथ, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, डेटा साइंस, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट, साइबर सुरक्षा और एनर्जी इकोनॉमिक्स जैसे विभिन्न क्षेत्रों के पेशेवरों की भी जरूरत है।
शैक्षणिक संस्थानों, शोध संगठनों और इंडस्ट्री पार्टनर्स को इंटर्नशिप, रिसर्च प्रोजेक्ट्स, इनोवेशन चैलेंज, पायलट डेमोंस्ट्रेशन और स्टार्टअप पार्टनरशिप के जरिए मिलकर काम करना चाहिए, ताकि क्लासरूम की पढ़ाई और व्यावहारिक इस्तेमाल के बीच के अंतर को कम किया जा सके।
 
प्रसाद ने कहा, "हमारा लक्ष्य सिर्फ दुनिया की सबसे बेहतरीन तकनीक को अपनाना ही नहीं होना चाहिए, बल्कि भारत में ऐसे समाधान विकसित करने पर भी जोर देना चाहिए जो पूरी दुनिया के काम आ सकें।" उन्होंने छात्रों से जिज्ञासु बने रहने, अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़ी क्षमताएं विकसित करने और प्रयोग करते रहने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि युवाओं के पास इनोवेशन और उद्यमिता (एंटरप्रेन्योरशिप) के जरिए भारत के पावर सेक्टर को नई दिशा देने का बेहतरीन मौका है।