कोहली का विराट इतिहास: 28,000 रन पूरे कर बने दुनिया के सबसे तेज़ बल्लेबाज़

Story by  मलिक असगर हाशमी | Published by  [email protected] | Date 12-01-2026
Kohli's remarkable history: Becomes the fastest batsman in the world to complete 28,000 runs.
Kohli's remarkable history: Becomes the fastest batsman in the world to complete 28,000 runs.

 

fआवाज द वाॅयस/ नई दिल्ली

भारतीय क्रिकेट के आधुनिक युग के सबसे महान बल्लेबाज़ों में शुमार विराट कोहली ने एक बार फिर इतिहास रच दिया है। रविवार, 11 जनवरी को वडोदरा में न्यूजीलैंड के खिलाफ खेले गए पहले वनडे मुकाबले में कोहली अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के तीनों प्रारूपों (टेस्ट, वनडे और टी20) को मिलाकर 28,000 रन पूरे करने वाले दुनिया के सबसे तेज़ खिलाड़ी बन गए। इस उपलब्धि के साथ ही वह सचिन तेंदुलकर के बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट इतिहास के दूसरे सबसे ज़्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज़ भी बन गए हैं।

fविराट कोहली ने यह ऐतिहासिक मुकाम अपनी 624वीं अंतरराष्ट्रीय पारी में हासिल किया। उन्होंने न्यूजीलैंड के लेग स्पिनर आदित्य अशोक की गेंद पर चौका लगाकर 28,000 रनों का आंकड़ा पार किया। इससे पहले यह रिकॉर्ड महान सचिन तेंदुलकर के नाम था, जिन्होंने 644 पारियों में 28,000 रन पूरे किए थे। श्रीलंका के दिग्गज बल्लेबाज़ कुमार संगकारा इस सूची में तीसरे स्थान पर हैं, जिन्होंने 666 पारियों में यह उपलब्धि हासिल की थी। आंकड़े साफ़ तौर पर दिखाते हैं कि कोहली ने इस मुकाम तक पहुंचने के लिए अपने पूर्ववर्तियों की तुलना में कहीं कम समय लिया।

मैच से पहले विराट कोहली के नाम अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 27,975 रन दर्ज थे। जैसे ही उन्होंने चौका लगाया, वह 28,000 रन के क्लब में शामिल हो गए। फिलहाल सचिन तेंदुलकर 782 पारियों में 34,357 रन बनाकर इस सूची में शीर्ष पर हैं, जबकि संगकारा ने 666 पारियों में 28,016 रन बनाए थे। कोहली अब 28,068 रनों के साथ दूसरे स्थान पर मजबूती से काबिज़ हैं और जिस रफ्तार से वह आगे बढ़ रहे हैं, क्रिकेट जगत की निगाहें उनके अगले पड़ाव पर टिकी हुई हैं।

यह पहली बार नहीं है जब कोहली ने रन बनाने की रफ्तार में दिग्गजों को पीछे छोड़ा हो। फरवरी 2023 में वह 25,000 अंतरराष्ट्रीय रन पूरे करने वाले सबसे तेज़ बल्लेबाज़ बने थे। उन्होंने यह उपलब्धि 549 पारियों में हासिल की थी, जो सचिन तेंदुलकर से 28 पारियां कम थीं। इसके बाद अक्टूबर 2023 में कोहली ने 26,000 रन और सितंबर 2024 में 594 पारियों में 27,000 रन पूरे कर एक के बाद एक रिकॉर्ड अपने नाम किए।

वनडे क्रिकेट में विराट कोहली की महानता सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि उनकी बल्लेबाज़ी की शैली और दबाव में प्रदर्शन करने की क्षमता उन्हें बाकियों से अलग बनाती है। खास तौर पर लक्ष्य का पीछा करते हुए कोहली का रिकॉर्ड असाधारण रहा है। वह वनडे क्रिकेट में दूसरी पारी में बल्लेबाज़ी करते हुए 65 से अधिक की औसत से रन बनाते हैं, जबकि सफल रन चेज़ में उनका औसत लगभग 90 के आसपास है। यह सिर्फ ‘क्लच परफॉर्मेंस’ नहीं, बल्कि वर्षों से चली आ रही निरंतरता का प्रमाण है।

dकोहली लक्ष्य का पीछा करते समय मैच को अलग-अलग चरणों में बांटकर खेलते हैं। शुरुआती ओवरों में विकेट बचाना, बीच के ओवरों में स्पिन को समझकर सिंगल-डबल निकालना और अंत में ज़रूरत के मुताबिक आक्रामक रुख अपनाना—यह उनकी खासियत है। जब रन रेट बढ़ता है, फील्ड फैलती है और दबाव चरम पर होता है, तब भी कोहली का खेल ‘सुलझा हुआ’ दिखता है। यही वजह है कि वह मुश्किल हालात में भी टीम को जीत की दहलीज़ तक ले जाते हैं।

उनकी शतकीय पारियां अक्सर हाइलाइट्स में बेहद साधारण लगती हैं, लेकिन यही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। कोहली की शताब्दियां नियंत्रण पर आधारित होती हैं। वह शुरुआत में जोखिम भरे शॉट्स से बचते हैं, तेजी से सिंगल्स लेते हैं और जब गेंदबाज़ों व मैदान के आयामों को समझ लेते हैं, तब आक्रामकता बढ़ाते हैं। उनकी कई शताब्दियों में रन दौड़कर बनाए गए सिंगल्स की अहम भूमिका रही है। उदाहरण के तौर पर, दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ रांची में खेली गई उनकी एक शतकीय पारी में उन्होंने करीब 40 सिंगल्स लिए थे। यह रणनीति न सिर्फ स्कोरबोर्ड को गतिमान रखती है, बल्कि गेंदबाज़ों पर दबाव भी बनाए रखती है।

अब जब विराट कोहली अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के दूसरे सबसे बड़े रन-स्कोरर बन चुके हैं, तो उनकी तुलना सचिन तेंदुलकर से होना स्वाभाविक है। सचिन का 49वां और आखिरी वनडे शतक उनकी 451वीं पारी में आया था, जबकि कोहली 50 से ज़्यादा शतक लगाकर भी लगातार आगे बढ़ते जा रहे हैं। सबसे बड़ा अंतर ‘हंड्रेड प्रति पारी’ की दर में दिखाई देता है, जहां कोहली कहीं अधिक प्रभावशाली नज़र आते हैं।

विराट कोहली का करियर सिर्फ बल्लेबाज़ी तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने कप्तान के तौर पर भी भारतीय क्रिकेट को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। टेस्ट क्रिकेट में भारत को लंबे समय तक नंबर एक बनाए रखना, ऑस्ट्रेलिया में ऐतिहासिक टेस्ट सीरीज़ जीत और तेज़ गेंदबाज़ों को आक्रामक क्रिकेट खेलने की आज़ादी देना—ये सभी उनके नेतृत्व की पहचान बने। उन्होंने 68 टेस्ट मैचों में भारत की कप्तानी की, जिनमें से 40 में जीत दर्ज की, जिससे वह दुनिया के सबसे सफल टेस्ट कप्तानों में शामिल हो गए।

फिटनेस के मामले में भी कोहली ने भारतीय क्रिकेट की सोच बदल दी। उन्होंने यो-यो टेस्ट और उच्च फिटनेस मानकों को टीम चयन का अहम हिस्सा बनाया। मैदान पर उनकी ऊर्जा, आक्रामकता और जीत की भूख ने पूरी टीम को प्रेरित किया। यही वजह है कि वह सिर्फ एक महान बल्लेबाज़ ही नहीं, बल्कि एक युग-परिवर्तनकारी खिलाड़ी माने जाते हैं।

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आईपीएल में भी विराट कोहली का दबदबा कायम है। वह रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के लिए सभी सीज़न खेलने वाले इकलौते खिलाड़ी हैं और लीग के सर्वाधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज़ भी हैं। 2016 में एक सीज़न में 973 रन बनाने का उनका रिकॉर्ड आज भी अटूट है। 2025 में उन्होंने आखिरकार आरसीबी के साथ आईपीएल ट्रॉफी भी जीत ली, जिसे उन्होंने टेस्ट क्रिकेट से “पांच स्तर नीचे” बताया, लेकिन फिर भी यह उपलब्धि उनके करियर का एक अहम पड़ाव रही।

कुल मिलाकर, विराट कोहली का 28,000 रन तक पहुंचना सिर्फ एक आंकड़ा नहीं, बल्कि उनकी निरंतरता, मानसिक मजबूती और क्रिकेट की गहरी समझ का प्रतीक है। जिस तरह वह रिकॉर्ड दर रिकॉर्ड तोड़ते जा रहे हैं, उससे यह साफ है कि विराट कोहली सिर्फ अपने दौर के महान खिलाड़ी नहीं, बल्कि क्रिकेट इतिहास के सबसे बड़े नामों में से एक बन चुके हैं।