नई दिल्ली
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) की कुलपति संतिश्री धुलिपुड़ी पंडित ने विश्वविद्यालय की भूमिका पर गर्व व्यक्त किया, जो देश में विभिन्न वास्तविक नीति प्रभावों से जुड़े मुद्दों पर विश्वसनीय डेटा और अनुसंधान प्रदान करता है। उन्होंने ANI से बातचीत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा संस्थानों से विश्वसनीय डेटा की मांग का भी उल्लेख किया।
कुलपति ने कहा, "JNU देश में सभी अकादमिक और अनुसंधान कार्यों का समर्थन करता है, जो विश्वसनीय डेटा पर आधारित हैं। प्रधानमंत्री भी सभी उच्च शिक्षा संस्थानों से यह आग्रह कर रहे हैं कि वे विश्वसनीय डेटा प्रस्तुत करें, क्योंकि बिना डेटा के किसी भी सार्वजनिक नीति के वास्तविक प्रभावों की व्याख्या करना संभव नहीं है।"
उन्होंने 2011 के बाद से जनगणना आंकड़ों के अभाव और बड़ी आबादी वाले शहरों जैसे दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, बेंगलुरु और पुणे में आबादी वृद्धि की ओर ध्यान आकर्षित किया। कुलपति ने अवैध रूप से भारत में रहने वाले लोगों पर चिंता जताते हुए कहा कि वे संसाधनों का दुरुपयोग करते हैं और हमारे संविधान एवं विविधता और लोकतंत्र के मूल्यों को नहीं मानते।
पंडित ने मुंबई नगर निगम (BMC) चुनाव का हवाला देते हुए कहा, "यदि भारत को आर्थिक महाशक्ति बनना है, जैसा कि हमारे प्रधानमंत्री वादा कर रहे हैं, तो मुंबई को भारतीय हाथ में रहना चाहिए, अवैध प्रवासियों के हाथ में नहीं।"
कुलपति ने JNU को देश का सबसे राष्ट्रीयतावादी विश्वविद्यालय बताते हुए कहा कि हाल की विवादास्पद घटनाओं को सुलझा लिया गया है। उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय में "वंदे मातरम्" गाया जाता है और इसे किसी भी विरोध का सामना नहीं करना पड़ता।
संतिश्री पंडित ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ जारी हिंसा को दुखद बताया और कहा कि उन्हें कानूनी तरीके से आने वाले प्रवासियों से कोई आपत्ति नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अवैध प्रवासी भारतीय संस्कृति को अपनाने के बजाय बहुमत बनने और इरेडेंटिस्ट विचारधारा थोपने की कोशिश करते हैं, जो स्वीकार्य नहीं है।
कुलपति ने कहा, "1947 में हमने धार्मिक विभाजन देखा, जो इतिहास के सबसे भयंकर विभाजनों में से एक था। कई लोग मारे गए। अगर अमीर देश अवैध प्रवासियों के साथ ऐसा कर सकते हैं, तो आप भारत की स्थिति की कल्पना कर सकते हैं।"