देश का भविष्य युवाओं के हाथ में: अजीत डोभाल ने नेतृत्व और विल पावर पर जोर दिया

Story by  ओनिका माहेश्वरी | Published by  onikamaheshwari | Date 10-01-2026
The country's future is in the hands of the youth: Ajit Doval emphasized leadership and willpower
The country's future is in the hands of the youth: Ajit Doval emphasized leadership and willpower

 

ओनिका माहेश्वरी/ नई दिल्ली  

विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग 2026 के दूसरे सत्र में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने देशभर से आए तीन हजार युवा प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए नेतृत्व, निर्णय क्षमता, अनुशासन और इच्छाशक्ति के महत्व पर विस्तृत विचार रखे। उन्होंने कहा कि भारत का विकसित होना निश्चित है, लेकिन सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि इस विकसित भारत का नेतृत्व कौन करेगा और वह नेतृत्व कितना सक्षम होगा।

कार्यक्रम में श्रम, रोजगार, युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया, विभाग की सचिव पल्लवी गोयल, रक्षा राज्य मंत्री, एडिशनल सेक्रेटरी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। अपने संबोधन की शुरुआत में अजीत डोभाल ने तीन हजार चयनित युवाओं को कठिन प्रतिस्पर्धा के बाद यहां पहुंचने के लिए बधाई दी और कार्यक्रम में आमंत्रित किए जाने पर मंत्री का आभार व्यक्त किया।

उन्होंने कहा, "मुझे थोड़ा असमंजस था, क्योंकि मेरा अनुभव युवाओं के अनुभव से बहुत अलग है। मैं उस भारत में पैदा हुआ, जब देश स्वतंत्र नहीं था। लेकिन एक चीज़ हर युग में समान रहती है, और वह है — निर्णय लेने की क्षमता। यह छोटे निर्णय हों या बड़े, जीवन की दिशा, गति और गंतव्य तय करने में सबसे अहम भूमिका निभाती है।"

अजीत डोभाल ने कहा कि युवा जीवन में रोजाना छोटे और बड़े निर्णय लेते हैं, और जैसे-जैसे जिम्मेदारियां बढ़ती हैं, निर्णयों का महत्व और बढ़ जाता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत जिस गति और दिशा में बढ़ रहा है, वह ऑटो मोड पर भी विकसित भारत की ओर अग्रसर है। लेकिन यह तय करना युवाओं के हाथ में है कि उस भारत का नेतृत्व कैसा होगा।

नेतृत्व और निर्णय लेने की शक्ति पर जोर
डोभाल ने स्पष्ट किया कि एक सच्चे नेता की सबसे बड़ी शक्ति सही समय पर सही निर्णय लेना और पूरी आस्था व प्रतिबद्धता के साथ उन्हें लागू करना है। चाहे वह नेतृत्व विज्ञान, तकनीक, सुरक्षा, प्रशासन या किसी अन्य क्षेत्र में हो, निर्णय लेने की क्षमता को युवाओं को अभी से विकसित करना होगा।

उन्होंने युवाओं को दूरदर्शी सोच के साथ फैसले लेने की सलाह दी। "आज के लिए निर्णय लेना आसान होता है, लेकिन आने वाले भविष्य के लिए सोच-समझकर निर्णय लेना आवश्यक है। जीवन केवल सपनों से नहीं बनता। सपने दिशा देते हैं, लेकिन उन्हें निर्णय में बदलना और फिर वास्तविकता में परिणत करना जरूरी है। जो लोग इस प्रक्रिया को पूरा कर पाते हैं, वही सफलता हासिल करते हैं।"

डोभाल ने यह भी कहा कि भारत की आज़ादी और उसके बाद के इतिहास में असंख्य बलिदान हुए हैं। भगत सिंह, सुभाष चंद्र बोस, महात्मा गांधी और अनगिनत अन्य महापुरुषों ने अपने जीवन की सर्वोच्च कीमत चुकाई। उन्होंने युवाओं से कहा कि यह इतिहास उन्हें यह याद दिलाता है कि आत्म-संरक्षण और देश की सुरक्षा के प्रति सजग रहना कितना जरूरी है। यदि आने वाली पीढ़ियां इस सबक को भूल जाएंगी, तो यह देश के लिए सबसे बड़ी त्रासदी होगी।

निर्णय लेने और उन्हें सही बनाने की चुनौती
अजीत डोभाल ने कहा कि केवल सही निर्णय लेना पर्याप्त नहीं है, बल्कि लिए गए निर्णयों को सही बनाना उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है। इसके लिए संघर्ष, अनुशासन और दीर्घकालिक प्रतिबद्धता की आवश्यकता होती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मोटिवेशन अस्थायी होता है, लेकिन अनुशासन स्थायी होता है। मोटिवेशन को जीवनशैली में बदलकर अनुशासन बनाना ही सफलता की कुंजी है।

उन्होंने कहा, "काम को टालने की आदत जीवन में बाधाएं पैदा करती है। अगर कोई काम करना है तो उसे अभी करें। देर करना आदत बन जाती है, और यह आपके जीवन में आगे चलकर नुकसान देती है। कठिनाइयों के समय हार न मानें। स्थिरता और दृढ़ता सफलता की आधारशिला है।"

इच्छाशक्ति और उदाहरण
अपने 81 वर्षों के अनुभव का उल्लेख करते हुए डोभाल ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति पांच वर्षों तक अपने निर्णयों पर दृढ़ रहता है, तो उसके भीतर अद्भुत इच्छाशक्ति विकसित होती है। उन्होंने इसकी मिसाल दी अरुणिमा सिन्हा की।

अरुणिमा, नेशनल वॉलीबॉल खिलाड़ी, 2011 में दिल्ली से लखनऊ जाते समय बरेली के पास डकैतों के हमले का शिकार हुईं। गले की चेन छीनने के प्रयास में उन्हें ट्रेन से बाहर फेंक दिया गया, जिससे उनका एक पैर कट गया। डॉक्टरों ने माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई असंभव बताई, लेकिन अरुणिमा ने हार नहीं मानी। उन्होंने तेरह मई 2013 को माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई पूरी की और इतिहास रच दिया। डोभाल ने कहा, "यह इच्छाशक्ति केवल फिजिकल स्ट्रेंथ या टैलेंट से नहीं आती, बल्कि अनुशासन, प्रतिबद्धता और दृढ़ निश्चय से आती है। यह इच्छाशक्ति न केवल व्यक्ति की, बल्कि राष्ट्र की शक्ति भी बनती है।"

नेतृत्व और राष्ट्र शक्ति
डोभाल ने बताया कि युद्ध केवल हथियारों से नहीं, बल्कि मनोबल और इच्छाशक्ति से जीते जाते हैं। उन्होंने नेपोलियन का उदाहरण दिया: "मैं हजार शेरों से नहीं डरता, लेकिन अगर उस फौज का नेतृत्व भेड़ करता है, तो डर लगता है।" उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे तीन हजार शेर पैदा करें, ताकि भविष्य का भारत मजबूत नेतृत्व वाला और निर्णायक बन सके।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नेतृत्व देश के लिए आदर्श है। उनकी दूरदर्शिता, अनुशासन, समर्पण और टीमवर्क ने देश को पिछले दस वर्षों में अभूतपूर्व ऊंचाइयों तक पहुंचाया।

आर्थिक और ऐतिहासिक संदर्भ
डोभाल ने भारत और विश्व की आर्थिक और ऐतिहासिक स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि 17वीं और 18वीं शताब्दी तक भारत और कभी-कभार चीन विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में अग्रणी थे। उन्होंने चेतावनी दी कि देर नहीं की जाए, क्योंकि जीवन में कुछ भी स्थायी नहीं है। हर दिन, हर निर्णय और हर प्रयास देश और राष्ट्र को मजबूत बनाने के लिए महत्वपूर्ण हैं।

समापन और युवाओं के लिए संदेश
अपने संबोधन के अंत में अजीत डोभाल ने युवाओं को देश का भविष्य और कर्णधार बताते हुए कहा कि देश की दिशा वही तय करेंगे। उन्होंने युवाओं से जीवनभर सीखते रहने, अनुशासन में रहने और हर दिन बेहतर बनने का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, "कल के नेता आप ही हैं। निर्णय लें, उन पर अडिग रहें, अपने आप में विश्वास रखें और अपनी इच्छाशक्ति को जगाकर राष्ट्र की शक्ति बनाएं। यही आपकी और देश की सफलता की कुंजी है।"

उन्होंने युवाओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा, "आप भारत के भविष्य हैं, इसके कर्णधार हैं। अपने जीवन की मेहनत, लगन और समर्पण से न केवल खुद को बल्कि पूरे देश को ऊँचाइयों पर ले जाएं। आप सभी को मेरा बहुत-बहुत आशीर्वाद।"