अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने युवाओं से कहा: सपनों को अपनाएं और अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाओं को साकार करें

Story by  एटीवी | Published by  [email protected] | Date 12-01-2026
Astronaut Shubhanshu Shukla told the youth: Embrace your dreams and help realize India's space ambitions.
Astronaut Shubhanshu Shukla told the youth: Embrace your dreams and help realize India's space ambitions.

 

नई दिल्ली

अंतरिक्ष यात्री और भारतीय वायु सेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने रविवार को राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC) के गणतंत्र दिवस शिविर में भाग लेने वाले युवाओं से कहा कि वे अपने सपनों को अपनाएं और उनके लिए निरंतर मेहनत करें। उन्होंने विशेष रूप से मानव अंतरिक्ष मिशन और देश की अन्य महत्वाकांक्षाओं के लिए युवाओं को प्रेरित किया।

शुक्ला ने कैडेटों से कहा कि जीवन में कुछ असफलताओं से घबराने की जरूरत नहीं है और अपने निर्धारित लक्ष्यों की ओर लगातार प्रयास करते रहना चाहिए। उन्होंने हॉलीवुड एनिमेशन फिल्म 'फाइंडिंग नीमो' की मशहूर पंक्ति का उल्लेख करते हुए कहा, “जीवन के महासागर में लगातार आगे बढ़ते रहें।”

उन्होंने मीडिया से बातचीत में भी भारतीय युवाओं से उम्मीद जताई कि वे देश के महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को आत्मसात करें, विशेषकर जब भारत 2047 तक ‘विकसित भारत’ बनने का लक्ष्य रखता है। शुक्ला पिछले साल 15 जुलाई को अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर 18 दिन की ऐतिहासिक मिशन पूरी करने के बाद पृथ्वी पर लौटे थे। यह मिशन 25 जून को लॉन्च हुआ था और यह पहला अवसर था जब कोई भारतीय अंतरिक्ष यात्री ISS गया।

शुक्ला ने कहा, “पहले भारतीय अंतरिक्ष यात्री विंग कमांडर राकेश शर्मा 1984 में गए थे। इसके बाद 41 साल का अंतराल आया। लेकिन अब युवाओं में अंतरिक्ष के प्रति उत्साह और बड़े लक्ष्य हासिल करने की झुकाव दिखाई दे रही है।”

उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि देश और उसकी महत्वाकांक्षाओं के लिए अपने सपनों को अपनाएं। शुक्ला ने कहा, “यदि यह लक्ष्य 2040 तक पहले भारतीय को चंद्रमा पर भेजना है, तो हमें यह कहना होगा कि ‘यह मेरी जिम्मेदारी है’ कि यह सपना साकार हो।”

भारत की दीर्घकालीन अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाओं में 2035 तक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (Bharatiya Antariksha Station) की स्थापना और 2040 तक पहले भारतीय को चंद्रमा पर भेजना शामिल है।

शुक्ला ने यह भी कहा कि यदि देशवासी दिल और जान से मिलकर काम करें, तो 2047 से पहले ही ‘विकसित भारत’ का सपना साकार किया जा सकता है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि जिस कैप्सूल से उन्हें अंतरिक्ष में भेजा गया, वह वही परिसर था जहां नील आर्मस्ट्रांग 1969 में चंद्रमा की ऐतिहासिक उड़ान पर निकले थे।

शुक्ला का संदेश युवाओं को न केवल अंतरिक्ष के प्रति प्रेरित करता है, बल्कि उन्हें अपने सपनों को राष्ट्रीय लक्ष्य के साथ जोड़कर मेहनत करने की सीख भी देता है।