आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
वियतनाम और यूरोपीय संघ ने बृहस्पतिवार को अपने संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक उन्नत किया, जो वियतनाम का सर्वोच्च राजनयिक स्तर है।
यह कदम अमेरिकी शुल्क दबाव के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था में उथल-पुथल के बीच दोनों देशों द्वारा व्यापार की नयी रणनीति बनाने के लिए उठाया गया है।
इस उन्नयन से यूरोपीय संघ को अमेरिका, चीन और रूस के समान राजनयिक स्तर प्राप्त हो गया है तथा इसकी घोषणा यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा ने हनोई यात्रा के दौरान की थी।
कोस्टा ने कहा, ‘‘ऐसे समय में जब अंतरराष्ट्रीय नियम-आधारित व्यवस्था कई पक्षों से खतरे में है, हमें विश्वसनीय और भरोसेमंद साझेदारों के रूप में कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहने की जरूरत है।’’ उन्होंने आगे कहा कि यह साझेदारी ‘‘साझा समृद्धि के क्षेत्रों को विकसित करने’’ के बारे में है।
भारत और यूरोपीय संघ के बीच लगभग दो दशकों की बातचीत के बाद मंगलवार को एक मुक्त व्यापार समझौते पर सहमति बनी। इसके बाद कोस्टा वियतनाम की राजधानी हनोई पहुंचे।
वियतनाम के राष्ट्रपति लुओंग कुओंग ने इस कदम को ‘ऐतिहासिक उपलब्धि’ बताया।
यह घोषणा ऐसे समय में की गई है जब पिछले सप्ताह ही वियतनाम द्वारा कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव टो. लाम को देश के सर्वोच्च नेता के रूप में फिर से चुना गया।
वैश्वीकरण से वियतनाम को काफी लाभ हुआ है और बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा चीन से उत्पादन को स्थानांतरित करने के कारण यह इलेक्ट्रॉनिक्स, वस्त्र तथा उपभोक्ता वस्तुओं के लिए एक प्रमुख निर्यात केंद्र के रूप में उभरा है।