विश्व स्वास्थ्य संगठन से अमेरिका का बाहर होना वैश्विक स्वास्थ्य नीति में नए युग की शुरुआत

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 02-02-2026
US withdrawal from WHO marks the beginning of a new era in global health policy
US withdrawal from WHO marks the beginning of a new era in global health policy

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली

 
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) से बाहर होने के अमेरिका के फैसले ने वैश्विक स्वास्थ्य नीति में एक नए दौर की शुरुआत कर दी है। हालांकि इस फैसले से दुनिया के देशों के साथ साथ अमेरिका को भी नुकसान होगा।

ट्रंप प्रशासन का कहना है कि अन्य देशों की तुलना में डब्ल्यूएचओ के लिए अमेरिका का वित्तीय योगदान अधिक है, जो उसके लिए ठीक नहीं है। व्हाइट हाउस के अनुसार, चीन की आबादी अमेरिका से लगभग तीन गुना अधिक होने के बावजूद उसका योगदान अमेरिका से करीब 90 प्रतिशत कम है।
 
ट्रंप प्रशासन ने यह भी आरोप लगाया है कि कोविड-19 महामारी से निपटने में डब्ल्यूएचओ की प्रतिक्रिया कमजोर रही और संगठन में जवाबदेही व पारदर्शिता का अभाव है। वहीं, डब्ल्यूएचओ ने इन आरोपों को खारिज करते हुए मास्क और दूरी जैसी सिफारिशों सहित महामारी में सुझाए गए कदमों का जिक्र किया है।
 
आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका डब्ल्यूएचओ का सबसे बड़ा वित्तीय सहयोगी रहा है। वर्ष 2023 में अमेरिकी योगदान यूरोपीय आयोग से लगभग तीन गुना और दूसरे सबसे बड़े दानदाता जर्मनी से करीब 50 प्रतिशत अधिक था।
 
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरों की रोकथाम और समय पर प्रतिक्रिया, उनके व्यापक रूप लेने के बाद निपटने की तुलना में कहीं कम खर्चीली होती है।
 
डब्ल्यूएचओ से अमेरिका की वापसी की प्रक्रिया जटिल है। संगठन में शामिल होते समय अमेरिका ने अपने समझौते में एक विशेष प्रावधान जोड़ा था, जिसके तहत वह एक साल का नोटिस देकर और सभी बकाया भुगतान कर संगठन से बाहर हो सकता है। ट्रंप के कार्यभार संभालते ही अमेरिका ने नोटिस दे दिया था, और उस पर 2024-25 के लिए लगभग 26 करोड़ अमेरिकी डॉलर का बकाया है।