अमेरिका : इजरायल-खाड़ी देशों को 8.6 अरब डॉलर हथियार मंजूर

Story by  एटीवी | Published by  [email protected] | Date 02-05-2026
US Approves 8.6 Billion in Arms for Israel and Gulf Nations
US Approves 8.6 Billion in Arms for Israel and Gulf Nations

 

वॉशिंगटन

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच United States ने अपने प्रमुख सहयोगी देशों—इजरायल, कतर, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात—को 8.6 अरब डॉलर से अधिक के सैन्य उपकरणों की बिक्री को मंजूरी दे दी है। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब क्षेत्र में ईरान से जुड़े संघर्ष और अस्थिरता लगातार बनी हुई है।

रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी विदेश विभाग ने इन हथियार सौदों को “आपात स्थिति” का हवाला देते हुए मंजूरी दी है। इस निर्णय के तहत कतर को पैट्रियट मिसाइल रक्षा प्रणाली और अन्य हथियार, कुवैत को एकीकृत युद्ध कमांड सिस्टम, जबकि इजरायल और यूएई को उन्नत प्रिसिजन हथियार प्रणाली उपलब्ध कराई जाएगी।

इन सौदों को उस समय स्वीकृति मिली है जब अमेरिका और इजरायल का ईरान के साथ संघर्ष कई हफ्तों से जारी है, हालांकि बीच में एक नाजुक युद्धविराम भी लागू हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस सैन्य सहयोग का उद्देश्य क्षेत्र में अमेरिका की रणनीतिक पकड़ मजबूत करना और अपने सहयोगियों की सुरक्षा को बढ़ाना है।

इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने भी इस मुद्दे पर कड़ा रुख दिखाया है। उन्होंने कहा कि जो लोग यह दावा कर रहे हैं कि अमेरिका ईरान के खिलाफ युद्ध में सफल नहीं हो रहा, वे देश के खिलाफ काम कर रहे हैं। ट्रंप ने अपने आलोचकों पर तीखा हमला करते हुए कहा कि अमेरिकी सेना ने ईरान की सैन्य क्षमता को काफी हद तक कमजोर कर दिया है।

ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने के लिए यह सैन्य कार्रवाई जरूरी थी। उनके मुताबिक, अगर समय रहते कार्रवाई नहीं की जाती, तो ईरान परमाणु हथियार हासिल कर सकता था, जिससे इजरायल, मध्य पूर्व और यूरोप की सुरक्षा को गंभीर खतरा पैदा हो सकता था।

राष्ट्रपति ने यह भी संकेत दिया कि ईरान के साथ बातचीत अभी अपेक्षित दिशा में आगे नहीं बढ़ रही है। उन्होंने कहा, “हम तब तक इस संघर्ष को खत्म नहीं करेंगे, जब तक हमें उचित और संतोषजनक समझौता नहीं मिल जाता।” उन्होंने साफ किया कि अमेरिका जल्दबाजी में पीछे हटने के पक्ष में नहीं है।

विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका द्वारा इस तरह के बड़े पैमाने पर हथियार सौदे क्षेत्र में शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकते हैं। इससे एक ओर जहां अमेरिका के सहयोगी देशों की सैन्य क्षमता बढ़ेगी, वहीं दूसरी ओर क्षेत्रीय तनाव और भी बढ़ सकता है।

इस फैसले पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बहस शुरू हो गई है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि इससे मध्य पूर्व में हथियारों की होड़ तेज हो सकती है, जबकि अन्य इसे सुरक्षा संतुलन बनाए रखने के लिए जरूरी कदम बता रहे हैं।

कुल मिलाकर, अमेरिका का यह कदम न केवल उसके रणनीतिक हितों को दर्शाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि वह पश्चिम एशिया में अपनी भूमिका को और मजबूत करने के लिए लगातार सक्रिय है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस निर्णय का क्षेत्रीय राजनीति और वैश्विक सुरक्षा पर क्या असर पड़ता है।