वॉशिंगटन
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक नई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी के कारण ईरान को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। रिपोर्ट के मुताबिक, ओमान की खाड़ी और आसपास के समुद्री मार्गों में अमेरिका की कार्रवाई के चलते ईरान को लगभग 4.8 अरब डॉलर (करीब 5 अरब डॉलर) के तेल राजस्व का नुकसान हुआ है।
यह जानकारी अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन के आकलन पर आधारित बताई जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने इस क्षेत्र में अपने ऑपरेशन के जरिए ईरान के तेल निर्यात और समुद्री व्यापार को बाधित किया है, जिससे उसकी अर्थव्यवस्था पर सीधा असर पड़ा है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह कदम प्रतिबंधित व्यापार और ऊर्जा निर्यात को रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है।
यह घटनाक्रम उस समय सामने आया है जब Strait of Hormuz के आसपास तनाव लगातार बढ़ रहा है। यह जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक माना जाता है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है।
पेंटागन के प्रवक्ता के हवाले से कहा गया है कि अमेरिका की यह नाकेबंदी पूरी ताकत के साथ लागू की जा रही है और इसका उद्देश्य ईरान पर आर्थिक दबाव बनाए रखना है। अधिकारियों के अनुसार, इससे ईरान की उन गतिविधियों को रोकने की कोशिश की जा रही है, जिन्हें अमेरिका क्षेत्रीय अस्थिरता और आतंकवाद के समर्थन से जोड़ता है।
इस बीच, अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने भी ईरानी नेतृत्व पर तीखी टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि ईरान के नेता जमीनी हकीकत से कटे हुए हैं और उन्हें अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का सही अंदाजा नहीं है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका का Strait of Hormuz पर पूरा नियंत्रण है और जब तक “नेविगेशन की स्वतंत्रता” सुनिश्चित नहीं हो जाती, तब तक यह नाकेबंदी जारी रहेगी।
बेसेंट ने यह भी कहा कि ईरान में विदेशी मुद्रा की कमी, खाद्य और ईंधन की राशनिंग जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं, जो इस नाकेबंदी के प्रभाव को दर्शाती हैं। हालांकि उनके इन बयानों पर ईरान की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया भी सामने आई है।
दक्षिण अफ्रीका में स्थित ईरानी दूतावास ने अमेरिकी टिप्पणियों को खारिज करते हुए तीखा जवाब दिया और कहा कि अमेरिका ने न केवल युद्ध में बल्कि साइबर क्षेत्र में भी हार का सामना किया है।
गौरतलब है कि 13 अप्रैल को अमेरिका ने ईरान के खिलाफ नौसैनिक नाकेबंदी लागू की थी, जब इस्लामाबाद में हुई वार्ता के बाद भी दोनों देशों के बीच तनाव कम नहीं हुआ। तब से लेकर अब तक क्षेत्र में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस नाकेबंदी का असर केवल ईरान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि यह तनाव कूटनीति के जरिए कम होता है या और गहराता है।