वॉशिंगटन:
अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान को लेकर एक बार फिर कड़ा रुख अपनाते हुए बड़ा बयान दिया है। शुक्रवार (1 मई) को व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि अमेरिका के सामने दो ही विकल्प हैं—या तो ईरान के साथ समझौता किया जाए या फिर उसे पूरी तरह खत्म कर दिया जाए।
ट्रंप ने यह टिप्पणी उस समय की जब उनसे ईरान के साथ संभावित समझौते को लेकर सवाल पूछा गया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “या तो हम जाकर उन्हें पूरी तरह नष्ट कर दें, या फिर हम उनके साथ समझौता करें। यही दो विकल्प हमारे सामने हैं।” उनके इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।
अमेरिकी राष्ट्रपति ने बताया कि उन्हें हाल ही में सैन्य स्थिति के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई है। यह जानकारी अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रमुख एडमिरल एडम ब्रैडली कूपर द्वारा दी गई, जिसमें क्षेत्र में चल रही गतिविधियों और रणनीतिक स्थिति पर चर्चा की गई।
हालांकि, अपने सख्त बयान के साथ ट्रंप ने यह भी जोड़ा कि वह मानवीय दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए ईरान पर सीधे सैन्य कार्रवाई नहीं करना चाहते। उन्होंने कहा कि युद्ध और बमबारी का असर आम नागरिकों पर पड़ता है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
ट्रंप ने ईरान के आंतरिक हालात पर भी टिप्पणी करते हुए दावा किया कि वहां का नेतृत्व एकजुट नहीं है। उनके अनुसार, ईरानी नेतृत्व तीन से चार अलग-अलग गुटों में बंटा हुआ है, जिनके बीच आपसी तालमेल की कमी है। उन्होंने कहा कि यही असंगठित स्थिति किसी ठोस निर्णय तक पहुंचने में बाधा बन रही है।
उन्होंने आगे कहा, “ईरान ने कुछ प्रगति जरूर की है, लेकिन मुझे नहीं लगता कि वे बातचीत के जरिए कोई ठोस समाधान निकाल पाएंगे। उनके नेताओं में समन्वय की भारी कमी है और वे आपस में ही उलझे हुए हैं।”
ट्रंप का यह भी मानना है कि ईरान के भीतर सभी गुट किसी न किसी रूप में समझौता चाहते हैं, लेकिन आंतरिक मतभेदों के कारण वे एक स्पष्ट रणनीति तय नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस स्थिति ने बातचीत की संभावनाओं को जटिल बना दिया है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ट्रंप के इस बयान को काफी गंभीरता से लिया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच पहले से ही तनावपूर्ण संबंध इस तरह के बयानों से और अधिक जटिल हो सकते हैं।
गौरतलब है कि पिछले कुछ समय से अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बना हुआ है, जिसमें सैन्य गतिविधियों, आर्थिक प्रतिबंधों और कूटनीतिक प्रयासों का मिश्रण देखने को मिल रहा है।
ट्रंप के ताजा बयान से यह साफ है कि अमेरिका अभी भी ईरान के मुद्दे पर सख्त रुख बनाए हुए है, हालांकि बातचीत के रास्ते पूरी तरह बंद नहीं किए गए हैं। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दोनों देशों के बीच तनाव किस दिशा में आगे बढ़ता है और क्या कूटनीति इस संकट का समाधान निकाल पाती है।





