आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
ब्रिटेन में स्टूडेंट वीजा नियमों को सख्त किए जाने का असर अंतरराष्ट्रीय छात्रों, खासकर भारतीय विद्यार्थियों पर पड़ सकता है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, वीजा आवेदन खारिज होने की आशंका के कारण ब्रिटेन के कई विश्वविद्यालय विदेशी छात्रों को दिए गए दाखिले के प्रस्ताव वापस ले रहे हैं। इससे उन विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है, जो ब्रिटेन में उच्च शिक्षा हासिल करने की तैयारी कर रहे हैं।
फाइनेंशियल टाइम्स की ओर से आधिकारिक आंकड़ों के विश्लेषण में यह बात सामने आई है कि विश्वविद्यालय विदेशी छात्रों की भर्ती पर पूरी तरह प्रतिबंध लगने के जोखिम से बचने के लिए दाखिले के प्रस्ताव वापस लेने का कदम उठा रहे हैं।
वीजा रिजेक्शन की सीमा 5 प्रतिशत
ब्रिटेन के गृह कार्यालय (होम ऑफिस) के नियमों के तहत, यदि किसी शिक्षण संस्थान को अंतरराष्ट्रीय छात्रों को दिए गए प्रस्तावों के बाद उनके 5 प्रतिशत से अधिक वीजा आवेदन खारिज हो जाते हैं, तो उस संस्थान पर विदेशी छात्रों की भर्ती करने पर प्रतिबंध लगने का खतरा हो सकता है।
इससे पहले यह सीमा 10 प्रतिशत थी। सरकार ने इसे घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया है। ब्रिटिश सरकार का मानना है कि कुछ देशों के नागरिकों द्वारा स्टूडेंट वीजा व्यवस्था का दुरुपयोग किया जा रहा है। रिपोर्ट में पाकिस्तान और नाइजीरिया के आवेदकों का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है।