आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
खाड़ी क्षेत्र के अरब देश लंबे समय से ईरान के खतरे के बीच एकजुटता का प्रदर्शन करते रहे हैं लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह एकता अक्सर सतही होती है और इसके पीछे गहरे नीतिगत मतभेद छिपे रहते हैं।
हाल ही में 28 अप्रैल 2026 को सऊदी अरब के जेद्दा में खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) की बैठक में सदस्य देशों ने एकजुटता का संदेश देते हुए ईरान को चेतावनी दी कि किसी एक सदस्य पर हमला सभी पर हमला माना जाएगा। कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी ने इसे “खाड़ी देशों की एकजुट स्थिति” का प्रतीक बताया और होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान के दावे को खारिज किया।
हालांकि यह एकता का प्रदर्शन ऐसे समय में सामने आया है जब जीसीसी के भीतर मतभेद भी उभरकर सामने आए हैं, जिनमें संयुक्त अरब अमीरात का ओपेक से बाहर होना भी शामिल है।
जानकारों के अनुसार, यह विरोधाभास नया नहीं है। ईरान के साथ तनाव बढ़ने पर खाड़ी देश अक्सर सार्वजनिक रूप से एकजुट नजर आते हैं, लेकिन उनकी नीतियां और प्राथमिकताएं अलग-अलग बनी रहती हैं।