दुबई।
यमन में हूती विद्रोहियों और सरकार समर्थित बलों के बीच संघर्ष एक बार फिर तेज हो गया है। यमन की सरकारी सेना ने मारिब प्रांत में हूती ठिकानों और सैन्य वाहनों को निशाना बनाने का दावा किया है। सरकारी बलों के अनुसार, इन हमलों में कई सैन्य वाहन नष्ट हुए और कई हूती लड़ाके मारे गए। हाल के दिनों में यमन में लड़ाई तेज होने के बाद बड़ी संख्या में लोग विस्थापित भी हुए हैं।
सरकारी बलों ने शुक्रवार को जारी एक वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि मारिब के विभिन्न इलाकों में हूती सैन्य ठिकानों और वाहनों पर हमले किए गए। एक पोस्ट में सरकारी सेना ने मारिब में नौ हूती वाहनों को निशाना बनाने का दावा किया और कहा कि इन वाहनों में सवार लड़ाके मारे गए।
एक अन्य पोस्ट में सरकारी बलों ने उत्तरी मारिब में ड्रोन हमले किए जाने की जानकारी दी। अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, यमन की सरकार समर्थित सेना ने मारिब में हूती बलों के खिलाफ ड्रोन हमलों की बात कही है।
यमन में हाल के दिनों में संघर्ष काफी बढ़ गया है। ईरान समर्थित हूती लड़ाकों ने लाल सागर के तट पर तेजी से बढ़त बनाई है और रणनीतिक बंदरगाह मोखा पर भी कब्जा किया है। इससे बाब-अल-मंदब जलडमरूमध्य और वैश्विक समुद्री व्यापार को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
यमन में बढ़ते संघर्ष के बीच सऊदी अरब ने हूतियों के हमलों से निपटने के लिए अपने सहयोगियों से सैन्य और वायु रक्षा सहायता मांगी है। रिपोर्टों के अनुसार, सऊदी अरब को मिसाइल इंटरसेप्टर की कमी का भी सामना करना पड़ रहा है। अमेरिका ने हालांकि हूतियों के खिलाफ सीधे सैन्य हस्तक्षेप से फिलहाल दूरी बनाए रखी है।
रॉयटर्स के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सऊदी अरब की सैन्य सहायता की अपील के बावजूद हूतियों के खिलाफ सीधे अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप को लेकर सहमति नहीं दी है। अमेरिका पहले से ही ईरान के साथ जारी युद्ध में सैन्य संसाधनों और हथियारों पर दबाव का सामना कर रहा है।
यमन में हूती संगठन को ईरान के साथ गठबंधन रखने वाला समूह माना जाता है। ईरान हूतियों को सैन्य समर्थन देने के आरोपों से इनकार करता रहा है, हालांकि विभिन्न रिपोर्टों में ईरानी हथियारों, प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता का उल्लेख किया गया है।
यमन में संघर्ष के दोबारा तेज होने से अमेरिका के सामने एक अतिरिक्त सैन्य और कूटनीतिक चुनौती पैदा हो सकती है। ईरान के साथ युद्ध पहले ही सातवें महीने में पहुंच चुका है और इसका असर तेल की कीमतों तथा क्षेत्रीय समुद्री मार्गों पर पड़ा है। ऐसे में यमन में सीधे सैन्य हस्तक्षेप से संघर्ष का दायरा और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
रॉयटर्स के मुताबिक, सऊदी अरब और हूतियों के बीच हालिया संघर्ष ने लाल सागर के रास्ते खाड़ी देशों से होने वाले तेल निर्यात पर भी जोखिम बढ़ा दिया है। इसके साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य में पहले से जारी व्यवधान के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता और बढ़ गई है।
लड़ाई तेज होने का सबसे गंभीर असर आम नागरिकों पर पड़ा है। संयुक्त राष्ट्र की अंतरराष्ट्रीय प्रवासन एजेंसी (IOM) के अनुसार, हालिया संघर्ष के कारण 1.12 लाख से अधिक लोग यमन के भीतर विस्थापित हुए हैं, जबकि करीब 3,000 लोग समुद्र के रास्ते जिबूती पहुंच चुके हैं।
यमन में जारी संघर्ष अब केवल सरकारी बलों और हूतियों के बीच सत्ता संघर्ष तक सीमित नहीं रह गया है। ईरान-अमेरिका टकराव, सऊदी अरब की सुरक्षा चिंताओं और लाल सागर तथा बाब-अल-मंदब जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों की स्थिति ने इसे व्यापक क्षेत्रीय संकट का रूप दे दिया है।