कैंसर सर्जरी के बाद पेरू और लातिन अमेरिका जाएंगे पोप लियो 14वें

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 05-11-2026
Pope Leo XIV to visit Peru and Latin America after cancer surgery
Pope Leo XIV to visit Peru and Latin America after cancer surgery

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली

 
फेफड़ों के कैंसर की सर्जरी के तीन सप्ताह बाद पोप लियो 14वें अपनी अब तक की सबसे लंबी और महत्वपूर्ण विदेश यात्रा पर जाने की तैयारी कर रहे हैं। उनकी यह 12 दिवसीय यात्रा लातिन अमेरिका के तीन देशों तक पहुंचेगी। इस दौरे को उनके कार्यकाल की अब तक की सबसे खास यात्राओं में से एक माना जा रहा है।
 
अमेरिका में जन्मे 71 वर्षीय पोप लियो 14वें इस यात्रा के दौरान पेरू भी जाएंगे। पेरू से उनका गहरा व्यक्तिगत और आध्यात्मिक जुड़ाव है। उन्होंने यहां एक मिशनरी पादरी के रूप में करीब दो दशक बिताए हैं। इतना ही नहीं, उनके पास पेरू की नागरिकता भी है।
 
पेरू के लोगों से उनका लगाव काफी पुराना है। पोप चुने जाने के बाद जब वह पहली बार सेंट पीटर गिरजाघर की बालकनी पर आए थे, तब उन्होंने विशेष रूप से स्पेनिश भाषा में लोगों को संबोधित किया था। यह उनके पेरू के साथ गहरे रिश्ते को दर्शाता है।
 
6 से 17 नवंबर तक चलेगी यात्रा
 
पोप लियो 14वें की यह यात्रा 6 नवंबर से 17 नवंबर तक निर्धारित है। इस दौरान वह उरुग्वे, अर्जेंटीना और पेरू का दौरा करेंगे। यात्रा में करीब 31 हजार किलोमीटर की दूरी तय करनी होगी। इसके लिए उन्हें लगभग 12 से 14 उड़ानों और दो हेलीकॉप्टर यात्राओं का सहारा लेना पड़ेगा। यह उनके अब तक के कार्यकाल की सबसे लंबी विदेश यात्राओं में से एक होगी। 
 
डॉक्टरों ने दी यात्रा की अनुमति
 
हाल ही में हुई सर्जरी के बावजूद पोप की सेहत में सुधार हो रहा है। वेटिकन के अनुसार, 13 अक्टूबर को उनके दाहिने फेफड़े का वह हिस्सा सर्जरी के जरिए हटाया गया था, जिसमें कैंसरग्रस्त ट्यूमर पाया गया था। जांच में बीमारी के एक ही स्थान तक सीमित होने की पुष्टि हुई और डॉक्टरों ने बताया कि फिलहाल उन्हें आगे किसी कैंसर उपचार की जरूरत नहीं है।
 
पोप के निजी चिकित्सक लुइगी कार्बोन ने मेडिकल जांच के बाद यात्रा पर जाने की अनुमति दी है। हालांकि, डॉक्टरों की सलाह के अनुसार पोप अपनी सेहत का ध्यान रखते हुए आराम और जरूरी सावधानियों का पालन करेंगे। 
 
पेरू से जुड़ी हैं पोप की खास यादें
 
इस यात्रा का सबसे भावनात्मक पड़ाव पेरू माना जा रहा है। पोप लियो ने अपने जीवन के करीब 20 साल वहां मिशनरी पादरी और बिशप के रूप में बिताए हैं। वह 2015 से 2023 तक चिक्लायो के बिशप भी रहे। पेरू की संस्कृति, लोगों और धार्मिक जीवन ने उनके व्यक्तित्व और सेवा के नजरिये को गहराई से प्रभावित किया है।