आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने कहा है कि मिजो विवाह और संपत्ति उत्तराधिकार कानून में हाल ही में किए गए संशोधन सरकार की एकतरफा पहल नहीं थे, बल्कि प्रमुख हितधारकों के बीच आम सहमति पर आधारित थे।
उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर तीखी बहस जारी है।
कानून विभाग का भी प्रभार संभाल रहे लालदुहोमा द्वारा पेश किया गया मिजो विवाह और संपत्ति उत्तराधिकार (संशोधन) विधेयक इस महीने की शुरुआत में विधानसभा द्वारा पारित किया गया था।
यह संशोधन प्रथागत कानून को और अधिक संहिताबद्ध करता है और 2014 के मूल अधिनियम को मजबूत करता है, जिसमें बहुविवाह, अंतर-सामुदायिक विवाह और महिलाओं के संपत्ति अधिकारों से संबंधित परिवर्तन शामिल हैं।
ये कानून बहुविवाह पर एक ऐतिहासिक प्रतिबंध लगाता है और महिलाओं को वैवाहिक संपत्ति में 50 प्रतिशत का अधिकार प्रदान करता है, लेकिन इसने मुख्यमंत्री द्वारा एक खंड की व्याख्या को लेकर तीव्र बहस छेड़ दी है, जिसके अनुसार यदि मिज़ो महिलाएं गैर-मिज़ो पुरुषों से शादी करती हैं तो वे संभावित रूप से अपनी मिज़ो पहचान और अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा खो सकती हैं।
मिजोरम के सबसे बड़े महिला संगठन, मिजो ह्मेइछे इंसुइखौम पावल (एमएचआईपी) ने शुक्रवार को राज्य सरकार से विधेयक वापस लेने का आग्रह किया, इसे मिजो महिलाओं के लिए संभावित रूप से "असुरक्षित" बताया।