न्यूयॉर्क
अमेरिका के विदेश मंत्री Marco Rubio ने दावा किया है कि ईरान के खिलाफ चल रहा सैन्य अभियान अब अंतिम चरण में है और इसके मुख्य लक्ष्य आने वाले कुछ ही हफ्तों में हासिल कर लिए जाएंगे। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यह संघर्ष महीनों तक नहीं चलेगा, बल्कि अपेक्षा से कहीं तेज़ी से समाप्त हो सकता है।
Al Jazeera को दिए एक विशेष साक्षात्कार में रुबियो ने कहा कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ रही है। उनके अनुसार, ईरान की वायु सेना को काफी हद तक निष्क्रिय कर दिया गया है और उसकी नौसैनिक क्षमता भी गंभीर रूप से कमजोर हो चुकी है। अब अमेरिका का मुख्य ध्यान ईरान के मिसाइल प्रक्षेपण स्थलों और ड्रोन निर्माण इकाइयों को नष्ट करने पर है।
हालांकि युद्ध जारी है, लेकिन अमेरिका ने कूटनीतिक रास्ते पूरी तरह बंद नहीं किए हैं। रुबियो ने बताया कि Iran और United States के बीच सीधे संवाद नहीं हो रहे हैं, लेकिन मध्यस्थों के जरिए संदेशों का आदान-प्रदान जारी है।
उन्होंने कहा कि यह बातचीत फिलहाल गोपनीय स्तर पर चल रही है और भविष्य में किसी समझौते की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। रुबियो के मुताबिक, अमेरिकी नेतृत्व अब भी बातचीत के जरिए समाधान को प्राथमिकता देता है।
इसी बीच Donald Trump ने सोशल मीडिया पर कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी है कि यदि जल्द युद्धविराम नहीं हुआ, तो ईरान के ऊर्जा ढांचे को पूरी तरह नष्ट कर दिया जाएगा। इस पर विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका एक “दोहरी रणनीति” अपना रहा है—एक ओर बातचीत, दूसरी ओर सैन्य दबाव।
रुबियो ने स्पष्ट किया कि अमेरिका की सबसे बड़ी शर्त यह है कि ईरान अपने परमाणु हथियार कार्यक्रम और लंबी दूरी की मिसाइल योजनाओं को पूरी तरह छोड़ दे। उन्होंने कहा कि ईरान को केवल नागरिक उपयोग के लिए परमाणु ऊर्जा विकसित करने की अनुमति हो सकती है, लेकिन उसे परमाणु हथियार बनाने की क्षमता नहीं दी जाएगी।
रुबियो के अनुसार, ईरान की मिसाइलें खाड़ी क्षेत्र के देशों—जैसे सऊदी अरब, यूएई, कतर, कुवैत और बहरीन—के लिए खतरा है
वहीं, तेहरान स्थित विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान की सैन्य रणनीति आक्रामक नहीं, बल्कि रक्षात्मक है। University of Tehran के प्रोफेसर हसन अहमदियन के अनुसार, ईरान असममित युद्ध की स्थिति में अपनी सुरक्षा क्षमताओं को मजबूत कर रहा है।
उनका कहना है कि ईरान को लगातार बाहरी दबावों का सामना करना पड़ा है, इसलिए उसने अपनी सैन्य रणनीति को उसी अनुरूप विकसित किया है।रुबियो ने ईरान की आंतरिक राजनीति को लेकर भी अनिश्चितता जताई। उन्होंने कहा कि देश में नेतृत्व को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है, खासकर नए संभावित सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई को लेकर।
उनके अनुसार, यह साफ नहीं है कि निर्णय लेने की वास्तविक शक्ति किसके हाथ में है, जिससे स्थिति और जटिल हो जाती है।हालांकि रुबियो ने कहा कि मौजूदा सैन्य अभियान का आधिकारिक उद्देश्य सत्ता परिवर्तन नहीं है, लेकिन उन्होंने यह संकेत जरूर दिया कि यदि ईरान में राजनीतिक बदलाव होता है, तो अमेरिका उसका स्वागत करेगा।
रुबियो ने NATO के कुछ सदस्य देशों, खासकर स्पेन, पर असहयोग का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि संकट के समय सहयोग न मिलने से अमेरिका को भविष्य में इस सैन्य गठबंधन की उपयोगिता पर पुनर्विचार करना पड़ सकता है।