आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि ईरानी परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका के साथ अप्रत्यक्ष वार्ता देश की ‘‘सबसे गहन और लंबी वार्ताओं’’ में से एक रही।
अराघची ने बृहस्पतिवार को ईरान के सरकारी टेलीविजन को दिए एक साक्षात्कार में यह बात कही। उन्होंने कोई खास जानकारी नहीं दी, लेकिन कहा, “हमारी तरफ से जो कदम उठाने हैं, वे साफ तौर पर बता दिए गए हैं।”
अमेरिका ने अभी तक वार्ता को लेकर कोई टिप्पणी नहीं की है। अमेरिकी राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास एवं कार्यालय ‘व्हाइट हाउस’ ने टिप्पणी के अनुरोध पर तत्काल कोई जवाब नहीं दिया।
ईरान और अमेरिका ने बृहस्पतिवार को तेहरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर कई घंटे तक अप्रत्यक्ष वार्ता की, लेकिन कोई समझौता नहीं हो सका। इससे पश्चिम एशिया में एक और युद्ध का खतरा बना हुआ है, क्योंकि अमेरिका ने क्षेत्र में बड़ी संख्या में लड़ाकू विमान और युद्धपोत तैनात कर दिए हैं।
जिनेवा में हुई वार्ता में मध्यस्थता करने वाले ओमान के विदेश मंत्री बद्र अलबुसैदी ने कहा कि बातचीत में ‘‘महत्वपूर्ण प्रगति’’ हुई है। हालांकि, उन्होंने विस्तृत जानकारी नहीं दी।
लेकिन वार्ता समाप्त होने से ठीक पहले, ईरान के सरकारी टेलीविजन ने अपनी खबर में बताया कि तेहरान यूरेनियम संवर्धन जारी रखने के लिए दृढ़ संकल्पित है। उसने इसे विदेश भेजने के प्रस्तावों को खारिज कर दिया है और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध हटाने की मांग की है। इससे संकेत मिलता है कि वह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मांगों को मानने के लिए तैयार नहीं है।
डोनाल्ड ट्रंप ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने के लिए समझौता करना चाहते हैं। उनका मानना है कि यह सही मौका है, क्योंकि हाल में देशभर में हुए प्रदर्शनों के बाद देश के भीतर जन-असंतोष बढ़ा है।