अमेरिकी हमले में ईरान का क़ोम टरबाइन प्लांट पूरी तरह तबाह हुआ

Story by  एटीवी | Published by  [email protected] | Date 23-03-2026
Iran's Qom Turbine Plant Completely Destroyed in US Attack
Iran's Qom Turbine Plant Completely Destroyed in US Attack

 

फ्लोरिडा/तेहरान

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच US Central Command (CENTCOM) ने दावा किया है कि अमेरिकी हवाई हमलों में Qom स्थित टरबाइन इंजन उत्पादन संयंत्र पूरी तरह नष्ट कर दिया गया है। यह संयंत्र ईरान के ड्रोन और विमान के पुर्जों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता था।

सेंटकॉम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस हमले से पहले और बाद की तस्वीरें साझा करते हुए बताया कि यह प्लांट गैस टरबाइन इंजन बनाता था, जिनका इस्तेमाल ईरान की Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) द्वारा हमलावर ड्रोन और अन्य सैन्य उपकरणों में किया जाता था। 6 मार्च की तस्वीर में संयंत्र पूरी तरह सुरक्षित दिखाई दे रहा है, जबकि हमले के तीन दिन बाद की तस्वीर में यह पूरी तरह ध्वस्त नजर आता है।

गौरतलब है कि अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच चल रहा संघर्ष अब चौथे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है। इस टकराव की शुरुआत ईरान के सर्वोच्च नेता Ayatollah Ali Khamenei की हत्या के बाद हुई थी, जिसके बाद क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है।

इस बीच, Emmanuel Macron ने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस Mohammed bin Salman के साथ बातचीत की। उन्होंने सऊदी अरब के प्रति फ्रांस की एकजुटता दोहराते हुए कहा कि फ्रांस, सऊदी अरब की वायु रक्षा प्रणाली को मजबूत करने में सहयोग करेगा। मैक्रों ने यह भी कहा कि सऊदी अरब पर ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमले “अस्वीकार्य” हैं।

मैक्रों ने क्षेत्र में बढ़ते तनाव पर चिंता जताते हुए सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की। उन्होंने कहा कि ऊर्जा प्रतिष्ठानों और नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमलों को अस्थायी रूप से रोकना बेहद जरूरी है, ताकि हालात नियंत्रण से बाहर न हो जाएं।

इसके साथ ही उन्होंने Strait of Hormuz में जहाजों की आवाजाही बहाल करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उनका मानना है कि यह वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और आर्थिक स्थिरता के लिए बेहद अहम है।मैक्रों ने यह भी कहा कि मौजूदा हालात में G7 और Gulf Cooperation Council के बीच समन्वय बढ़ाना जरूरी है, ताकि कूटनीतिक समाधान की दिशा में कदम बढ़ाया जा सके।

विशेषज्ञों के अनुसार, अगर यह संघर्ष इसी तरह बढ़ता रहा, तो इसका असर केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर भी गंभीर रूप से महसूस किया जाएगा।